Nepal Floods: नेपाल में अचानक आई भयानक बाढ़ से शनिवार को मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई. प्रभावित ज़िलों से और शव बरामद किए गए. बचाव दल लगभग 4,900 लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे. अधिकारियों ने बताया कि अब तक बरामद कुल शवों में से 758 वयस्क थे, 85 बच्चे थे और 501 शवों के कुछ अंग गायब थे. 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने (हिमस्खलन) से आई इस अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया. हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी के बाढ़ का पानी निचले इलाकों में घुस गया, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं.
चितवन जिले से सबसे ज्यादा शव बरामद
चीनी मीडिया की खबरों के अनुसार, इस आपदा में चीन की तरफ भी कम से कम 21 लोगों की मौत हुई, जबकि तिब्बत में 500 से ज़्यादा लोग लापता हैं. नेपाल में, अकेले चितवन ज़िले से ही लगभग 360 शव बरामद किए गए हैं, जो सभी ज़िलों में सबसे ज़्यादा है. जिन अन्य ज़िलों से शव बरामद किए गए, उनमें रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी ईस्ट और नवलपरासी वेस्ट शामिल हैं. अब तक DNA सैंपल लेने जैसी ज़रूरी प्रक्रियाओं के बाद 1,030 शवों को अस्थायी रूप से दफ़नाया जा चुका है.
600 से ज्यादा बच्चे लापता
अधिकारी कोशी, नारायणी, बागमती, करनाली, महाकाली, कंकई, कमल, कमला, बबई, ईस्टर्न राप्ती और वेस्टर्न राप्ती जैसी कई नदियों के जलस्तर पर नज़र रखे हुए हैं, जबकि नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल ग्यारहवें दिन भी खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं. लापता लोगों की संख्या का अनुमान 4,898 लगाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि लापता लोगों में रसुवा और नुवाकोट ज़िलों के 600 से ज़्यादा बच्चे शामिल हैं. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अब तक 13,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया जा चुका है. बाढ़ से प्रभावित ज़िलों में पनबिजली परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चल रहे थे, जहां सैकड़ों लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका थी.
भारत और चीन कर रहा मदद
भारत और चीन के विशेषज्ञों की टीमें इन अभियानों में नेपाली टीमों की मदद कर रही थीं. शुक्रवार को त्रिशूली 3A पनबिजली परियोजना की एक सुरंग से दो लोगों को ज़िंदा बचाया गया. नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, इनकी पहचान परियोजना में मैकेनिकल सुपरवाइज़र कबीर महर्जन (45) और फोरमैन संजय साह (30) के तौर पर हुई. साथ ही, अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि भारत की सुरंग बचाव टीम, जो नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है, ने बाढ़ प्रभावित रसुवा ज़िले में चिलिमे सुरंग के अंदर एक अस्थायी रास्ता बनाया है ताकि प्रभावित इलाकों तक और भारी उपकरण पहुंचाए जा सकें.
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News Source: PTI
