Middle East War : अमेरिका की ओर से ईरान पर नए हमले की धमकी के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर दोनों देशों के बीच तनातनी मची हुई है. डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का दबाव बना रहे हैं. वहीं, तेहरान इसे रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है और दावा कर रहा है कि यहां से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों से शुल्क वसूलेगा. साथ ही इस राशि का इस्तेमाल अमेरिका और इजरायली हमलों में बर्बाद हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में लगाएगा. हालांकि, तेहरान ने कहा है कि वह इस रकम को जॉर्डन के साथ बांटेगा. दूसरी तरफ फिलिस्तीनी में हमास द्वारा हथियार छोड़ने पर सहमत होने के बाद इजरायल ने गाजा पट्टी पर जबरदस्त हमले किए हैं.
ईरान पर हमले रहेंगे जारी
मैरीलैंड में राष्ट्रपति के कैंप डेविड रिट्रीट में अपनी कैबिनेट के सदस्यों के साथ बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के मामले में बस जीतना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अभी मिडिल ईस्ट में ईरान पर कुछ समय के लिए सैन्य कार्रवाई जा रहेगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर ‘बहुत जोरदार’ हमला करेगा और वह इस बार बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. उसी दिन शुक्रवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने अमेरिकी प्रशासन की निराशा फिर से जाहिर की. उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ युद्धविराम के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन जल्द ही इसे तोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि MOU इसलिए खत्म किया गया क्योंकि ईरान ने कमर्शियल जहाजों पर गोलीबारी की और अमेरिकी सैनिकों की जान ले ली. लेविट ने शुक्रवार की शाम को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप चुपचाप खड़े रहकर इस आतंकवादी व्यवहार को होने नहीं देंगे. ईरान को तब तक कीमत चुकानी होगी जब तक कि वे बातचीत की मेज पर उस तरह से नहीं आते जिसे राष्ट्रपति ट्रंप सार्थक मानते हैं.

ड्रोन के हमले का दिया करारा जवाब
इसी बीच कुवैत की सेना ने शनिवार को कहा कि उसकी सेनाएं ड्रोन हमलों का जवाब दे रही थीं. ये हमले ईरान की ओर से कुवैत पर किए गए हमलों का हिस्सा थे. वहीं, कुवैत के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने एक बयान में कहा कि ड्रोन ने ‘कई अहम ठिकानों’ को निशाना बनाया, जिनमें देश के उत्तर में स्थित एक सरकारी इमारत भी शामिल है. उन्होंने बताया कि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ है. दूसरी तरफ ब्रिटिश नौसेना ने शनिवार को बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक टैंकर पर हमला हुआ और एक अन्य जहाज के पास धमाका हुआ. नौसेना के अनुसार, दोनों ही घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. वहीं, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि शुक्रवार को ओमान के लीमा से 11 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने एक जहाज को टक्कर मारी. इस हमले की वजह से जहाज का इंजन रूम बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि शनिवार को एक अन्य टैंकर के पास पानी में जोरदार हलचल और धमाके की सूचना मिली. अमेरिका के साथ चल रहे टकराव के बीच ईरान ने बार-बार उन जहाजों पर हमले किए हैं, जो उसकी मंजूरी के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करते हैं.

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गाजा में हत्याओं का सिलसिला जारी रहेगा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के अलावा इजरायल ने भी गाजा पर जबरदस्त हमले किए हैं. इस दौरान गाजा में चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए. ये हमले उस वक्त हुए हैं जब हमास ने शुक्रवार को पुष्टि की कि वह हथियार छोड़ देगा. इसे गाजा में युद्ध खत्म करने की दिशा में एक संभावित बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. हालांकि अभी भी कई बड़ी रुकावटें हैं. इजरायल ने हमास के साथ हुए इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है. यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में हुए उस युद्धविराम का हिस्सा है, जिसकी घोषणा पिछले साल अक्टूबर में की गई थी. उस समझौते में हमास से हथियार छोड़ने और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी प्रशासन को सौंपने की बात कही गई थी. समझौते के तहत इजरायल को पीछे हटना था और एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल (International Stabilization Force) को भी तैनात किया जाना था. इजरायल के दक्षिणपंथी सांसद इतामार बेन-गवीर ने शुक्रवार को X की एक पोस्ट में इस समझौते को ‘अस्वीकार्य’ बताया और कहा कि गाजा में हत्याओं का सिलसिला जारी रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल को जीतना ही होगा. गाजा में रात भर हुए ये हमले इजरायली सेना द्वारा लोगों को इलाका खाली करने के आदेश दिए जाने के बाद हुए हैं. इजरायली सेना के एक अधिकारी ने कहा कि वे हमास को निशाना बना रहे थे.

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बाब-अल-मंदेब को बंद का किया ऐलान
मिस्र के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में युद्धविराम के लिए मध्यस्थता करने वाले प्रमुख देश मिस्र ने शांति योजना के चरणों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के लिए हमास और अन्य फिलिस्तीनी समूहों की सराहना की. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के आठ जहाजों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से अपना रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया. ईरान समर्थित इन विद्रोहियों ने इस अहम समुद्री रास्ते पर सऊदी जहाजों की आवाजाही रोकने का ऐलान किया था. हूतियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि नाकेबंदी से बचने के लिए इन जहाजों ने अफ्रीका के पास केप ऑफ गुड होप का रास्ता अपनाया. दूसरी तरफ दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना ने शुक्रवार को क्रूसेडर काल में बने ब्यूफोर्ट कैसल के नीचे मौजूद जमीन के अंदर बनी सुरंगों के नेटवर्क को नष्ट करने के लिए धमाके किए. इजरायल का कहना है कि ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह चरमपंथी इस नेटवर्क का इस्तेमाल कमांड सेंटर के तौर पर करते थे. दूसरी तरफ अल-शकीफ किला 12वीं सदी में तैयार किया गया था. इस पर भी इजरायली सेना ने मई में कब्जा कर लिया था. इजरायल के विरोध के बावजूद इसे हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का फैसला किया गया था.
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योजना को अंतिम रूप दिया जा सके
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा कि रोम में होने वाली आगामी बातचीत से पहले इज़राइल के इस ऑपरेशन ने ‘नकारात्मक संदेश’ भेजे हैं. इजरायल और लेबनान की बातचीत करने वाली टीमें वहां फिर से मिलने वाली हैं ताकि उस योजना को अंतिम रूप दिया जा सके जिसके तहत हिज़्बुल्लाह के हथियार छोड़ने के बदले इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटा लेगा. इजरायली सेना ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में ऑपरेशन के दौरान शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच सेना का एक अधिकारी घायल हो गया. लेबनान के अधिकारियों या हिज़्बुल्लाह की ओर से इस पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई.

ईरानी ठिकानों पर किए थे जोरदार हमले
इससे पहले 30 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर तेहरान के हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं. यह हमला तब हुआ जब अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ मिलकर पड़ोसी देश इराक में ईरान समर्थित मिलिशियाओं पर हमला किया, जिसमें कम से कम 20 लड़ाके और छह ईरानी सलाहकार मारे गए. न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को हुए नए हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले एक अड्डे को निशाना बनाने के बाद ईरान को ‘बहुत कड़ी सजा’ देने की कसम खाने के कुछ घंटों बाद हुए. वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर हमले की जानकारी देते हुए बताया कि 29 जुलाई को रात 10 बजे (ET), U.S. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की फोर्स ने ईरान के खिलाफ जोरदार हमले किए. ये हमले कल U.S. फोर्स पर मिसाइल से हमले की कोशिश के जवाब में किए गए थे.
IRGC के इन ठिकानों पर भी किए हमले
सेंट्रल कमांड ने आगे कहा कि CENTCOM ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों पर हमले किए. इनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी, तटीय निगरानी और सुरक्षा साइटें, और समुद्री क्षमताएं शामिल थीं. इन हमलों का मकसद ईरान और उसके प्रॉक्सी से अमेरिकी फोर्स, कमर्शियल शिपिंग और पड़ोसी खाड़ी देशों को होने वाले खतरे को और कम करना था.
अमेरिकी सेना ने बताया कि 28 जुलाई को IRGC फोर्स ने मिडिल ईस्ट में मौजूद US फोर्स पर अचानक हमले की कोशिश में ईरान से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. ईरान की सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया. अभी मिडिल ईस्ट में 50,000 से ज्यादा US सैनिक तैनात हैं और वे पूरी तरह सतर्क, फोकस्ड, घातक और तैयार हैं. ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित केशम द्वीप पर हुए हमलों में दो लोग घायल हो गए और उत्तर-पश्चिम में खुजेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबर मिली है. वहीं, कई दिनों की अपेक्षाकृत शांति के बाद विभिन्न मोर्चों पर अचानक भड़की झड़पों ने पूर्ण युद्ध की वापसी का खतरा बढ़ा दिया.
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