Home Top News Netanyahu की पार्टी बनी नंबर वन, फिर भी सत्ता की राह मुश्किल! 10 नवंबर को नई संसद लेगी शपथ

Netanyahu की पार्टी बनी नंबर वन, फिर भी सत्ता की राह मुश्किल! 10 नवंबर को नई संसद लेगी शपथ

by Preeti Pal 30 October 2026, 10:08 AM IST
30 October 2026, 10:08 AM IST
Netanyahu की पार्टी बनी नंबर वन, फिर भी सत्ता की राह मुश्किल! 10 नवंबर को नई संसद लेगी शपथ

Israel Election Results 2026: इजरायल के आम चुनाव के अंतिम नतीजे सामने आ गए हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि, सरकार बनाने का रास्ता अभी आसान नहीं दिख रहा. दरअसल, नेतन्याहू समर्थक गठबंधन बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गया है. ऐसे में चुनाव खत्म होने के बाद भी इजरायल की राजनीति में सस्पेंस बरकरार है. इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने शुक्रवार को 26वीं संसद यानी नेसेट के अंतिम चुनाव परिणाम जारी किए. नई संसद 10 नवंबर को शपथ लेगी.

सबसे बड़ी पार्टी बनी लिकुड

चुनाव नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिली हैं. वहीं, गादी आइजनकोट की याशर पार्टी 21 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. बी’याचाद को 12 और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिलीं. डेमोक्रेट्स और राअम ने आठ-आठ सीटों पर जीत हासिल की. इसके अलावा यिस्राएल बेतेनु, यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म और ओत्जमा येहुदित को सात-सात सीटें मिली हैं. शास और रिलिजियस जायोनिज्म ने छह-छह सीटें जीतीं.

बहुमत से कितने दूर नेतन्याहू?

इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं. यानी बहुमत के लिए उसे आठ और सांसदों की जरूरत है. दूसरी तरफ नेतन्याहू विरोधी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं, जबकि अरब दलों के खाते में 19 सीटें गई हैं. इस स्थिति ने सरकार गठन को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावनाएं बढ़ा दी हैं.

77.9 प्रतिशत लोगों ने किया मतदान

चुनाव में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया. कुल 77.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और 57 लाख से ज्यादा लोगों ने वोट डाले. हालांकि, कुछ छोटी पार्टियां संसद में जगह नहीं बना सकीं. इजरायल में संसद में पहुंचने के लिए कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी है.

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राष्ट्रपति के हाथ में फैसला

अंतिम चुनाव परिणाम 4 नवंबर को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाएंगे. इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे ज्यादा संभावना होगी. अगर पहला नेता सरकार बनाने में नाकाम रहता है, तो किसी दूसरे नेता को मौका मिल सकता है.

क्या विपक्ष मिलकर बनाएगा सरकार?

विपक्षी दलों के सामने भी सरकार बनाने की चुनौती है. एक संभावना लिकुड और कुछ विपक्षी पार्टियों की साझा सरकार की है. ऐसा गठबंधन 66 सीटों तक पहुंच सकता है. हालांकि, नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के वादे पर चुनाव लड़ने वाले दलों के लिए उनके साथ आना आसान नहीं होगा. अरब दलों के बाहरी समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने की चर्चा भी है, लेकिन राअम नेता मंसूर अब्बास ने इसकी संभावना पर संदेह जताया है.

गड़बड़ी की जांच की मांग

चुनाव परिणामों के बीच विदेशी हस्तक्षेप और मतदान में गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए हैं. चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने सुरक्षा एजेंसी शिन बेट से कुछ आरोपों की जांच करने को कहा है. हालांकि, समिति ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में व्यवस्थित गड़बड़ी साबित करने वाला कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है. फिलहाल इजरायल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेतन्याहू बहुमत जुटा पाएंगे या देश को किसी नए राजनीतिक समीकरण का इंतजार करना होगा.

News Source: ANI

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