Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को युवाओं में मानसिक मजबूती लाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि पारंपरिक पारिवारिक मार्गदर्शन की कमी और बहुत ज़्यादा मोबाइल-टीवी देखने की वजह से बच्चे कमज़ोर होते जा रहे हैं. नागपुर में लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी को बातचीत की ज़रूरत है और हमें उनमें पनपने वाले अकेलेपन को रोकना होगा. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज को युवाओं की मानसिक सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए.
पांडवों के संघर्ष से सीखें मानसिक मजबूती
उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाएं जैसे पांडवों के संघर्ष और चुनौतियां पहले युवा मन को मज़बूती देती थीं, लेकिन आज हालात बहुत खराब हैं. भागवत ने अफ़सोस जताते हुए पूछा कि 12वीं कक्षा में फेल होने पर वे आत्महत्या कर लेते हैं. घर पर डांट पड़ने पर वे भाग जाते हैं या कोई बड़ा गलत कदम उठा लेते हैं. मन इस हालत में कैसे पहुंच गया?” उन्होंने कहा कि आज बच्चों को दादी-नानी से पारंपरिक कहानियों के ज़रिए मार्गदर्शन मिलने के बजाय अक्सर टीवी के सामने छोड़ दिया जाता है या कम उम्र में ही मोबाइल फ़ोन दे दिया जाता है. उन्होंने बताया कि दादी-नानी की कमी और माता-पिता द्वारा बच्चों के साथ समय न बिताने की वजह से बच्चे अकेले पड़ गए हैं.
नई पीढ़ी को बातचीत की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि नई पीढ़ी को बातचीत की ज़रूरत है. हमें उनमें पनपने वाले अकेलेपन को रोकना होगा. अगर वे गलतियां कर रहे हैं, तो अक्सर इसके पीछे हमारा ही मार्गदर्शन न दे पाना कारण होता है. भागवत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि घरों और पूरे समाज में मुख्य ज़िम्मेदारी ऐसी सोच विकसित करने की है जो जीवन की चुनौतियों का सामना कर सके, ताकि यह पक्का किया जा सके कि नई पीढ़ी कमज़ोर न बने.
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को बातचीत की ज़रूरत है. हमें उस अकेलेपन को रोकना होगा जो उनमें घर कर जाता है, और अगर वे गलतियां कर रहे हैं, तो अक्सर इसके पीछे हमारा ही सही मार्गदर्शन न दे पाना कारण होता है. भागवत ने ज़ोर देकर कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती इतनी बड़ी है कि इसे अकेले मेडिकल प्रोफेशनल्स हल नहीं कर सकते. इसके लिए माता-पिता और बड़ों की सामूहिक कोशिश की ज़रूरत है.
बताया मानसिक सेहत सुधारने का मंत्र
उन्होंने आगे कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणालियों के साथ आधुनिक तौर-तरीकों को मिलाकर एक उन्नत भारतीय मनोविज्ञान विकसित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत में लंबे समय से मन के महत्व पर ज़ोर दिया गया है. आज भारत में जो मनोविज्ञान अपनाया जाता है, वह पश्चिमी देशों से आया है. मेरा मतलब इसे नकारात्मक रूप में कहने का नहीं है, लेकिन आधुनिक मनोविज्ञान उन्हीं आधारों पर बना है, फिर भी यह पूरी तरह से मुकम्मल नहीं है. भागवत ने योग वशिष्ठ और पतंजलि के योग सूत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की परंपरा मन का पूरा और समग्र इलाज बताती है, जिससे आधुनिक मनोविज्ञान भी सीख सकता है.
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News Source: PTI
