Tata Group: भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक टाटा ग्रुप से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. बॉम्बे हाउस में हुई टाटा बोर्ड की बैठक में एक बार फिर एन चंद्रशेखरन पर भरोसा जताया गया है. बोर्ड ने उन्हें अगले पांच साल के लिए टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के पद पर बनाए रखने को मंजूरी दे दी है. साथ ही बोर्ड ने कार्यकारी चेयरमैन की नियुक्ति को भी मंजूरी दी है. हालांकि, नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.
चंद्रशेखरन का रास्ता हुआ क्लियर
बोर्ड की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद अगले पांच सालों के लिए चंद्रशेखरन का रास्ता क्लियर हो गया है. अब इस पद से उन्हें हटाना आसान नहीं होगा. उन्हें इस पद के लिए तब चुना गया है, जब उन्होंने पिछले महीने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि ग्रुप के लीडरशिप को लेकर स्पष्टता नहीं है और ये होना बहुत जरूरी है. इसी बीच उन्होंने यह भी कह दिया था कि वे आगे इस पद पर नहीं बने रहना चाहते हैं.
RBI के फैसले के बाद बदला समीकरण
बीते कुछ हफ्तों पहले ही एन चंद्रशेखरन ने कहा था कि वह चेयरमैन पद पर फिर से नियुक्त नहीं होना चाहते थे, लेकिन ग्रुप की होल्डिंग कंपनी पर रेगुलेटरी दबाव के कारण यह बदलाव हुआ. साथ ही यह बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा पिछले हफ्ते टाटा संस की उस अर्जी को खारिज करने के बाद हुआ है जिसमें उसने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी. इस फैसले से कंपनी की स्टॉक लिस्टिंग की संभावना फिर से बन गई है. हालांकि, इससे बचने के लिए कंपनी ने एक साल से ज्यादा समय तक कोशिश की थी और उसमें 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुकाना भी शामिल था.
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टाटा ग्रुप की कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी
सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड के सदस्यों का मानना था कि अगर टाटा संस का IPO आता है, तो कंपनी के नेतृत्व में बदलाव न होना निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत हो सकता है. वहीं, टाटा संस की लिस्टिंग होने पर यह भारत के बड़े IPO में से एक हो सकता है. टाटा संस की टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, TCS और इंडियन होटल्स समेत टाटा ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी है. ऐसे में टाटा संस के IPO का आकार भी काफी बड़ा होने की संभावना है.
बहुमत से प्रस्ताव हुआ पारित
सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट किया, लेकिन बहुमत से प्रस्ताव पास हो गया. टाटा ट्रस्ट्स और उससे जुड़े ट्रस्ट मिलकर टाटा संस का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा कंट्रोल करते हैं. नोएल टाटा कम से कम फरवरी से ही लिस्टिंग का विरोध कर रहे हैं. खबरों के अनुसार, जब उन्होंने चंद्रशेखरन के पिछले कार्यकाल को बढ़ाने का समर्थन किया था तब लिस्टिंग न होना उन शर्तों में से था जो उन्होंने रखी थीं. साथ ही शापूरजी पलोनजी ग्रुप में टाटा संस की करीब 18 फीसदी हिस्सेदारी है और इसे नोएल टाटा के ससुर ने शुरू किया था. अब वह लिस्टिंग के पक्ष में है.
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News Source: PTI
