Democratic States Against Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसलों से अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों को चौंकाने के साथ-साथ कई बार झटका देते हुए भी दिखते हैं. उनके इन फैसलों में से एक टैरिफ लगाने का भी फैसला शामिल है. हालांकि, यहां पर ट्रंप को अपने देश में ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के शासन वाले 25 राज्यों के एक समूह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वाले फैसले के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है. आइए जानते हैं पूरी खबर.
25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दायर की याचिका
मिली जानकारी के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी के शासन वाले 25 राज्यों के एक समूह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले के खिलाफ अमेरिकी अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसके तहत अमेरिका में होने वाले कुल आयात का 99.4% हिस्सा लाने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया गया है.
पिछले महीने, अमेरिका ने इन 60 देशों पर 10% से 12.5% के बीच टैरिफ का एक नया दौर लागू किया. यह कदम 24 जुलाई को खत्म हुए 10% के ग्लोबल लेवी (वैश्विक शुल्क) की जगह लेने के लिए उठाया गया था और इसके पीछे जबरदस्ती मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) के मुद्दे पर इन देशों की विफलता का हवाला दिया गया था.
इन 25 राज्यों ने सोमवार को ‘यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ (US Court of International Trade) में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ याचिका दायर की. उनका तर्क है कि कई देशों पर फिर से टैरिफ लागू करने से पूरे देश में उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए लागत बढ़ जाएगी.
टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स, गवर्नर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों का गठबंधन ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ से इन टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग कर रहा है. जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हारने के बाद, प्रशासन एक बार फिर टैरिफ के नए दौर के जरिए परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी रूप से टैक्स बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.”
भारत और 16 अन्य देशों पर 10 प्रतिशत की टैरिफ दर लागू है. इससे पहले, अमेरिका ने भारत के लिए 12.5 प्रतिशत टैरिफ दर का प्रस्ताव दिया था. यह राहत तब मिली जब भारत ने 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन करके जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया.
बयान में कहा गया है कि जहां प्रशासन का दावा है कि वह वैश्विक व्यापार में जबरन मजदूरी से निपटने के लिए ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 301 का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं मुकदमे में तर्क दिया गया है कि यह उन्हीं व्यापक टैरिफ को लागू करने का एक बहाना है जिन्हें प्रशासन ने बार-बार लागू करने की कोशिश की और नाकाम रहा.
राष्ट्रपति के पास अपनी मर्जी टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं
जानकारी के अनुसार, इस याचिका में कहा गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत शुल्क लगाने की आवश्यकताओं का पालन न करके और जबरन श्रम प्रथाओं से निपटने के अपने घोषित लक्ष्य से कोई स्पष्ट संबंध रखे बिना नए शुल्क लागू करके कानून का उल्लंघन किया है.
न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन चाहे जिस तरह से इसे सही ठहराने की कोशिश करे, कानून और हमारा संविधान स्पष्ट रूप से कहते हैं कि राष्ट्रपति के पास अपनी मर्जी से किसी भी देश पर व्यापक टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है.” कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने एक बयान में कहा, “टैरिफ कर हैं, और अमेरिकी जनता राष्ट्रपति की विफल और अवैध आर्थिक नीति से उत्पन्न अतिरिक्त लागतों का बोझ नहीं उठा सकती और न ही उन्हें उठाना चाहिए – चाहे राष्ट्रपति कितना भी चाहें.”
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News Source: PTI
