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डोनाल्ड ट्रंप के चक्रव्यूह में फंसा तेहरानः परमाणु मुक्त ईरान या जल उठेगा पूरा मिडिल ईस्ट?

by Sanjay Kumar Srivastava 4 August 2026, 9:38 PM IST
4 August 2026, 9:38 PM IST
ट्रंप के चक्रव्यूह में फंसा तेहरानः परमाणु मुक्त ईरान या जल उठेगा पूरा मिडिल ईस्ट? ओवल ऑफिस से आई ये चेतावनी

US-IRAN War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी पांच महीने लंबे गतिरोध के बीच तेहरान को चेतावनी देते हुए नई बातचीत का प्रस्ताव दिया है. ट्रंप का कहना है कि इस बार की स्थिति पिछली बार से बिल्कुल अलग है. ओवल ऑफिस से जारी बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली यह नई वार्ता ईरान के लिए समझौता करने का अंतिम अवसर है. यह कदम देश पर होने वाले संभावित अमेरिकी हमलों को रोकने का आखिरी मौका साबित हो सकता है.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आगामी बातचीत मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु मुक्त कार्यक्रम को लेकर होगी. ट्रंप ने अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया का पहला चरण जलडमरूमध्य को सुरक्षित खोलना है, जबकि दूसरे चरण के तहत ईरान को पूरी तरह परमाणु मुक्त किया जाएगा. कहा कि इस बातचीत की मौजूदा स्थिति पर जल्द ही बड़ा फैसला आ सकता है.

ईरान को परमाणु मुक्त करना ट्रंप का संकल्प

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पहला चरण जलडमरूमध्य को खोलना है. दूसरा चरण परमाणु मुक्त करना होगा. इसमें थोड़ा समय लगेगा. जहां ट्रंप अमेरिकी सेना द्वारा तेहरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने और उसकी वायु सेना व नौसेना को तबाह करने का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान को उम्मीद है कि वह युद्ध में ज़्यादा समय तक टिक सकता है, क्योंकि ट्रंप को गोला-बारूद की घटती आपूर्ति और नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के बीच अलोकप्रियता का सामना करना पड़ रहा है.

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने खाड़ी देशों के सहयोगियों कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के आग्रह पर ईरान के खिलाफ नए बड़े हमले करने का फैसला टाल दिया. उन्होंने कहा कि रविवार को अमेरिकी सेना द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला करने की योजना थी. लेकिन उन्होंने योजना को रद्द करने और कूटनीति को और समय देने का फैसला किया, जब उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सहित खाड़ी के प्रमुख नेताओं से बात की और साथ ही कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के अनुरोध पर भी विचार किया.

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ईरान के दावे पर भड़का अमेरिका

ट्रंप ने फिर कहा कि ईरान को लेकर उनका सब्र खत्म हो रहा है. ट्रंप ने कहा कि ईरान के लिए एक अच्छे समझौते पर दस्तखत करने का यह आखिरी मौका है. इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान की आलोचना करते हुए उसे बेहद धोखेबाज़ बताया था. ट्रंप का गुस्सा तब भड़का जब ईरान ने दावा किया कि सोमवार को ओमान के साथ उसकी बैठकें सिर्फ़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़) से सुरक्षित आवाजाही के लिए एक अस्थायी रास्ता बनाने पर केंद्रित थीं.

यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बहुत अहम है. ट्रंप ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि वे बैठक की मांग करते हैं. कुछ लोग तो कहेंगे कि वे गिड़गिड़ाते हैं. बातचीत शुरू होती है, आगे भी बैठकें तय होती हैं, और फिर वे खुलेआम और गर्व से कहते हैं कि कोई बातचीत नहीं हो रही है. किसी चीज़ पर चर्चा नहीं हो रही है और वे सिर्फ़ ओमान से बात कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि ईरान माने या न माने, असल में हम बातचीत कर रहे हैं. यह बातचीत ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के बारे में है.

ट्रंप ने कहा- दिखा रहे सब्र

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमले शुरू होने के बाद से ट्रंप ने कई बार ईरान पर हमले तेज़ करने की धमकी दी है, लेकिन फिर अपनी धमकियों से पीछे भी हटे हैं. जब एक पत्रकार ने पूछा कि तेहरान को बार-बार गंभीर धमकियां देने और फिर पीछे हट जाने को अमेरिकी कैसे देखते हैं, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि वे ईरान के लोगों की जान की परवाह करते हुए सब्र दिखा रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि मैं उन्हें पूरी तरह बर्बाद करने से पहले आखिरी मौका देना चाहता हूं.

उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद है कि उन्हें अक्ल आएगी. आलोचक ट्रंप के इस तरह बार-बार रुख बदलने को एक पैटर्न के तौर पर देखते हैं. हो सकता है कि ट्रंप आखिर में इस नतीजे पर पहुंचें कि ईरान के साथ टकराव को बहुत ज़्यादा बढ़ाना ज़रूरी है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि उनकी हिचकिचाहट प्रशासन के अंदर की एक ऐसी अनकही समझ को भी दिखाती है कि सिर्फ़ अमेरिकी सैन्य ताकत ईरान को पीछे हटने और महीनों से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए मजबूर करने के लिए काफ़ी नहीं हो सकती. एक ऐसा युद्ध जिसे ट्रंप ने पहले कुछ हफ़्तों का मामला बताकर कम करके आंका था.

कई बार ऐन मौके पर पीछे हटे ट्रंप

सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के सदस्य और एरिज़ोना के डेमोक्रेट सीनेटर मार्क केली ने CBS न्यूज़ के प्रोग्राम ‘फेस द नेशन’ में कहा कि मुझे लगता है कि हम यहां एक ऐसे राष्ट्रपति को देख रहे हैं जिनका रवैया काफ़ी अनिश्चित है. इस समय, वह हमें फरवरी वाली स्थिति में वापस ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे लगता है कि अगर वह ऐसा कर पाते अगर उनके पास कोई बड़ा ‘रीसेट बटन’ होता जिसे वह दबा सकते तो वह निश्चित रूप से उस विकल्प को चुनते.

इस टकराव के दौरान कई ऐसे मौके आए हैं जब ट्रंप ने आक्रामक रुख दिखाया, लेकिन आखिरी मिनट में पीछे हट गए. अप्रैल की शुरुआत में, अमेरिका और ईरान दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम (सीज़फ़ायर) पर सहमत हुए. यह घोषणा उस समय-सीमा से दो घंटे से भी कम समय पहले की गई थी जो ट्रंप ने तेहरान को आत्मसमर्पण करने या पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमलों का सामना करने के लिए तय की थी. ऐसे हमले जिनके बारे में उन्होंने कहा था कि उनका मतलब होगा पूरी सभ्यता का विनाश.

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ईरान के ऊर्जा केंद्र पर कब्जा करने की धमकी

ईरान के ख़िलाफ़ कई दिनों तक गंभीर धमकियां देने के बाद 18 मई को ट्रंप ने घोषणा की कि वह एक बड़े नियोजित सैन्य हमले को रोक रहे हैं क्योंकि गंभीर बातचीत चल रही थी. उन्होंने संयम बरतने के लिए मनाने का श्रेय खाड़ी देशों के सहयोगियों को दिया. फिर जून में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान पर बहुत ज़ोरदार हमला करने और उनके तेल और गैस बाज़ारों पर पूरा नियंत्रण करने के लिए खार्ग द्वीप पर ईरान के ऊर्जा केंद्र पर कब्ज़ा करने की धमकी दी, लेकिन बाद में एक और पोस्ट में हमले रद्द कर दिए. उन्होंने दावा किया कि ईरान के उच्च-स्तरीय नेताओं के साथ शांति वार्ता में प्रगति हुई थी. सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ बातचीत का ट्रंप के फ़ैसले पर असर इस ताज़ा घटनाक्रम से पता चलता है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को लड़ाई न बढ़ाने के लिए राजी किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने तय हमलों को रोकने की घोषणा करने से पहले शनिवार को सऊदी अरब के बड़े नेता से फ़ोन पर बात की.

सऊदी अरब हमला रोकने में सक्षम

क्राउन प्रिंस ने कहा कि अगर तेहरान ने अमेरिका के नए हमलों का जवाब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कुछ सहयोगियों को निशाना बनाकर दिया, तो लड़ाई बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है. इस व्यक्ति ने सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की अनुमति न होने के कारण अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर यह जानकारी दी. उस व्यक्ति ने आगे कहा कि सऊदी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत में इस बात पर ज़ोर दिया है कि सऊदी अरब ईरान के संभावित हमलों से अपना बचाव करने की अच्छी स्थिति में है. ठीक वैसे ही जैसे ऊर्जा क्षेत्र के अन्य बड़े देश कतर और यूएई हैं लेकिन कुवैत पर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के हमलों का खतरा ज़्यादा हो सकता है.

अमेरिकियों ने माना- युद्ध से कोई फायदा नहीं

ट्रंप ने जोर देकर कहा है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव इस संघर्ष के प्रति उनके नज़रिए को प्रभावित नहीं कर रहे हैं, जबकि इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में चिंताएं पैदा कर दी हैं. लेकिन उनके साथी रिपब्लिकन नेताओं के मन में यह बात ज़रूर है. पिछले हफ़्ते ‘द एसोसिएटेड प्रेस-NORC सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च’ के पोल के अनुसार, अमेरिका के लगभग दो-तिहाई वयस्कों का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध का कोई फ़ायदा नहीं हुआ है. इसमें डेमोक्रेट और निर्दलीय लोगों की बड़ी संख्या के साथ-साथ लगभग 37 प्रतिशत रिपब्लिकन भी शामिल हैं. कैपिटल हिल में ट्रंप के सबसे मुखर सहयोगियों में से एक ने सुझाव दिया कि प्रशासन को ईरान के मामले में अपने नज़रिए में बदलाव करने की ज़रूरत है.

प्रतिबंधों को और कड़ा करने पर जोर

लुइसियाना के सीनेटर जॉन कैनेडी ने NBC के प्रोग्राम ‘मीट द प्रेस’ में कहा कि वॉशिंगटन में हो रही बहस में इस बात को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने ईरान को कितना नुकसान पहुंचाया है. फिर भी रिपब्लिकन सांसद ने माना कि अगर टकराव और बढ़ा तो पहले से ही बढ़ी हुई ऊर्जा की कीमतें और बढ़ सकती हैं और अमेरिकी लोगों के लिए महंगाई बहुत बढ़ सकती है. कैनेडी ने तर्क दिया कि टकराव बढ़ाने के बजाय प्रतिबंधों को कड़ा करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना फिलहाल सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है. कैनेडी ने कहा कि ये सभी विकल्प बहुत मुश्किल हैं.

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