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इजरायल क्यों नहीं मान रहा सीजफायर? लेबनान पर कर रहा ताबड़तोड़ हमले,सामने आई ये वजह

by Sanjay Kumar Srivastava 20 June 2026, 7:24 PM IST (Updated 20 June 2026, 8:08 PM IST)
20 June 2026, 7:24 PM IST (Updated 20 June 2026, 8:08 PM IST)
इजरायल क्यों नहीं मान रहा सीजफायर? लेबनान पर कर रहा ताबड़तोड़ हमले, सामने आई ये बड़ी वजह

ISRAEL-LEBANON STRIKES: लेबनान में सीज़फ़ायर के बावजूद जारी जंग ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर खतरे के बादल मंडरा दिए हैं. इस गंभीर टकराव के बीच इजरायल और ईरान के रिश्ते बेहद नाजुक दौर में हैं. दोनों देशों के बीच कई बुनियादी व संवेदनशील मुद्दों को सुलझाना अभी बाकी है.

इजरायल और ईरान के बीच अनसुलझे मुद्दे

दोनों देशों के बीच दुश्मनी की जड़ें इतनी गहरी हैं कि महज़ एक क्षेत्रीय संघर्ष विराम (सीज़फ़ायर) से शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती. अभी भी कई मुद्दों पर बड़ा गतिरोध बना हुआ है.

  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम इज़रायल के लिए सबसे बड़ा खतरा है. नेतन्याहू ने दृढ़ता से दोहराया है कि इज़रायल ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा.
  • प्रॉक्सी नेटवर्क का खात्मा: इज़रायल चाहता है कि ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण हो और वह अपनी सीमाओं से दूर रहे. वहीं, ईरान अपने इस रणनीतिक नेटवर्क को छोड़ने के मूड में नहीं है.
  • संप्रभुता और क्षेत्रीय वर्चस्व: मध्य पूर्व (West Asia) में प्रभाव बढ़ाने की इस होड़ में दोनों देश सीधे एक-दूसरे की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं, जिससे भविष्य में किसी भी समझौते के टिकने पर सवालिया निशान लगा हुआ है.

लेबनान में संघर्ष और डील पर संकट, होर्मुज फिर बंद

वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत पूरे क्षेत्र और लेबनान में सैन्य अभियान रोकने का प्रावधान है. हालांकि, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि इजरायल इस अमेरिका-ईरान डील का हिस्सा नहीं है. उन्होंने घोषणा की है कि इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान में ‘सुरक्षा क्षेत्र’ बनाए रखेगी और वहां से तब तक नहीं हटेगी जब तक देश की सुरक्षा ज़रूरतें पूरी नहीं हो जातीं. दूसरी ओर, ईरान और हिज़्बुल्लाह का रुख है कि जब तक इजरायल लेबनान से पूरी तरह पीछे नहीं हटता, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इज़रायल लेबनान में अपने सैन्य हमलों को नहीं रोकता है, तो स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान की आगामी वार्ता पूरी तरह खटाई में पड़ सकती है. उधर, लेबनान पर हमले के विरोध में ईरान ने शनिवार को होर्मुज को फिर से बंद कर दिया.

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दक्षिणी लेबनान पर भीषण हमला, 7 की मौत

सीज़फायर समझौते की खबरें आने के कुछ ही घंटों बाद शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे. लगातार हो रही लड़ाई से मध्य पूर्व में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते पर खतरा मंडराने लगा है. लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि हमलों में दक्षिणी शहर नबातिह और आस-पास के कई गांव प्रभावित हुए. एजेंसी के मुताबिक, मलबे के नीचे कम से कम सात लोग दबे हुए थे. शुक्रवार को हुई भारी गोलाबारी में लेबनान में कम से कम 47 लोगों और चार इज़राइली सैनिकों की मौत के बाद मध्यस्थ इज़राइल और लेबनान के चरमपंथी समूह हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई रोकने की कोशिश कर रहे थे.

हिज़्बुल्लाह समझौते का करे पालन

इज़राइली सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हिज़्बुल्लाह ने रात भर में दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सेना पर 50 से ज़्यादा प्रोजेक्टाइल दागे, जिसके जवाब में सेना ने वहां चरमपंथी समूह को निशाना बनाना शुरू कर दिया. नियमों के मुताबिक, अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए यह जानकारी दी. शुक्रवार को वाशिंगटन में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि अगर हिज़्बुल्लाह समझौते का पालन करता है और हमले बंद कर देता है, तो इज़राइल तत्काल सीज़फ़ायर के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

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हिज़्बुल्लाह ने सार्वजनिक बयानों में कहा है कि अगर इज़राइल युद्धविराम का पालन करता है तो वह भी ऐसा करेगा, लेकिन उसने यह नहीं कहा है कि असल में कोई युद्धविराम लागू है. हिज़्बुल्लाह के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बात की क्योंकि उन्हें सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की इजाज़त नहीं थी. शुक्रवार को युद्धविराम समझौते की खबरों के बाद कहा कि कतर, अमेरिका और ईरान, इज़राइल-हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि कोई समझौता हो गया है.

एक ऐसा टकराव जो खत्म कर सकता है अमेरिका-ईरान समझौते को

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच युद्ध छिड़ गया. हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल में आम लोगों की बस्तियों पर रॉकेट और ड्रोन दागे, जबकि इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया. इस हफ़्ते हुए अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल गया है. युद्ध शुरू होने पर ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तेल और प्राकृतिक गैस की अहम सप्लाई रुक गई थी. इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने की भी बात कही गई है, जो इस युद्ध का एक मुख्य मुद्दा है. न तो इज़राइल और न ही हिज़्बुल्लाह इस समझौते में शामिल हैं.

समझौते में लेबनान में सैन्य कार्रवाई भी रोकना

समझौते में लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने और देश की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है. लड़ाई जारी रहने के कारण यह समझौता खतरे में है और स्विट्ज़रलैंड में शुक्रवार से शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान बातचीत टाल दी गई है. अभी कोई नई तारीख भी तय नहीं की गई है. इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कसम खाई है कि जब तक इज़राइल के लिए कोई भी खतरा खत्म नहीं हो जाता, तब तक इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी. हिज़्बुल्लाह ने तब तक हमले रोकने से इनकार कर दिया है जब तक इज़राइल लेबनान से हटने का वादा नहीं करता. ईरान का कहना है कि यह समझौते की एक शर्त भी है.

दक्षिण में इजराइल-लेबनान सीमा के पास लड़ाई

बारिश गांव में हुए हमले में एक परिवार के चार सदस्यों माता-पिता और दो बच्चों की मौत हो गई. अरब सलीम गांव में एक तबाह हुए घर से एक शव निकाला गया. डुएइर व कफ़र रुम्मान गांवों में ड्रोन हमलों में मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति और लेबनान के एक सैनिक की मौत हो गई. शनिवार को दक्षिणी लेबनान के ऊपर आसमान में धुएं के गुबार उठते दिखे. इज़राइली जेट विमान तटीय शहर टायर के ऊपर कम ऊंचाई पर उड़ान भरते रहे.

हमलों से बचा रहा टायर शहर

शहर के निवासियों ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि उन्हें इस बात से राहत मिली है कि हाल के दिनों में टायर शहर हमलों से बचा रहा, लेकिन इज़राइली विमानों की आवाज़ ने उन्हें याद दिलाया कि युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है. कई लोगों को संदेह था कि अगर युद्धविराम पर सहमति बनती भी है, तो क्या वह टिक पाएगा. टायर के निवासी हुसैन खोशमन ने कहा कि अगर युद्धविराम होता है, तो हमारी पूरी ज़िंदगी बदल जाएगी.

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नेतान्याहू के कार्यालय ने युद्धविराम की कोशिशों पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की. शुक्रवार को नेतान्याहू ने कहा कि उनके आदेश पर इज़राइली सेना ने हिज़्बुल्लाह के 150 ठिकानों पर ज़ोरदार हमला किया, जिसमें दर्जनों चरमपंथी मारे गए. सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफ़ी डेफ़्रिन ने कहा कि इज़राइली सेना फ़ॉरवर्ड डिफ़ेंस ज़ोन (अग्रिम रक्षा क्षेत्र) में कार्रवाई कर रही है और ऐसा करना जारी रखेगी.

ईरान और अमेरिका के अधिकारियों की स्विट्ज़रलैंड यात्रा रद्द

ईरान के अधिकारी तय कार्यक्रम के अनुसार स्विट्जरलैंड नहीं गए. उनका कहना था कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में लड़ाई रुकनी चाहिए. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अपनी यात्रा टाल दी. शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अर्ध सरकारी ISNA समाचार एजेंसी को बताया कि बातचीत की जारी कोशिशों के तहत पाकिस्तान के गृह मंत्री ईरान आएंगे.

बघाई ने पहले कहा था कि अमेरिका-ईरान के बीच अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने के लिए बातचीत के अगले चरण को लेकर मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है.उन्होंने कहा कि चूंकि शुरुआती समझौते पर इस सप्ताह की शुरुआत में ही डिजिटल रूप से हस्ताक्षर हो गए थे, इसलिए स्विट्जरलैंड में बातचीत की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं थी और आने वाले दिनों में बैठक करने की योजना बनाई जा रही थी.

ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रहेगा फोकस

स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर फोकस किए जाने की उम्मीद है. तेहरान का कहना है कि यह सिर्फ़ शांतिपूर्ण कामों के लिए है. हालांकि उसके पास ज़्यादा लेवल तक एनरिच किया हुआ यूरेनियम का बड़ा स्टॉक है, जो हथियारों में इस्तेमाल होने वाले लेवल से बस एक कदम ही पीछे है. UN की न्यूक्लियर निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, अगर तेहरान चाहे तो उस यूरेनियम का इस्तेमाल कई एटम बम बनाने में कर सकता है.

इस बातचीत के खतरे में होने की उम्मीद है. 2015 की न्यूक्लियर डील, जिसे US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान खत्म कर दिया था, उस पर बातचीत में 18 महीने से ज़्यादा का समय लगा था. अंतरिम डील बातचीत करने वालों को न्यूक्लियर एग्रीमेंट तक पहुंचने के लिए 60 दिन का समय देती है, लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है.

समझौते में ईरान को फायदा

इसमें ईरान के नया एग्रीमेंट करने पर आकर्षक फायदे बताए गए हैं, जिसमें सभी इंटरनेशनल प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाना और युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए 300 बिलियन डॉलर का फंड शामिल है. ईरान को पहले ही कुछ रियायतें मिल चुकी हैं. अंतरिम डील पर साइन होने के बाद, US ने ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा ली है और उसे अपना तेल आज़ादी से बेचने की इजाज़त दे रहा है. डील में ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति को बहाल करने की भी बात कही गई है. हालांकि यह साफ़ नहीं है कि इसमें कितना समय लगेगा.

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