Home पर्यटन इस जगह के रेशम ने बनाई दुनिया में पहचान, जानें कौन सा शहर कहलाता है भारत की Silk City

इस जगह के रेशम ने बनाई दुनिया में पहचान, जानें कौन सा शहर कहलाता है भारत की Silk City

by Preeti Pal 6 June 2026, 5:20 PM IST
6 June 2026, 5:20 PM IST
इस जगह के रेशम ने बनाई दुनियाभर में पहचान, जानें कौन सा शहर कहलाता है भारत की Silk City

Silk City of India: जब भी भारत के सबसे फेमस सिल्क बिजनेस की बात होती है, तो एक शहर का नाम सबसे पहले सामने आता है और वो है भागलपुर. बिहार के ईस्ट में गंगा नदी के साउथ तट पर बसा ये ऐतिहासिक शहर सिर्फ कल्चरल हेरिटेज के लिए ही नहीं, बल्कि बेहतरीन सिल्क प्रोडक्शन के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. यही वजह है कि भागलपुर को भारत की सिल्क सिटी भी कहा जाता है. भागलपुर की पहचान उसके खास तसर सिल्क से जुड़ी हुई है. भारत दुनिया का ऐसा अनोखा देश है जहां रेशम की चार मेन वेराइटी मिलती हैं. इनमें मलबरी, एरी, मूगा और तसर का नाम शामिल है. लेकिन भागलपुर की असली ताकत तसर सिल्क है, जिसे वाइल्ड सिल्क भी कहा जाता है.

क्यों है खास?

तसर सिल्क सिंपल रेशम की तरह पाले गए रेशम के कीड़ों से नहीं, बल्कि जंगलों में पाए जाने वाले जंगली रेशम कीड़ों से मिलता है. यही वजह है कि भागलपुरी तसर सिल्क की बनावट और चमक बाकी रेशमी कपड़ों से अलग दिखती है. भागलपुरी सिल्क की सबसे बड़ी खासियत इसकी नेचुरल और गोल्डन शाइन है. हैरानी की बात कि इसके लिए किसी एडिशनल केमिकल प्रोसेस की जरूरत नहीं पड़ती. इसके अलावा इसका हल्का खुरदुरा टेक्सचर इसे एक अलग पहचान देता है. साथ ही ये सिल्क काफी ड्यूरेबल भी होता है. दिलचस्प बात ये है कि ये फैब्रिक सिर्फ खूबसूरत ही नहीं बल्कि काफी कंफर्टेबल भी होता है. फाइबर में मौजूद छोटे-छोटे छेद्र नेचुरल इंसुलेशन का काम करते हैं. यही वजह है कि ये गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट बनाए रखने में मदद करता है.

रोजगार और विरासत

भागलपुर की सिल्क इंडस्ट्री का वाकई में बहुत बड़ी है. यहां लगभग 25,000 से ज्यादा स्किल्ड बुनकर और लगभग 10,000 एक्टिव हैंडलूम्स काम करते हैं. इस शहर में लगभग 1 लाख लोग सीधे या इनडायरेक्ट फॉर्म में सिल्क बिजनेस से जुड़े हुए हैं. कोकून तैयार करने से लेकर धागा बनाने और फिर खूबसूरत डिजाइन बुनने तक, हर प्रोसेस में पीढ़ियों से चली आ रही आर्ट देखने को मिलती है. यहां के कई परिवारों के लिए बुनाई सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि विरासत है. ये हुनर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता आया है और आज भी उसी समर्पण के साथ जिंदा है.

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एक और पहचान

वैसे, भागलपुर की एक और खास पहचान है और वो है अहिंसा सिल्क. इस प्रोसेस में कई बुनकर रेशम के कीड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना काम करते हैं. वो कोकून से रेशम निकालने से पहले पतंगों के खुद बाहर निकलने का इंतजार करते हैं. इस इको फ्रैंडली तरीके को दुनियाभर में पसंद किया जा रहा है.

विदेश में बिजनेस

बिजनेस के नज़रिए से भी भागलपुर बहुत अहम है. ये शहर भारत का दूसरा सबसे बड़ा सिल्क एक्सपोर्टर माना जाता है. हर साल यहां 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का सिल्क बिजनेस होता है. प्रीमियम क्वालिटी का लगभग 40 से 50 प्रतिशत सिल्क विदेश में एक्सपोर्ट किया जाता है. भागलपुरी साड़ियां, दुपट्टे, होम फर्निशिंग आइटम्स और मॉर्डन फैशन आउटफिट्स अमेरिका, यूरोप, जापान और वेस्ट एशिया जैसी बड़ी मार्केट्स तक पहुंचता है. बिजली की कमी और मशीन से बने सिंथेटिक कपड़ों की बढ़ती डिमांड जैसे चैलेंजेस के बावजूद भागलपुर के बुनकरों का हुनर आज भी अपनी चमक बरकरार रखे हुए है. यही वजह है कि भागलपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत की परंपरा और सांस्कृति का सिंबल माना जाता है.

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