UP Supplementary Budget: देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा का चुनाव होना है. इसको लेकर प्रदेश में अभी से हलचल तेज हो गई है. यूपी की विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी चुनावी तैयारी में लग गई हैं. इस बीच यूपी की योगी सरकार ने प्रदेश वासियों के लिए अपना खजाना खोल दिया है.
जी हां, आज यूपी विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की ओर से वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने यूपी का अनुपूरक बजट पेश किया. यह बजट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए है. यह बजट 59,019.54 करोड़ रुपये का है, जिसमें राजस्व लेखे का व्यय 17399.50 करोड़ रुपये और पूंजी लेखे का व्यय 41620.04 करोड़ रुपये है.
इस बजट में यूपी सरकार ने औद्योगिक विकास और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं समेत कई क्षेत्रों को फोकस में रखते हुए राशि आवंटित करने की बात कही है.
वहीं, जब यूपी सरकार की ओर से राजधानी लखनऊ स्थित विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश किया जा रहा था तो विपक्ष लगातार हंगामा करते हुए दिखा. समाजवादी पार्टी के विधायक लगातार हंगामा करते हुए नजर आ रहे थे. इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना बार-बार विपक्ष से अपनी सीट पर बैठ जाने की बात कह रहे थे लेकिन वे फिर भी मान नहीं रहे थे. बहरहाल, विपक्ष के इस हंगामे के बीच यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने योगी सरकार की ओर से 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट पेश किया. आइए इस बजट की बड़ी बातें जानते हैं. शुरुआत हम इस बात से करेंगे कि आखिरकार यह अनुपूरक बजट होता क्या है.

अनुपूरक बजट क्या होता है?
आज उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने लखनऊ स्थित विधानसभा में यूपी सरकार का अनुपूरक बजट पेश किया. अंग्रेजी में इस बजट को Supplementary Budget कहते हैं. इसकी परिभाषा की बात करें तो किसी भी वित्तीय वर्ष के दौरान अतिरिक्त पैसे (धनराशि) की जरूरत होने पर प्रस्तुत किए जाने वाले बजट प्रस्ताव को अनुपूरक बजट कहते हैं.
मतलब कि अगर सरकार को पहले से पेश बजट के बाद भी प्रदेश या देश के लिए अतिरिक्त पैसे की जरूरत पड़ती है तो वह इसके लिए अनुपूरक बजट सदन में पेश करती है. योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में सप्लीमेंट्री बजट पेश होने पर कहा, “सप्लीमेंट्री बजट के जो प्रावधान हैं विशेष रूप से चल रहे योजनाओं को पूरा करना और जहां पर आवश्यकता पड़े जो जनहित के काम जरूरी हों उनको करवाना. मैं समझता हूं कि ये बजट हमारे विकास की गति को आगे बढ़ाएगा.”
वहीं, यूपी की योगी सरकार से चुनावी साल से पहले इस अनुपूरक बजट के जरिए प्रदेश के लोगों को खुशखबरी दे दी है. इसमें कई लोक-लुभावन योजनाओं के लिए भी पैसे आवंटन की बात कही गईं हैं. अब आइए यूपी सरकार के इस अनुपूरक बजट की बड़ी बातों को जानते हैं.
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किस क्षेत्र के लिए कितना रुपया?
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी के सदस्यों की नारेबाजी के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहला सप्लीमेंट्री बजट पेश किया. इसमें 59,019.54 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का प्रस्ताव रखा गया.
मानसून सत्र के दौरान अनुदान की अतिरिक्त मांगों को पेश करते हुए, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि सप्लीमेंट्री बजट में 17,399.50 करोड़ रुपये का राजस्व खर्च और 41,620.04 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च शामिल है.
उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री बजट में 7,854.25 करोड़ रुपये के नए प्रस्ताव शामिल हैं.
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, प्रस्तावित आवंटन में भारी और मध्यम उद्योगों के लिए 22,107.88 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास के लिए 17,942.73 करोड़ रुपये, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 7,422.27 करोड़ रुपये, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 2,025 करोड़ रुपये, समाज कल्याण विभाग के लिए 1,655 करोड़ रुपये, महिला कल्याण विभाग के लिए 1,094.40 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग के लिए 700.01 करोड़ रुपये शामिल हैं.
खन्ना ने सदन को बताया कि राज्य का राजकोषीय घाटा तय सीमा के भीतर रहा. बता दें कि यूपी की योगी सरकार ने फरवरी में 2026-27 के लिए 9.13 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था. अब आवश्यकता पड़ने पर अनुपूरक बजट पेश किया गया है, जिसमें अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित है.

बजट से पहले रोकी गई थी सदन की कार्यवाही
जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी (SP) के विधायकों की नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए रोकी गई थी. इसके बाद जब सदन की कार्यवाही दोपहर 12:20 बजे फिर से शुरू हुई, तो खन्ना ने सप्लीमेंट्री बजट पेश किया. स्पीकर सतीश महाना की बार-बार अपील के बावजूद सपा विधायक अपनी सीटों पर नहीं लौटे और सदन के बीचों-बीच (वेल में) आकर नारेबाजी करते रहे. स्पीकर ने कहा कि सदस्य अपनी-अपनी सीटों से मुद्दे उठा सकते हैं और उन्हें भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री उनके सवालों का जवाब देंगे. बाद में उन्होंने कहा कि ‘वेल’ से कही गई बातें रिकॉर्ड में नहीं आएंगी और मीडिया से कहा कि वे इनकी रिपोर्टिंग न करें.
इससे पहले, सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने राम मंदिर में दान की कथित चोरी पर चर्चा की मांग की और इसे आस्था का मामला बताया. जब स्पीकर ने चर्चा की इजाजत नहीं दी, तो सपा विधायक सदन के बीचों-बीच (वेल में) आ गए और बीजेपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे.
विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए महाना ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि अगर उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है, तो उसकी रसीदें दिखाएं. संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सपा पर पलटवार करते हुए उनके शासनकाल में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का जिक्र किया और कहा कि लोगों की आस्था से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. हंगामे के बीच स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12:20 बजे तक के लिए स्थगित कर दी, जिससे प्रश्नकाल अचानक खत्म हो गया.

औद्योगिक और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर बड़ा बजट
- वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित अनुपूरक बजट का आकार 59 हजार 19.54 करोड़ रुपये का है.
- यूपी सरकार ने अनुपूरक बजट में औद्योगिक विकास और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर बड़ा बजट दिया है.
- अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए ₹1,500 करोड़ अतिरिक्त बजट का प्रावधान.
- BHAVYA योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए ₹495.86 करोड़ अतिरिक्त.
- नए औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और विकास के लिए ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान.
- विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि खरीद और निर्माण कार्यों हेतु अतिरिक्त धनराशि.
- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के विस्तार के लिए ₹400 करोड़ का प्रावधान.
- गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए ₹800 करोड़ अतिरिक्त.
- गंगा एक्सप्रेस-वे के विस्तारीकरण हेतु ₹6,500 करोड़ का बड़ा प्रावधान.
- मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण मद में ₹5,700 करोड़.
- पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे लिंक रोड के निर्माण के लिए ₹800 करोड़ और भूमि अधिग्रहण के लिए ₹2,300 करोड़.
- जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी (दिल्ली-मेरठ RRTS से) के लिए ₹1,000 करोड़.
- ईवी पॉलिसी-2023 के तहत FAME और फार्म-500 कंपनियों को प्रोत्साहन के लिए ₹130.26 करोड़.
- राज्य डाटा सेंटर-2.0 की स्थापना के लिए ₹51 करोड़.
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अनुपूरक अनुदान की मांग की आवश्यकता
उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (वित्त एवं वित्त आयुक्त) दीपक कुमार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक अनुदान की मांग को लेकर प्रस्तावनिक टिप्पणी जारी की. इसमें अनुपूरक मांग की राशि समेत अन्य बड़ी बातें कही गई हैं.
4 अगस्त को जारी इस पत्र में लिखा गया है- किसी वित्तीय वर्ष में व्यय किए जाने के लिए प्राधिकृत कोई धनराशि उस वर्ष के प्रयोजनों के लिए अपर्याप्त पायी जाने पर उस अतिरिक्त व्यय की प्राक्कलित धनराशि के लिए विधान मण्डल के समक्ष अनुपूरक अनुदान की मांग का प्रस्तुतिकरण संविधान के अनुच्छेद 205 के अनुसार अभीष्ट है.
व्यय की ऐसी नई मदों के संबंध में भी अनुपूरक अनुदान की मांग प्रस्तुत करनी होती है, जिनके लिए मूल आय-व्ययक में कोई व्यवस्था नहीं होती. अनुपूरक अनुदान की मांग की उस समय भी आवश्यकता होती है, जब संबंधित व्यय के लिए धन उपलब्ध हो, पर व्यय नई मदों के लिए हो या मूल योजना में इतना महत्वपूर्ण परिवर्तन हो गया हो कि उसे विधान-मण्डल के सामने स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करना आवश्यक हो. ऐसी मांग ‘प्रतीक मांग’ कहलाती है जो प्रचलित वित्तीय व्यवस्था का एक स्वीकृत अंग है.
इसमें आगे लिखा गया है – वित्तीय वर्ष 2026-2027 की अनुपूरक अनुदान की मांग में, अनुदान के अंतर्गत आय-व्ययक में व्यवस्थित धनराशि, अनुपूरक अनुदान की मांग की धनराशि, जिसकी अब आवश्यकता है तथा उससे संबंधित संक्षिप्त टिप्पणियां भी सम्मिलित हैं. विनियोग लेखों के प्रयोजन के लिए लेखा शीषर्षों के अनुसार सविस्तार विवरण भी अनुदानवार दिया गया है. अनुपूरक अनुदान की मांग मुख्यतया इसलिए की जा रही है कि आय-व्ययक में व्यवस्थित धनराशि, व्यय की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति के सापेक्ष कम पड़ने की संभावना है. इनमें से कुछ नई मदों पर व्यय करने के लिए भी हैं जिनके लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष के आय-व्ययक में कोई व्यवस्था नहीं है. विभिन्न अनुदानों के अंतर्गत मांगों का विवरण अगले पृष्ठों पर अनुसूची में दिया गया है.
इसमें यह भी लिखा गया है- प्रस्तावित अनुपूरक मांग ₹ 5901954.10 लाख की है, जिसमें राजस्व लेखा ₹ 1739949.92 लाख तथा पूंजी लेखा ₹ 4162004.18 लाख है. इसमें आगे कहा गया है कि उत्तर प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध अधिनियम, 2004 की धारा-6(5) के अधीन अपेक्षित विवरण पत्र भी इन मांगों के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है.

सदन नियमों और परंपराओं से चलता है- सीएम योगी
विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश होने के दौरान सपा व विपक्षी विधायकों ने काफी हंगामा किया. बजट पेश होने के बाद इसपर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा, “सपा और विपक्ष का आचरण आज पूरे प्रदेश ने विधानसभा में देखा है. ये आचरण ना केवल सदन की अवमानना है बल्कि अलोकतांत्रिक और शर्मनाक भी है.”
उन्होंने आगे कहा, “सदन नियमों और परंपराओं से चलता है. उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया और संचालन के नियम 59 के तहत ये पहले से ही तय है कि जो मुद्दा किसी न्यायाधिकरण या आयोग के पास लंबित हो, उस मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती. विशेष परिस्थितियों में अगर अध्यक्ष ये समझते हैं कि चर्चा के कारण जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता है तो वे अनुमति दे सकते है.”
सीएम योगी ने कहा,”सपा ने कार्य मंत्रणा समिति और दलीय नेताओं की बैठक में भी इसके लिए आश्वस्त किया था कि वे जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं उसके लिए नोटिस देंगे…अयोध्या राम मंदिर से संबंधित मामला कोर्ट में लंबित है. उस पूरे प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए भी इन्होंने ना केवल सदन की अवमानना की है, सदन का अपमान किया है साथ ही कोर्ट में लंबित प्रक्रिया को भी अपमानित करने का शर्मनाक प्रयास किया गया.”
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