Home Top News दुनिया की सबसे बड़ी रेयर अर्थ ताकत बना चीन! सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ से US की बढ़ी मुश्किलें

दुनिया की सबसे बड़ी रेयर अर्थ ताकत बना चीन! सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ से US की बढ़ी मुश्किलें

by Sachin Kumar 3 August 2026, 9:57 PM IST (Updated 3 August 2026, 10:46 PM IST)
3 August 2026, 9:57 PM IST (Updated 3 August 2026, 10:46 PM IST)
US pressure weapons without China rare earth magnets

Rare-Earth Magnets: रेयर अर्थ के मामले में चीन अमेरिका पर लगातार दबाव बना रहा है. यही नहीं पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर भी चीन नियंत्रण बनाए हुए हैं. इसके अलावा आपको यह जानकार भी हैरानी होगी कि चीन की यूनिवर्सिटियों में रेयर अर्थ की भी पढ़ाई कराई जा रही है. हर साल चीनी स्टूडेंट मैदानी इलाकों में जाकर मंगोलिया विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में दुर्लभ खनिजों के बारे में अध्ययन करते हैं. वर्तमान में चीन ने रेयर अर्थ एक्सपर्ट की एक ऐसी फौज खड़ी कर दी है कि जिसकी कल्पना खुद अमेरिका भी नहीं कर सकता है. यही वजह है कि अमेरिका अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी (चीन) के नियंत्रण से मुक्त होकर जरूरी खनिजों की घरेलू सप्लाई चेन को फिर से बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. हालांकि, अमेरिका में ज्यादातर नई खदानों के शुरू होने में अभी कई साल लग सकते हैं. यही कारण है कि अमेरिका अभी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा खदानों के कचरे से कुछ तत्वों को निकालने का काम कर रहा है. आपको बताते चलें कि फीनिक्स टेलिंग्स पारंपरिक माइनिंग से निकलने वाले वेस्ट (टेलिंग्स) के साथ-साथ रीसायकल किए गए मैग्नेट और डिस्क ड्राइव का इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर करती है. इनका इस्तेमाल सेपरेशन और मेटलाइजेशन के लिए किया जाता है, जिस पर चीन का सबसे ज्यादा दबदबा है.

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चीन की पकड़ को US देना चाहता है चुनौती

न्यू हैम्पशायर के एक्सेटर स्थित एक ऑफिस पार्क में संचालित फीनिक्स टेलिंग्स की छोटी रिफाइनरी, क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग पर चीन की मजबूत पकड़ को चुनौती देने में अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. हालांकि, कंपनी को सेपरेशन और मेटलाइजेशन क्षमता को बढ़ाने के लिए पेंटागन से मिलने वाले 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर से एक बड़ी फैक्ट्री को स्थापित करना होगा. आपको बताते चलें कि इस समय फीनिक्स टेलिंग्स कंपनी इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक का उपयोग कर पारंपरिक खनन से बचे पाउडरनुमा अपशिष्ट से इन मूल्यवान तत्वों को अलग करती है. साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भी इन अहम खनिजों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है. बता दें कि अमेरिका की ‘माइन्स-टू-मैग्नेट्स’ सप्लाई चेन में यही सबसे कमजोर कड़ियों में से एक मानी जाती है.

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अमेरिका को करना है चीनी प्रभाव से मुक्त

वहीं, मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रेयर अर्थ मेटेरियल्स पर काम करना अमेरिका के लिए बहुत जरूरी हो गया है. युद्ध में गोला-बारूद तेजी से खत्म हो रहा है. अमेरिका में क्रिटिकल मिनरल्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल, THAAD इंटरसेप्टर और F-35 फाइटर जेट में होता है. एक ओर जहां व्हाइट हाउस मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर्स से हथियारों के उत्पादन में तेजी लाने की मांग कर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ वह उन पर और भी कड़े नियम लागू कर रहा है, जिनके तहत वे चीन से क्रिटिकल-मिनरल कंपोनेंट्स नहीं खरीद सकते हैं. कंपनी के चीफ कमर्शियल ऑफिसर और को-फाउंडर एंथनी बैलाडॉन ने कहा कि डिफेंस की जरूरतों और नियमों को पूरा करने के लिए जरूरी समय-सीमा में इन स्टॉक को फिर से भरना और कामकाज का दायरा बढ़ाना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी. उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी क्षमता को काफी बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाने के लिए मैसाचुसेट्स के वोबर्न में स्थित यह कंपनी नियोडिमियम, प्रासियोडिमियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, समैरियम और यट्रियम को निकालकर प्रोडक्शन करने के लिए एक फैसिलिटी बनाने की योजना बना रही है. इन मेटल्स की जरूरत डिफेंस, एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में होती है. बैलाडॉन ने आगे कहा कि इसका मकसद यह है कि पूरा पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) को रेयर-अर्थ के मामले में चीनी प्रभाव से मुक्त करना है.

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रेयर अर्थ मेटेरियल्स की होती है जरूरत

हाल ही में गर्मी से बचाव के लिए विशेष हैजमैट सूट (Hazmat Suit) पहने दो टेक्नीशियन एक मशीन संचालित कर रहे थे. यह मशीन सिलेंडर, ट्यूब, फनल और कंट्रोल पैनल से बनी थी तथा चमकीले पीले रंग की रेलिंग वाले प्लेटफ़ॉर्म पर स्थापित थी. बिजली आधारित रासायनिक प्रक्रिया (इलेक्ट्रोलिसिस) के माध्यम से ऑक्सीजन को हटाकर ऑक्साइड फीड को ग्रे रंग की धातु नियोडिमियम-प्रासियोडिमियम (Neodymium-Praseodymium) में बदला जाता है. इसी मेटल का उपयोग शक्तिशाली परमानेंट मैग्नेट बनाने में किया जाता है, जिनका इस्तेमाल फाइटर जेट, मिसाइल, रडार सिस्टम और ड्रोन जैसे अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों में होता है. फीनिक्स टेलिंग्स के अधिकारी बैलाडॉन ने कहा कि कंपनी जिन मेटल्स को रिफाइन करती है और अन्य महत्वपूर्ण खनिज, आधुनिक रक्षा प्रणालियों में ‘बेहद अहम भूमिका’ निभाते हैं. उनके अनुसार, 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कोई अत्याधुनिक हथियार सिस्टम भी बेकार साबित हो सकता है, यदि उसमें आवश्यक खनिज उपलब्ध न हों. उन्होंने कहा कि अमेरिकी डिफेंस सेक्टर समैरियम पर निर्भर है और उसे हर साल 50 से 100 टन की जरूरत होती है, लेकिन इस मामले में अमेरिका की क्षमता काफी कम है. बैलाडॉन के मुताबिक, फीनिक्स टेलिंग्स उन कुछ कंपनियों में से एक है जो फाइनल मेटल बना सकती हैं, लेकिन इसकी क्षमता साल में सिर्फ 200 किलोग्राम के आस-पास है.

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जर्मनी कंपनी ने बंद कर दिया था प्रोडक्शन

कंपनी का मकसद आगामी तीन महीनों में इसे बढ़ाकर लगभग 5 टन करने का है. हालांकि, 120 टन क्षमता को पूरा करने के लिए 2028 तक का समय लग सकता है. बताया जा रहा है कि सालों तक अमेरिका की मैग्नेट बनाने वाली कंपनी ‘अर्नोल्ड मैग्नेटिक टेक्नोलॉजीज’ समैरियम के लिए चीन पर निर्भर थी. यह मैग्नेट टोमाहॉक जैसी सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होते हैं. बेल्जियम की केमिकल कंपनी ‘सॉल्वे’ ने 2000 में माइनिंग से निकली मिट्टी से रेयर-अर्थ को अलग करने और प्रोसेस करने का काम बंद कर दिया था उस समय चीन दुनिया भर में प्रोसेसिंग की ज़्यादातर क्षमताएं बना रहा था और उसका मकसद इस क्षेत्र पर कब्जा करना था. इसके बाद साल 2025 में जब चीन ने प्रोसेस किए गए जरूरी मटीरियल की सप्लाई रोक दी और अमेरिका सरकार को ट्रेड वॉर में पीछे हटने पर मजबूर करके चीन ने इसको हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. सॉल्वे के प्रवक्ता ने बताया कि सॉल्वे ने ला रोशेल साइट पर नियोडिमियम और प्रेसिओडिमियम को अलग करने का काम फिर से शुरू कर दिया. साथ ही उसने इस साल समैरियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे भारी रेयर-अर्थ को भी अलग करना शुरू कर दिया है. कंपनी के प्रवक्ता ने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर इसकी मांग इसलिए भी बढ़ी है, क्योंकि चीन की तरफ से जब रेयर अर्थ मेटेरियल्स की सप्लाई को रोक दिया गया था तब कई इंडस्ट्री को नुकसान हुआ था. साथ ही अब यह विभिन्न मशीनों में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी भी है.

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क्या कम हो रहे हैं एयर डिफेंस सिस्टम?

वहीं, चीन की तुलना में सोल्वे (Solvay) की लागत कोई बड़ी रुकावट नहीं बनी है. अर्नोल्ड मैग्नेटिक टेक्नोलॉजीज के CEO मैट ब्लेक ने कहा कि वे जो समैरियम-कोबाल्ट मैग्नेट बनाते हैं, उनकी लागत किसी हथियार सिस्टम की कुल लागत का एक छोटा सा हिस्सा ही होती है. इसके अलावा ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिकी सेना के पास एडवांस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है और एयर डिफेंस सिस्टम की कमी भी एक बड़ी चुनौती बन रही है. अगर युद्ध में ज्यादा जोखिम उठाया गए तो अमेरिकी सैनिकों की जान को खतरा हो सकता है. साथ ही अब चिंता बढ़ गई है कि भविष्य में चीन के साथ किसी संभावित संघर्ष में अमेरिकी सेना की मारक क्षमता कम हो सकती है. साथ ही टोमाहॉक, पैट्रियट और THAAD जैसे इंटरसेप्टर के स्टॉक को फिर से भरने में कम से कम तीन साल लग सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने चीन से जरूरी सामान लेने वाले डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर पर सख्त नियम को लागू करके इस मिशन पहले से ज्यादा मुश्किल बना दिया. अब डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर की आलोचना की जा रही है, क्योंकि वह प्रोडक्शन को प्राथमिकता देने में नाकाम रहे हैं. अब नए ऑर्डर के मुताबिक, अमेरिका उन हथियारों का इस्तेमाल करें, जो घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे हैं या फिर अपने सहयोगी देशों मिल रहे हैं.

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रेयर अर्थ का कर रहे हैं लगातार आकलन

लॉकहीड मार्टिन ने एक अपने एक बयान में कहा कि हम अपने ग्राहकों के मिशन में मदद करने वाले जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल रेयर अर्थ सप्लाई चेन का लगातार आकलन करते रहते हैं. बैलाडॉन को भरोसा है कि अमेरिकी कंपनियां और पार्टनर इस काम को पूरा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि आखिरकार इंडस्ट्री में सही सपोर्ट और पार्टनर के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.

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