Brazil Election Results: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है. लूला अब चौथी बार देश के राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालेंगे. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग 44 लाख वोटों के अंतर से हराया. उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी, 2027 से शुरू होगा. लूला की यह जीत ऐसे समय में हुई है जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में ट्रम्प के समर्थक दक्षिणपंथी नेता चुनाव जीत रहे हैं. अपनी जीत के बाद, लूला डा सिल्वा ने कहा कि जनता ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए वोट दिया है.
विदेशी हस्तक्षेप को हराया
लूला ने कहा, “हम लोगों को यह समझाने में सफल रहे कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान करना बेहद जरूरी है. हमने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी हस्तक्षेप को हराया है. ब्राजील किसी का पिछला आंगन नहीं है. हम देश चलाने के तरीके को बदलेंगे. हम निर्णय लेने की प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी बढ़ाएंगे.” एक्स पर एक अन्य पोस्ट में, लूला ने अपनी पार्टी की एक पोस्ट साझा की, जिसमें लिखा था: “या तो मातृभूमि को आजाद रखो, या ब्राजील के लिए अपनी जान दे दो!” इस पोस्ट में इन शब्दों को ब्राजील का ‘स्वतंत्रता गान’ बताया गया है.
लूला को 51.76% वोट मिले
अल जजीरा के अनुसार, लैटिन अमेरिका के विभिन्न देशों के नेताओं और कई प्रमुख वामपंथी नेताओं ने बोल्सोनारो पर जीत हासिल करने के लिए लूला को बधाई दी. ब्राजीलियाई मीडिया और डेटाफोलहा (Datafolha) के अनुमानों के अनुसार, 99.77% वोटों की गिनती के बाद, चुनाव के दूसरे दौर में मौजूदा राष्ट्रपति को 51.76% वैध वोट मिले, जबकि बोल्सोनारो जूनियर को 48.24% वोट मिले. इस जीत के साथ, वर्कर्स पार्टी के सदस्य लूला ने सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेताओं की सूची में अपना स्थान और मजबूत कर लिया है. वे गेटुलियो वर्गास के बाद दूसरे स्थान पर हैं. अपने पिछले कार्यकाल के अंत तक, वे कुल 16 वर्षों तक सत्ता में रहे होंगे, जो ब्राजील के लोकतांत्रिक इतिहास में एक रिकॉर्ड है.
इन मुद्दों पर लड़ा गया चुनाव
यह जीत एक ऐसे चुनाव अभियान के बाद मिली है, जिसमें जीवन-यापन की लागत, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे हावी रहे. बोल्सोनारो ने अपने चुनाव अभियान में ‘अपराध के खिलाफ सख्त रुख’ को मुख्य मुद्दा बनाया और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने का वादा किया. दोनों ही राष्ट्रपति उम्मीदवारों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिनमें उनके परिवार के सदस्य और सहयोगी भी शामिल थे. लूला को भ्रष्टाचार के आरोप में एक साल से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा था, लेकिन बाद में उन आरोपों को रद्द कर दिया गया.
‘ग्लोबल साउथ’ के साथ रिश्तों की वकालत करते हैं लूला
लूला की जीत का असर ब्राजील के बाहर भी देखने को मिलेगा. लूला के नेतृत्व में लैटिन अमेरिका का यह सबसे बड़ा देश एक अधिक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगा. लूला ने ब्राजील की संप्रभुता पर जोर दिया है और ट्रम्प प्रशासन के साथ तनाव के बीच ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) तथा चीन के साथ करीबी संबंध बनाने की वकालत की है. लूला ने 1970 के दशक में एक यूनियन नेता के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने ‘वर्कर्स पार्टी’ की स्थापना में मदद की. वे इस पार्टी की ओर से तीन बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे और आखिरकार 2002 में चुनाव जीत गए.
News Source: ANI
