Home Latest News & Updates UPSC प्रारंभिक परीक्षा में बड़ा बदलाव: फर्जीवाड़े पर रोक लगाने को पहली बार ‘चेहरे की पहचान प्रणाली’ का प्रयोग

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में बड़ा बदलाव: फर्जीवाड़े पर रोक लगाने को पहली बार ‘चेहरे की पहचान प्रणाली’ का प्रयोग

by Sanjay Kumar Srivastava 4 June 2026, 6:11 PM IST (Updated 4 June 2026, 6:13 PM IST)
4 June 2026, 6:11 PM IST (Updated 4 June 2026, 6:13 PM IST)
UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2026 में बड़ा बदलाव: फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए पहली बार 'चेहरे की पहचान प्रणाली' का सफल प्रयोग

UPSC Exam: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 में चेहरे की पहचान प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है. आयोग के अनुसार, यह तकनीक परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग को पूरी तरह समाप्त करेगी. इसके तहत परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षकों द्वारा मोबाइल फोन आधारित सत्यापन के जरिए उम्मीदवारों की लाइव और वास्तविक समय में पहचान की जाएगी. यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि आवेदन पत्र में अपलोड की गई फोटो और परीक्षा देने आया उम्मीदवार एक ही व्यक्ति हो, जिससे परीक्षा में धांधली रुकेगी. यूपीएससी ने 24 मई को आयोजित इस वर्ष की सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 के दौरान देशभर के सभी 2,072 परीक्षा केंद्रों पर वास्तविक समय में चेहरे की पहचान की प्रक्रिया का संचालन किया.

चेहरे की पहचान से गुजरना अनिवार्य

अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले कुल 8,19,732 उम्मीदवारों में से लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार (लगभग 67 प्रतिशत) परीक्षा में शामिल हुए. चेहरे की पहचान संबंधी यह एप्लिकेशन यूपीएससी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (एनईजीडी) के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है.

यूपीएससी ने एक ऐसी व्यावसायिक प्रक्रिया विकसित की है जिसके तहत प्रत्येक उम्मीदवार को परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले चेहरे की पहचान से गुजरना अनिवार्य है. इस प्रक्रिया के अंतर्गत UPSC ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार की है, जिसे उन सभी राज्यों, जिलों और परीक्षा केंद्रों के साथ साझा किया गया है जहां परीक्षा प्रस्तावित है. पर्यवेक्षकों को कई चरणों का प्रशिक्षण दिया गया.

स्मार्टफोन पर करता है काम

इस समाधान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी महंगे हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं है. यह किसी भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर काम करता है, और पर्यवेक्षकों ने इसके लिए अपने मोबाइल फोन का उपयोग किया. इस एप्लिकेशन की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी गति है. उम्मीदवार के चेहरे के प्रमाणीकरण में केवल 6-8 सेकंड का समय लगता है, जिससे परीक्षा केंद्रों पर सुचारु प्रवेश सुनिश्चित हुआ और लंबी कतारें लगने से बचा जा सका.

बयान में कहा गया है कि एप्लिकेशन की स्केलेबिलिटी इतनी अधिक थी कि इसका उपयोग एक साथ 7,000 से अधिक पर्यवेक्षकों द्वारा किया गया और प्रवेश के चरम समय के दौरान एप्लिकेशन ने प्रति मिनट लगभग 12,000 प्रमाणीकरण संसाधित किए. यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि यह परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक नया कदम है.

बनी रहेगी परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता

उन्होंने कहा कि यह तकनीक पूरी तरह से एनईजीडी की मदद से आंतरिक रूप से विकसित की गई है. कुमार ने कहा कि हालांकि, समाधान को बड़े पैमाने पर लागू करने, चेहरे के प्रमाणीकरण के लिए मौजूदा पर्यवेक्षकों का उपयोग करने, उन्हें प्रशिक्षित करने और यह सब कम समय में पूरा करने में भी चुनौती थी. यूपीएससी, एनईजीडी की टीमों ने 2000 से अधिक केंद्रों में लगभग 5.5 लाख उम्मीदवारों के साथ इतने बड़े पैमाने पर इस काम को सफलतापूर्वक किया . बयान में कहा गया है कि वास्तविक समय में चेहरे की प्रमाणीकरण प्रणाली का सफल कार्यान्वयन सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता, पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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News Source: PTI

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