France Protest: फ्रांस में स्कूलों की खस्ताहाली और शिक्षकों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ एक छोटा सा छात्र विरोध-प्रदर्शन अब एक अभूतपूर्व राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है. सितंबर 2026 में पेरिस के एक उपनगरीय हाई स्कूल (लीसी) से शुरू हुआ यह आंदोलन बुनियादी सुविधाओं और बजट कटौती के विरोध में था. हालांकि, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, तो जनता में भारी आक्रोश फैल गया.
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नहीं थम रहा प्रदर्शन
पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में देश के प्रमुख छात्र संगठनों, शिक्षक संघों और अभिभावकों ने एकजुट होकर देशव्यापी हड़ताल का आह्वान कर दिया. देखते ही देखते इस आंदोलन ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया, जहां लगभग 4 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए और सैकड़ों स्कूलों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया. सरकार द्वारा आंशिक कर्फ्यू लगाने और हजारों गिरफ्तारियों के बावजूद यह प्रदर्शन थम नहीं रहा है. विश्लेषक इसे साल 1968 की ऐतिहासिक फ्रांसीसी क्रांति के समान मान रहे हैं, जिसने पूरे देश को ठप कर दिया था.

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें
पेरिस में बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. फ्रांस भर में 4 लाख से अधिक लोगों ने स्कूलों की खऱाब स्थिति और बढ़ती महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के लिए एक चुनौती है. पेरिस में मार्च शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ. लेकिन इसके अंतिम पड़ाव ‘पोर्ट डी विन्सेनेस’ के पास प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लोगों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.
प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन और आंसू गैस
गृह मंत्रालय के अनुसार, पूरे देश में 410,000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जिनमें से 1,10,000 लोग पेरिस में थे. प्रशासन ने राजधानी में मार्च को शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक ही सीमित रखा, ताकि प्रदर्शनकारियों को उन केंद्रीय इलाकों से दूर रखा जा सके, जहां पिछले सप्ताहांत भारी तबाही हुई थी. फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, फ्रांस के अन्य हिस्सों में भी पुलिस ने कार्रवाई की. ल्योन, क्लेरमोंट-फेरंड और स्ट्रासबर्ग में आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जबकि नीस और नैनटेस में वॉटर कैनन का प्रयोग हुआ. मार्सिले में, मार्च के अंतिम पड़ाव के पास कुछ दर्जन लोगों के साथ हुई झड़प के दौरान पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी.
64 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
पेरिस अभियोजक कार्यालय ने बताया कि प्रदर्शन के सिलसिले में 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 40 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में छह नाबालिग भी शामिल हैं. कार्यालय के अनुसार, इनमें से ज्यादातर गिरफ्तारियां हथियारों से जुड़े अपराधों या हिंसा करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचने वाले समूह में शामिल होने के संदेह में की गई हैं. मई में मतदाता मैक्रों के उत्तराधिकारी को चुनेंगे. इससे ठीक पहले उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी महीनों में यह अशांति उनके अधिकार की परीक्षा ले रही है. दांव पर बहुत कुछ लगा है. धुर-दक्षिणपंथी ‘नेशनल रैली’ ने उनकी सरकार पर जनता की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है. लोगों से अपील की है कि वे अपने गुस्से को मैक्रों के विरोध में वोट देकर जाहिर करें.
पूरे देश में 70 हजार अधिकारी तैनात
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने पूरे देश में 70 हजार अधिकारियों को तैनात करने की घोषणा की है, जिन्हें हेलीकॉप्टरों, बख्तरबंद वाहनों और वॉटर कैनन से लैस किया गया है. इस प्रदर्शन का नेतृत्व ट्रेड यूनियनों ने किया, जिनके पीछे रेनकोट पहने प्रदर्शनकारी चल रहे थे, जो अपने हाथों में झंडे और खुद बनाए गए प्लेकार्ड लिए हुए थे. 27 वर्षीय कैमिल चेसनियर ने बताया कि इंजीनियरिंग और मास्टर डिग्री होने के बावजूद उन्हें कोई काम नहीं मिल सका है. उन्होंने कहा कि मेरे जैसी स्थिति में बहुत सारे लोग हैं, जिनके पास कोई सुविधा नहीं है. वे सड़कों पर रहने या खाली पड़ी इमारतों में रहने को मजबूर हैं.

बेटी के साथ मार्च में शामिल हुई शिक्षिका
पिछले महीने पेरिस के दक्षिण-पूर्व में एक हाई स्कूल में स्टाफ की कमी को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल गया है. इसमें बेहतर स्कूलों की मांग कर रहे छात्र और ज्यादा वेतन व पेंशन की मांग कर रहे कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं. पेरिस में, 46 वर्षीय शिक्षिका बेनेडिक्ट पिटियन अपनी 16 वर्षीय बेटी गैरांस (जो एक हाई स्कूल की छात्रा है) के साथ लगातार हो रही बारिश के बीच मार्च में शामिल हुईं. दोनों ने शुरू से ही इस आंदोलन का समर्थन किया था, लेकिन एक साथ किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने का यह उनका पहला मौका था. पिटियन ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं की बात कोई नहीं सुन रहा है. एक अभिभावक और एक शिक्षिका होने के नाते मैं उनके साथ खड़ी हूं. गैरांस ने बताया कि पिछले सप्ताहांत हुई हिंसा की तस्वीरें देखकर वह काफी डरी हुई थीं, लेकिन उनका मानना है कि अगर वे घर पर ही रहीं, तो इससे सरकार की जीत हो जाएगी.
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31 अक्टूबर को रैलियां निकालने का आह्वान
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में सरकारी मिडिल और हाई स्कूलों में 15.4 मिलियन शिक्षण घंटे (टीचिंग आवर्स) का नुकसान हुआ, क्योंकि अनुपस्थित शिक्षकों की जगह किसी और को नियुक्त नहीं किया गया था. यह कुल निर्धारित शिक्षण समय का 7.5 प्रतिशत है. शुक्रवार को मैक्रों ने हाई स्कूल के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. प्रतिनिधियों ने बताया कि मैक्रों ने यूनिवर्सिटी में दाखिला प्रक्रिया में बड़े बदलाव का वादा किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे. ‘येलो वेस्ट’ विरोध आंदोलन के आयोजकों ने प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा के लिए 31 अक्टूबर को एक और रैलियां निकालने का आह्वान किया है.
कई शहरों में प्रदर्शन पर थी रोक
58 वर्षीय नर्स सौमाया आबेद, जिन्होंने लाल रंग की CGT यूनियन वेस्ट (जैकेट) पहनी हुई थी, ने बताया कि वह 30 से अधिक वर्षों से विरोध प्रदर्शनों में शामिल होती रही हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी राजधानी के बाहरी इलाके ‘पोर्ट डी’इटली’ से किसी प्रदर्शन को शुरू होते नहीं देखा. उन्होंने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों को चुप कराने का प्रयास कर रही है. लेकिन इससे यह आंदोलन नहीं रुकेगा. इससे छात्रों को स्कूलों में बेहतर हालात की मांग करने से नहीं रोका जा सकेगा. मार्सेई में, पुलिस के अनुसार 17,000 लोग शामिल हुए, जबकि CGT यूनियन का अनुमान है कि यह संख्या 1,00,000 थी. अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी शहर टूलूज़ में 26,500 लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. अधिकारियों ने ल्योन, नीस और मोंटपेलियर जैसे शहरों में रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया था.
ट्रेड यूनियनों ने प्रतिबंधों की आलोचना की
ट्रेड यूनियनों ने इन प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इन्हें ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का उल्लंघन बताया है, जिसे संविधान द्वारा संरक्षण प्राप्त है. शनिवार को पेरिस के दक्षिण में स्थित ऑरलियन्स में भी हज़ारों लोगों ने ‘फार-राइट’ (कट्टर दक्षिणपंथी) विचारधारा के खिलाफ एक अलग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया. उस समय, मरीन ले पेन की ‘नेशनल रैली’ पार्टी शहर में अपना दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित कर रही थी. मैक्रों, जो एक मध्यमार्गी नेता हैं, अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में इस संकट का सामना कर रहे हैं.
2017 में पदभार संभालने के बाद से, इस समय उनकी लोकप्रियता सबसे निचले स्तर पर है. उन्होंने कहा है कि शहरों के केंद्र, व्यवसायों और सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा के लिए ये कदम ज़रूरी हैं. नुनेज़ ने स्वीकार किया कि पिछले सप्ताहांत हुए हंगामे के दौरान कुछ शहरों में पुलिस का नियंत्रण छूट गया था. उस समय 5 लाख से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतर आए थे और पूरे फ्रांस में लगभग 3,000 दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया या उनमें लूटपाट की गई. सड़कों पर ऐसी हिंसा कई वर्षों में नहीं देखी गई थी. उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन मैक्रों ने इसे ठुकरा दिया.
बंद कर दिए गए संग्रहालय
शनिवार को ‘आर्क डी ट्रायम्फ’ के नीचे पुलिसकर्मी तैनात थे, और पूरे पेरिस में दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे लकड़ी के तख्ते लगा दिए थे. शनिवार को सेंट-लाज़ारे ट्रेन स्टेशन के पास 34 वर्षीय ठेकेदार अकरम अहमद एक चश्मे की दुकान के आगे तख्ते लगा रहे थे. उन्होंने बताया कि मुझे कल रात फोन आया था. दुकान के मालिक बहुत परेशान लग रहे थे. उन्होंने कहा कि मैंने उनकी जान बचा ली है. लूव्र, ओर्से म्यूज़ियम, पिकासो म्यूज़ियम और ग्रैंड पैलेस सहित कई प्रमुख संग्रहालय शनिवार को बंद रहे. दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समकालीन कला मेलों में से एक, ‘आर्ट बेसल’ शुक्रवार को जनता के लिए खोला गया था, लेकिन यह सिर्फ एक दिन के लिए ही खुला. खतरे को देखते हुए आयोजकों को सप्ताहांत (वीकेंड) के कार्यक्रम रद्द करने पड़े.
छात्र और कर्मचारी हैं नाराज
छात्रों की मांग है कि उच्च शिक्षा में 250,000 और सीटें बढ़ाई जाएं और ‘पारकोर्सअप’ , जो कि राष्ट्रीय प्रवेश प्रणाली है, के जरिए होने वाली चयन प्रक्रिया को खत्म किया जाए. उनकी 10 सूत्रीय संयुक्त योजना में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और स्कूलों तथा विश्वविद्यालयों की मरम्मत कराने की मांग भी शामिल है. वे रोजमर्रा के खर्चों में भी मदद चाहते हैं. छात्रों को मिलने वाली ग्रांट में हर महीने 200 यूरो (224 अमेरिकी डॉलर) की बढ़ोतरी और सार्वजनिक छात्र आवासों के किराए को स्थिर रखने की मांग.

महंगाई से लोगों में आक्रोश
राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी INSEE के अनुसार, फ्रांस में सितंबर के महीने में ऊर्जा की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 21.3 प्रतिशत अधिक थीं, जिससे कुल महंगाई दर बढ़कर 3.1 प्रतिशत हो गई. पेरिस में प्रदर्शन कर रहे लुई लेडौक्स-ज़टार्ड ने महंगाई को लेकर अपनी निराशा जाहिर की. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों को देखें तो हम नहीं चाहते कि हमारी हालत भी वैसी हो जाए, जहां आबादी के एक हिस्से के पास सब कुछ है, जबकि बाकी लोगों के पास कुछ भी नहीं है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि 30 साल की उम्र से पहले ही मुझे इतनी बार सड़कों पर उतरना पड़ेगा.
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