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नेपाल में लोकतंत्र की परीक्षा: 5 मार्च को नई सरकार के लिए डाले जाएंगे वोट, सुरक्षा के कड़े प्रबंध

by Sanjay Kumar Srivastava
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नेपाल में लोकतंत्र की परीक्षा: जन-आंदोलन के बाद 5 मार्च को नई सरकार के लिए डाले जाएंगे वोट, सुरक्षा के कड़े प्रबंध

Nepal Election: नेपाल में गुरुवार (5 मार्च) को ऐतिहासिक आम चुनाव होने जा रहे हैं. पिछले साल केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ जेन जेड (Gen Z) युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव है.

Nepal Election: नेपाल में गुरुवार (5 मार्च) को ऐतिहासिक आम चुनाव होने जा रहे हैं. पिछले साल केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ जेन जेड (Gen Z) युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव है. कुल 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए करीब दो करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. इसमें प्रत्यक्ष प्रणाली से 165 और आनुपातिक प्रणाली से 110 सीटों का चयन होगा. कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने बताया कि बेहतर मतदाता शिक्षा से इस बार भारी मतदान की उम्मीद है. मतदान सुबह 7 से शाम 5 बजे तक चलेगा, जिसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. ओली को पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किए जाने के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 12 सितंबर को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और सुशीला कार्की को कार्यवाहक पीएम नियुक्त किया. Gen Z द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे भ्रष्टाचार विरोधी, सुशासन, भाई-भतीजावाद का अंत, राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत परिवर्तन आदि हैं.

बदलाव चाहती है जेन जेड

ओली के नेतृत्व में सीपीएन-यूएमएल कट्टरपंथी ताकत के रूप में उभरा है. हालांकि प्रचंड के नेतृत्व वाली राकांपा ने Gen Z द्वारा उठाए गए मुद्दों को पूरा करने का दावा किया है, लेकिन उन्होंने पार्टी का नेतृत्व युवा पीढ़ी को नहीं सौंपा है. इसके अध्यक्ष रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) और गगन थापा के नेतृत्व वाली सुधारित नेपाली कांग्रेस जेन जेड द्वारा उठाए गए मुद्दों के लिए आवाज उठा रही है, जबकि केपी ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल और पुष्पा कमल दहल ‘प्रचंड’ की अगुवाई वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को पारंपरिक ताकतों के रूप में जाना जाता है. कुलमन घीसिंग के नेतृत्व वाली उजियालो नेपाल पार्टी और धरान के पूर्व मेयर हरका के नेतृत्व वाली श्रम शक्ति पार्टी संपांग को उभरती ताकतों के रूप में भी जाना जाता है लेकिन उन्हें सीमित क्षेत्रों में ही समर्थन प्राप्त है. जेन जेड समूह के एक नेता ने कहा कि नेपाल की राजनीति उन लोगों के बीच तेजी से विभाजित है जो बदलाव चाहते हैं.

ओली को मिल रही कड़ी टक्कर

सीपीएन-यूएमएल ने अपने अध्यक्ष 75 वर्षीय ओली को अपने पीएम चेहरे के रूप में पेश किया है. वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक चरण प्रसाई ने कहा कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जवाबदेही की कमी के कारण लोग पारंपरिक राजनीतिक ताकतों से थक चुके हैं, इसलिए इस बार वे पारंपरिक बड़ी पार्टियों के प्रति अपना असंतोष व्यक्त कर सकते हैं और उभरती हुई नई राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं की पसंद बन रही हैं. काठमांडू के बालेन ने 5 मार्च के लिए झापा – 5 को अपने निर्वाचन क्षेत्र के रूप में चुना है. चुनाव में ओली को कड़ी टक्कर मिल रही है, जो पहले 6 बार सीट जीत चुके थे. मूल रूप से काठमांडू के रहने वाले थापा ने नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाकों में चुनावी लहर पैदा करने के लिए मधेस प्रांत में धनुषा-4 को भी चुना है. सरकार ने चुनाव के दौरान पूर्ण सुरक्षा की व्यवस्था की है, जो स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त माहौल में आयोजित किया जाएगा. नेपाल ने बुधवार से चुनाव के लिए तीन दिन की छुट्टी की घोषणा की है. कुल 23,112 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. प्रत्यक्ष मतदान के लिए सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए 65 राजनीतिक दल चुनाव में भाग ले रहे हैं, जबकि आनुपातिक मतदान के लिए उनमें से 63 होंगे. नेपाल ने देश भर में हजारों सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है.

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News Source: PTI

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