BINDRA PROTEST: NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली सहित पूरे देश में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने बड़ा बयान दिया है. भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने गुरुवार को कहा कि सरकार को ऐसी शिक्षा प्रणाली बनानी चाहिए, जो लोगों में भरोसा जगाए. बिंद्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग वाले मौजूदा आंदोलन पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की, लेकिन एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित प्रणाली की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
योग्यता को बढ़ावा देने वाली हो शिक्षा व्यवस्था
मालूम हो कि अभिनव बिंद्रा भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं, जिन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की. उन्होंने कहा कि मैंने कभी खुद को राजनीतिक व्यक्ति नहीं माना. लेकिन मेरा मानना है कि कुछ मुद्दे हम सभी से जुड़े हैं, चाहे हमारी सोच कुछ भी हो. शिक्षा उनमें से एक है. उन्होंने कहा कि किसी देश की पहचान सिर्फ़ उसकी अर्थव्यवस्था या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि युवाओं के लिए पैदा किए गए मौकों से होती है. एक ऐसी शिक्षा प्रणाली जो भरोसा जगाए, योग्यता को बढ़ावा दे और जिज्ञासा को पोषित करे, वह देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक होती है.
पेपर लीक की लेनी होगी जिम्मेदारी
उन्होंने आगे कहा कि मुझे उम्मीद है कि हम सब मिलकर अपनी शिक्षा प्रणाली को लगातार मज़बूत करने के लिए काम कर सकते हैं, ताकि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों, इनोवेशन और उम्मीद का ज़रिया बनी रहे. दुनिया के जाने-माने रैपिड और ब्लिट्ज़ स्पेशलिस्ट युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर निहाल सरीन ने इस मामले पर और भी साफ़ और कड़े विचार रखे. सरीन ने कहा कि उन्हें उन छात्रों की हालत देखकर बहुत दुख होता है जो करियर तय करने वाली परीक्षाओं की तैयारी के दौरान भारी दबाव झेलते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर मुद्दों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें ज़िम्मेदारी लेनी होगी.
युवाओं के भरोसे पर खरा उतरे सरकारी तंत्र
उन्होंने आगे कहा कि एक युवा भारतीय के तौर पर, जिसे इस देश का प्रतिनिधित्व करने पर गर्व है, मुझे दुख हो रहा है. किसी अहम परीक्षा में बैठने वाले युवा पर जो दबाव होता है, वह मामूली बात नहीं है. इसे नज़रअंदाज़ करना मंज़ूर नहीं है. इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कर रही है और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक उपवास रखकर इसे समर्थन दे रहे हैं. जंतर-मंतर पर उपवास कर रहे वांगचुक को पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया क्योंकि उनके ज़रूरी स्वास्थ्य पैरामीटर गिर रहे थे. अब वह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हैं. उनकी पत्नी ने उन्हें सरकारी अस्पताल से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी. 20 जुलाई को हज़ारों छात्रों ने अपनी निराशा ज़ाहिर करने के लिए संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज कर उन्हें रोक दिया. कहा कि युवाओं के भरोसे पर सरकारी तंत्र को खरा उतरना होगा.
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News Source: PTI
