Home Top News भूकंप से दहला हिमाचलः धर्मशाला और आसपास के लोग घरों से बाहर भागे, खौफ में कटे लोगों के पल

भूकंप से दहला हिमाचलः धर्मशाला और आसपास के लोग घरों से बाहर भागे, खौफ में कटे लोगों के पल

by Sanjay Kumar Srivastava 6 June 2026, 12:54 PM IST (Updated 6 June 2026, 2:49 PM IST)
6 June 2026, 12:54 PM IST (Updated 6 June 2026, 2:49 PM IST)
भूकंप से दहला हिमाचलः धर्मशाला और आसपास के लोग घरों से बाहर भागे, खौफ में कटे लोगों के पल

Earthquake: हिमाचल का धर्मशाला क्षेत्र शुक्रवार रात आए भूकंप से दहल गया. दहशत में लोग घरों से बाहर निकल आए. रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई. अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि तेज झटकों के साथ आए भूकंप ने धर्मशाला क्षेत्र को हिलाकर रख दिया, जिससे निवासियों में दहशत फैल गई. हालांकि किसी भी जानमाल के नुकसान या बड़ी संपत्ति की क्षति की सूचना नहीं है. इस क्षेत्र में 5 जून को भूकंप आया, जिसमें सबसे तेज रात 10.04 बजे आया. उन्होंने बताया कि इसका केंद्र धर्मशाला से लगभग 40 किलोमीटर दूर कांगड़ा-चंबा सीमा पर धौलाधार पर्वतमाला में धार घदोई और आरएफ कुगती के बीच स्थित था.

कांगड़ा, चंबा में भी तेज झटके

भूकंप 22.5 किलोमीटर की गहराई पर आया और तेज झटका कांगड़ा, चंबा और आसपास के जिलों में महसूस किया गया. निवासियों ने तेज झटकों की सूचना दी और कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए. भूकंपीय गतिविधि दिन में पहले ही शुरू हो गई थी. सुबह 8.52 बजे धर्मशाला से लगभग 16 किलोमीटर दूर धौलाधार पर्वतमाला में मिनकियानी दर्रे के पास 2.3 तीव्रता का हल्का भूकंप आया. भूकंप का झटका इतना हल्का था कि अधिकांश निवासियों ने इसे महसूस नहीं किया. 5.0 तीव्रता के भूकंप के बाद रात में दो और झटके आए. धर्मशाला से लगभग 18 किलोमीटर दूर रात 11.03 बजे 2.8 तीव्रता का भूकंप आया. इसके बाद शहर से लगभग 23 किलोमीटर दूर आरएफ हिलंग के पास रात 11.52 बजे 3.0 तीव्रता का झटका आया.

जोन V के तहत आता है कांगड़ा

कांगड़ा जिला, जहां धर्मशाला स्थित है, भूकंपीय क्षेत्र V जोन के अंतर्गत आता है, जो भारत में सबसे अधिक भूकंप जोखिम वाली श्रेणी है. 3 से 4 तीव्रता के भूकंपों को आम तौर पर मामूली माना जाता है और ये शायद ही कभी संरचनात्मक क्षति का कारण बनते हैं, हालांकि इन्हें अक्सर निवासियों द्वारा महसूस किया जाता है. भूकंप विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियों से भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. भूकंप के झटकों ने 1905 के विनाशकारी कांगड़ा भूकंप की यादें ताजा कर दी हैं, जो भारत के इतिहास में सबसे घातक भूकंपों में से एक है. 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20,000 से अधिक लोग मारे गए थे और पूरे क्षेत्र में 100,000 से अधिक इमारतें नष्ट हो गईं थीं.

हिमालय दुनिया की सबसे अधिक विवर्तनिक रूप से सक्रिय पर्वत शृंखलाओं में से एक है. विवर्तनिक रूप से सक्रिय का अर्थ है कि पृथ्वी की पपड़ी (क्रस्ट) के नीचे मौजूद चट्टानी प्लेटों (टेक्टोनिक प्लेट्स) में लगातार हलचल हो रही है. इन क्षेत्रों में प्लेटों के आपस में टकराने, दूर जाने या रगड़ खाने के कारण अक्सर भूकंप आते हैं. लगभग 50 मिलियन वर्ष पहले भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव के कारण बनी पर्वत शृंखला हर साल लगभग एक सेंटीमीटर ऊपर उठती रहती है.

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News Source: PTI

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