Home Top News 700 KM दूर गिरी मिसाइल और हिल गई दुनिया! उत्तर कोरिया ने अमेरिका को दिया अल्टीमेटम

700 KM दूर गिरी मिसाइल और हिल गई दुनिया! उत्तर कोरिया ने अमेरिका को दिया अल्टीमेटम

by Sanjay Kumar Srivastava 3 October 2026, 9:37 PM IST
3 October 2026, 9:37 PM IST
700 KM दूर गिरी मिसाइल और हिल गई दुनिया! उत्तर कोरिया ने अमेरिका और सहयोगियों को दिया नया अल्टीमेटम

North Korea : उत्तर कोरिया ने 3 अक्टूबर की सुबह अपने पूर्वी तटीय शहर वॉनसन से एक मध्यम दूरी की रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) का सफल परीक्षण किया है. दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस इस अत्याधुनिक मिसाइल ने करीब 700 किलोमीटर की दूरी तय की और जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर समुद्र में गिरी.

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परीक्षण की बताई वजह

उत्तर कोरिया का दावा है कि यह परीक्षण उसकी संप्रभुता और रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए किया गया है. हाल ही में सीमा पर हुए लैंडमाइन धमाकों में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिकों के घायल होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और जापान को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है. उसका आरोप है कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान मिलकर इस क्षेत्र में लगातार संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं और प्योंगयांग के खिलाफ खतरनाक घेराबंदी कर रहे हैं. अपनी सुरक्षा के लिए उत्तर कोरिया इन दोनों देशों को परमाणु और मिसाइल शक्ति से डराकर दूर रखना चाहता है.

ट्रंप की बातचीत की पहल क्यों ठुकराई?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत की पहल को उत्तर कोरिया ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक कोई भी राजनयिक वार्ता निरर्थक है. उत्तर कोरिया का मानना है कि अमेरिका सिर्फ उसकी परमाणु निरस्त्रीकरण चाहता है, लेकिन बदले में प्रतिबंधों से कोई बड़ी राहत नहीं दे रहा है. प्योंगयांग ने ट्रंप के इस कदम को महज एक ‘दिखावा’ और ‘समय बर्बाद करने की रणनीति’ करार देते हुए अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को और तेज करने का संकल्प लिया है.

लैंड माइंस के कारण बढ़ा तनाव

उत्तर कोरिया ने एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. उत्तर कोरिया के इस परीक्षण से जापान और दक्षिण कोरिया अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए हैं. उत्तर कोरिया ने शनिवार को दावा किया कि इस मिसाइल में ऐसी क्षमता है कि यह उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकती है, जिससे दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल सुरक्षा प्रणालियों से बचा जा सके. यह ताज़ा परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब सीमा पर ज़मीनी बारूदी सुरंगों (लैंड माइंस) में हुए धमाकों के कारण दोनों कोरियाई देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.

मिसाइल को रोकना या मार गिराना बहुत मुश्किल

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग ने कहा कि उनके भाई ने मिसाइल के परीक्षण की निगरानी की. उन्होंने इसे ‘रणनीतिक’ बताया, जिसका मतलब है कि इसे परमाणु हथियार ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि यह कम ऊंचाई पर अपनी उड़ान का रास्ता बदल सकती है और इसमें ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताएं हैं जिनसे इसे रोकना या मार गिराना बहुत मुश्किल होगा. उधर, जापान की सेना ने कहा कि मिसाइल उसके एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (विशेष आर्थिक क्षेत्र) के बाहर समुद्र में गिरी.

मिसाइल को ट्रैक नहीं कर पाए पड़ोसी देश : किम

दक्षिण कोरियाई सेना, जो अक्सर उत्तर कोरिया पर अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाती है, ने किम के दावों पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की. दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ ऑफ़ स्टाफ़ ने शनिवार सुबह बताया कि उन्होंने पूर्वी तट के वॉनसन इलाके से उत्तर कोरियाई मिसाइल को लॉन्च होते और 700 किलोमीटर (435 मील) से ज़्यादा दूरी तक उड़ते हुए देखा. बाद में जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने मिसाइल को लगभग 680 किलोमीटर (422 मील) तक उड़ते हुए देखा.

किम ने अपने बयान में तर्क दिया कि अमेरिका के सहयोगी देशों द्वारा उड़ान के बारे में बताई गई अलग-अलग जानकारियों से यह साबित होता है कि वे उड़ान के दौरान मिसाइल को ठीक से ट्रैक नहीं कर पाए. उन्होंने कहा कि जब भी हमने मिसाइलों के लिए वेव-लाइक ट्रैजेक्टरी मोड (लहर की तरह उड़ने का तरीका) का इस्तेमाल किया, तो दुश्मन उनके पहले स्किप प्वाइंट से ही टारगेट को ट्रैक करने में नाकाम रहा. इस हमले से बचने का कोई तरीका नहीं है.

धमाकों से दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक हुए थे घायल

यह मिसाइल लॉन्च उस घटना के एक दिन बाद हुआ जब किम ने 21 सितंबर को हुए लैंड माइंस धमाकों के लिए उत्तर कोरिया से माफ़ी मांगने की दक्षिण कोरिया की मांग का मज़ाक उड़ाया था. ये धमाके दोनों देशों की सैन्य सीमा रेखा के दक्षिण में लगभग 10 मीटर (11 गज) की दूरी पर हुए थे, जिसमें दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हो गए थे. दक्षिण कोरिया ने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली यूनाइटेड नेशंस कमांड के साथ मिलकर की गई जांच में पता चला कि ये धमाके उत्तर कोरिया द्वारा बिछाई गई माइंस (बारूदी सुरंगों) के कारण हुए थे. कमांड ने बाद में यह तय किया कि उत्तर कोरिया ने उस युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है जिसने 1950-53 के कोरियाई युद्ध में लड़ाई को खत्म किया था.

सियोल को बताया अपना पक्का दुश्मन

दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से सीमा पर मज़बूती बढ़ाने की हालिया कोशिशों को रोकने के लिए भी कहा है, जिसमें माइन्स और एंटी-टैंक बैरियर लगाना शामिल है. ये कोशिशें तब तेज़ हुईं जब 2024 में किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के साथ सुलह के अपने सरकार के लंबे समय से चले आ रहे लक्ष्य को छोड़ दिया और सियोल को अपना पक्का दुश्मन घोषित कर दिया.

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प्योंगयांग में शायद दूसरी सबसे ताकतवर हस्ती किम यो जोंग ने शुक्रवार को माइन धमाकों को लेकर सियोल की मांगों को बेहद दयनीय बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया के साथ हमेशा के लिए संबंध खत्म करना चाहता है. 30 सितंबर को एक बयान में, उन्होंने धमाकों के लिए उत्तर कोरिया की ज़िम्मेदारी से इनकार किया और धमकी दी कि अगर दक्षिण कोरिया सीमा पर मज़बूती बढ़ा रहे उत्तर कोरियाई सैनिकों पर गोलीबारी करता है, तो वे जवाबी कार्रवाई करेंगे.

उत्तर कोरिया ने बढ़ाया अपने हथियारों का परीक्षण

शनिवार को वॉनसान में किया गया लॉन्च, हाल के हफ़्तों में उत्तर कोरिया के कई सैन्य प्रदर्शनों में से एक था. इन प्रदर्शनों में मिसाइल टेस्ट, लाइव-फायर अभ्यास और एक नए युद्धपोत को शामिल करना शामिल है. किम जोंग-उन अमेरिका की कूटनीति को फिर से शुरू करने की अपील के बावजूद अपने बढ़ते परमाणु कार्यक्रम का प्रदर्शन कर रहे हैं. वॉनसान वही जगह है जहां उत्तर कोरिया ने 20 सितंबर को एक हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम का टेस्ट किया था, जिसे सरकारी मीडिया ने ऐसा बताया था. यह उन कई हथियारों में से एक है जिन्हें उत्तर कोरिया ने हाल के वर्षों में विकसित किया है और जिन्हें दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल सुरक्षा प्रणालियों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है. उत्तर कोरिया द्वारा टेस्ट किए गए विभिन्न हाइपरसोनिक सिस्टम में सॉलिड-फ्यूल वाली इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइलें शामिल हैं, जिन्हें पहली बार 2024 में पेश किया गया था.

दक्षिण कोरिया ने बढ़ाई सतर्कता

दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ ने शनिवार को कहा कि सेना ने उत्तर कोरिया से और लॉन्च की संभावना को देखते हुए निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है और वह अमेरिका और जापान के साथ बारीकी से जानकारी साझा कर रही है. सियोल के राष्ट्रपति कार्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग ने उत्तर कोरिया से बार-बार किए जा रहे बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च को तुरंत रोकने की मांग की. उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का उल्लंघन और एक गंभीर कदम बताया जो मौजूदा स्थिति को संभालने में कोई मदद नहीं करता है. अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने कहा कि इस लॉन्च से अमेरिकी कर्मियों या क्षेत्र, या हमारे सहयोगियों के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं है.

मॉस्को बना किम का नया दोस्त

2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ परमाणु वार्ता विफल होने के बाद से किम जोंग-उन ने वॉशिंगटन और सियोल के साथ कूटनीति को काफी हद तक छोड़ दिया है. उन्होंने अपनी विदेश नीति का नया केंद्र मॉस्को को बनाया है और यूक्रेन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध का समर्थन करने के लिए हजारों सैनिक और बड़ी मात्रा में हथियार भेजे हैं. सालों तक लगातार टेस्टिंग के बाद, किम के पास अब न्यूक्लियर मिसाइलों का बड़ा जखीरा है. इनमें लंबी दूरी के हथियार शामिल हैं जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंच सकते हैं, और कम दूरी के सिस्टम भी हैं जिनसे दक्षिण कोरिया और जापान को खतरा है.

वॉशिंगटन को छोड़नी होगी अपनी दुश्मनी वाली नीति

अगस्त में ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ एक बड़े मिलिट्री अभ्यास को कम कर दिया था. ऐसा उन्होंने किम के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिश में किया था, क्योंकि किम ने ऐसे अभ्यासों को हमले की तैयारी बताया था. उत्तर कोरिया ने अब तक ट्रंप की बातचीत की पहल को ठुकरा दिया है. उसका कहना है कि वॉशिंगटन को सबसे पहले अपनी दुश्मनी वाली नीति छोड़नी होगी. प्योंगयांग इस शब्द का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से अमेरिका के लगाए प्रतिबंधों और अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त मिलिट्री अभ्यासों के लिए करता रहा है. किम ने कहा कि बातचीत के लिए परमाणु हथियार खत्म करने की शर्त को भी हटाना होगा.

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