Home Top News जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून होगा सख्तः 2 साल की देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की लेनी होगी मंजूरी

जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून होगा सख्तः 2 साल की देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की लेनी होगी मंजूरी

by Sanjay Kumar Srivastava 4 August 2026, 4:16 PM IST (Updated 4 August 2026, 6:18 PM IST)
4 August 2026, 4:16 PM IST (Updated 4 August 2026, 6:18 PM IST)
जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून होगा सख्तः 2 साल की देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य, संशोधन विधेयक पारित

Birth Bill: राज्यसभा ने मंगलवार को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया. इस दौरान विपक्ष के सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे. वे सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग कर रहे थे और अयोध्या में राम मंदिर में दान की कथित चोरी को लेकर भी नारे लगा रहे थे. इस विधेयक का मकसद ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ के प्रावधानों में संशोधन करके मौजूदा नियमों को सख्त बनाना है. इसके तहत घटना के दो साल बाद होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के आदेश को अनिवार्य किया गया है.

हर बच्चे का पंजीकरण अनिवार्य

मौजूदा कानून के तहत एक साल से अधिक की देरी वाले पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है. संशोधित कानून के तहत भी दो साल तक की देरी के मामलों में यही प्रावधान लागू रहेगा. विपक्ष के सदस्यों की लगातार नारेबाजी के बीच बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि कई सदस्यों ने प्रस्तावित कानून के महत्व को समझाया है और विपक्ष से इसके मकसद को समझने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश में पैदा होने वाले हर बच्चे का पंजीकरण हो और हर मृत्यु का रिकॉर्ड रखा जाए ताकि मृतक व्यक्ति ‘भूतिया मतदाता’ (ghost voters) के तौर पर बने न रहें और ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करने वाली पार्टियों को इसका फायदा न मिले.

सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण के जरिए इस देश को धोखा दिया. दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद दोपहर 2 बजे लंच के बाद की बैठक शुरू हुई, तो राय ने विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश किया. हंगामे के बीच विधेयक पर चर्चा हुई और बाद में मंत्री ने बहस का जवाब दिया, जबकि विपक्ष के सदस्य सदन में शाह की मौजूदगी की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदन ठीक से काम नहीं कर रहा है. कहा कि संसद चलाने का सिर्फ़ एक ही तरीका है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आना चाहिए. हम चर्चा चाहते हैं. NDA के कई सदस्यों ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह ज़रूरी है. हालांकि, जब विपक्ष के सदस्यों को बिल पर बोलने का मौका मिला, तो उन्होंने सदन में गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग की.

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News Source: PTI

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