India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका डील को लेकर देश में किसान काफी रोष में है. साथ ही सीपीएम ने भी इस डील को अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक बताया है और कहा कि इससे संप्रभुता को चुनौती मिलेगी.
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो गया है और इस डील के बाद अमेरिका ने देश के ऊपर टैरिफ भी कम कर दिया है. रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी खत्म करने का ऐलान किया है और भारतीय सामानों पर लगने वाला सीमा शुल्क को भी 25 से घटाकर 18 कर दिया है. इसी बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) ने रविवार को दावा किया कि भारत ने ट्रेड डील के दौरान बड़ी रियायतें दी हैं. इसकी वजह से हमारी अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता को गंभीर खतरा है. CPM का कहना है कि मोदी सरकार को इस डील के साथ आगे नहीं बढ़ना था और अब इस समझौते पर संसद में बहस होनी चाहिए.
अमेरिका को दी बड़ी रियायतें
भारत और अमेरिका ने शनिवार को संयुक्त घोषणा की कि वे एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क पर पहुंच गए हैं. इस डील के तहत दोनों पक्ष दो-तरफा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई सामानों पर आयात शुल्क कम करेंगे. CPI(M) ने अपने एक बयान में कहा कि जैसे-जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विवरण सामने आ रहा है. उससे स्पष्ट होता जा रहा है कि केंद्र सरकार ने समझौते में अमेरिका को बड़ी रियायत दी हैं. अब इस तरह की रियायतें अमेरिका को दी गईं तो भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादों और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए एक गंभीर खतरा है. पार्टी ने कहा कि भारत सरकार फलों, कपास, ट्री नट्स, सोयाबीन तेल और कुछ दूसरे खाद्य और कृषि उत्पादों के अमेरिका एक्सपोर्ट पर कोई टैरिफ नहीं लगाने पर सहमत हो गई है. इसके अलावा पार्टी ने यह भी कहा कि इस निर्णय से देश भर में लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोया किसानों की आजीविका को गंभीर नुकसान होगा.
डील को लेकर पीयूष गोयल ने कही ये बातें
वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वस्त किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जो आयात बढ़ने की स्थिति में घरेलू उद्योग और किसानों की रक्षा करेंगे. वर्तमान में भारत 50-55 अरब मूल्य के कृषि व मत्स्य उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जिसमें इस समझौते से और बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा अन्य देशों जैसे चीन पर 35 प्रतिशत के मुकाबले भारतीय वस्तुओं पर कम टैरिफ 18% लगाने से भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिलेगी. यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. केंद्रीय मंत्री ने भारत-अमेरिका संयुक्त बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह वर्तमान में एक दो पन्नों का दस्तावेज है और अभी यह एक ‘वर्क इन प्रोग्रेस’ (जारी कार्य) है. समाचार एजेंसी PTI को दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यापार वार्ता में सुरक्षा उपाय हमेशा मौजूद रहते हैं, भले ही वे शुरुआती संक्षिप्त दस्तावेजों में न दिखें.
फैसले को किसानों ने बताया आत्म समर्पण
किसान संगठनों ने कहा कि भारत-अमेरिका डील से पता चलता है कि मोदी सरकार ने पूर्ण समर्पण कर दिया है. साथ ही उन्होंने कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल के तत्काल इस्तीफे की मांग की है. दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस डील को देश से विश्वासघात बताया है. पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि इस ट्रेड डील के मुताबिक हमें आगामी पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर का अमेरिका से सामान आयात करना होगा. इसका मतलब है कि भारत को आयात तीन गुना बढ़ाना होगा. साथ ही हमें करीब 40-42 अरब डॉलर की जगह पर 100 अरब डॉलर का सामान खरीदना होगा. उन्होंने आगे कहा कि हम इतना सामान खरीदेंगे तो इसका क्या फायदा होगा और क्या इसका जवाब पीयूष गोयल देंगे? ट्रंप की इस डील से भारत अमेरिका का डंपिंग ग्राउंड बन गया है.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
