Indian Citizenship Proof: देश में अक्सर नागरिकता को लेकर कोई न कोई विवाद चलता रहता है, इसी कड़ी में अब नई बहस छिड़ गई है. सरकार ने कहा है कि पासपोर्ट किसी भी व्यक्ति की नागरिकता का प्रमाण नहीं है, यह केवल एक यात्रा दस्तावेज है. यह जानकारी सामने आते ही लोग हैरान हो गए हैं और कई तरह के भ्रम फैलने लगे. इसकी शुरुआत विदेश मंत्रालय (MEA) के एक स्पष्टीकरण बयान से हुई, जिसमें कहा गया कि कि पासपोर्ट नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं है. बल्कि यह केवल अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में पहचान सत्यापित करने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज है. अब लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं, जैसे- पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं है, अगर पासपोर्ट प्रमाण नहीं है, तो नागरिकता कैसे साबित की जाएगी. कौन से दस्तावेज सबसे अहम हैं. इस लेख में आपको इन सभी सवालों का जवाब मिलेगा.
पासपोर्ट क्यों नहीं है नागरिकता का प्रमाण?
एक सरकारी सोर्स ने कहा, “यह कल तय नहीं हुआ था कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है. नरेंद्र मोदी सरकार के तहत पिछले 12 सालों में भी यह तय नहीं हुआ था. पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का सबूत नहीं रहा है.” पासपोर्ट एक्ट 1967 की धारा 20 के तहत सरकार देश के हित में गैर-भारतीयों को भी पासपोर्ट दे सकती हैं, अगर उसे लगता है कि ऐसा करना आवश्यक है. यह धारा अधिनियम के अन्य सभी नियमों को ओवरराइड करती है यानी प्रभावी मानी जाती है.
इस धारा के आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले भी एक फैसला सुनाया था. साल 2013 के एक फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति और तीन अन्य लोगों को राहत देने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने नागरिकता साबित करने के लिए अपना पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड पेश किए थे. कोर्ट ने साफ कहा था कि पासपोर्ट को नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता. वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट उन 12 वैध सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स में से एक है जिनकी मदद से लोग वोटर लिस्ट में अपनी पात्रता साबित कर सकते हैं.

पासपोर्ट के पीछे साफ-साफ लिखा होता है कि यह भारत सरकार की संपत्ति है. सरकार के पास इसे कभी भी जब्त करने, कैंसल करने या रद्द करने का कानूनी अधिकार है. पासपोर्ट कैंसल होने से किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म नहीं होती, क्योंकि नागरिकता रद्द करने का कानूनी प्रोसेस पूरी तरह से अलग होता है. अगर नागरिकता को कोर्ट में या किसी कानूनी जांच में चुनौती दी जाती है, तो व्यक्ति को सिटिजनशिप एक्ट, 1955 के तहत सबूत देने होंगे.
चुनाव आयोग का बयान
चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा, “पासपोर्ट पहचान साबित करने वाले डॉक्यूमेंट्स में से एक था और अब भी है. इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.” इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यह तय करने के लिए डॉक्यूमेंट्स में से एक की जांच करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लायक है या नहीं. SIR पर सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, यह सिर्फ पहचान का डॉक्यूमेंट है. ऐसे यह समझना जरूरी है कि पासपोर्ट, आधार, PAN या वोटर ID जैसे डॉक्यूमेंट किसी व्यक्ति की पहचान, रहने की जगह, टैक्सपेयर स्टेटस, या इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन दिखा सकते हैं, लेकिन नागरिकता का आखिरी टेस्ट सिटिजनशिप एक्ट, 1955 और उससे जुड़े कानूनी नियमों पर ही होगा.
सिटिजनशिप एक्ट, 1955
नागिरकता अधिनियम, 1955 भारतीय संविधान के लागू होने के बाद यानी 26 जनवरी 1950 के बाद भारतीय नागरिकता प्राप्त करने, उसकी समाप्ति और अन्य संबंधित मामलों के बारे में प्रमुख कानून है. नागरिकता का प्रमाण क्या है और क्या नहीं, यह समझने के लिए आपको यह अधिनियम समझना होगा. इसमें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पांच तरीके बताए गए हैं.
जन्म से (By Birth) : भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति जन्म से भारत का नागरिक है. हालांकि इसमें खास शर्तें लागू होती हैं.
वंश से (By Descent) : भारत के बाहर पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है, अगर उसके माता-पिता में से कोई एक (या उनमें से कोई एक) भारतीय नागरिक है.
रजिस्ट्रेशन से (BY Registration): भारतीय मूल के लोग जो नागरिकता के लिए अप्लाई करते हैं और एक तय समय तक भारत में रहते हैं, वे रजिस्ट्रेशन के जरिए नागरिकता हासिल कर सकते हैं.
देशीयकरण से (By Naturalisation): कोई भी विदेशी नागरिक जो गैर-कानूनी माइग्रेंट नहीं है, एक तय समय तक भारत में रहने या खास सेवाएं (विज्ञान, कला, साहित्य आदि के क्षेत्र में) देने पर देशीयकरण का सर्टिफिकेट पा सकता है.
इलाके को शामिल करने से (By Incorporation of Territory): अगर कोई नया विदेशी इलाका भारत में शामिल होता है, तो भारत सरकार उस इलाके के लोगों को नागरिक घोषित कर सकती है.
एक दस्तावेज से साबित नहीं होगी नागरिकता
हर किसी को समझना होगा कि नागरिकता अधिनियम, 1955 में कोई भी अकेला ऐसा दस्तावेज या कार्ड के बारे में नहीं बताया गया है, जिससे आपकी नागरिकता साबित होती है. यह केवल इस बारे में बताता है कि आप कैसे नागरिकता ले सकते हैं. विदेशी नागरिक अपने माता-पिता की नागरिकता साबित करके, रजिस्ट्रेशन या देशीयकरण के जरिए भारतीय नागरिकता ले सकते हैं. वहीं भारत सरकार जन्म से नागरकि बने लोगों को कोई सिटिजनशिप सर्टिफिकेट नहीं देती है. हालिया घटनाक्रम से यह बात पक्की हो गई है कि उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट केवल उनकी पहचना और निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं.
कैसे साबित करेंगे खुद को भारतीय
भारतीय लोगों की नागरिकता, उनके जन्म स्थान और माता-पिता के कानूनी दस्तावेजों की पूरी कड़ी को मिलाकर साबित होती है. भारत में ज्यादातर लोगों को जन्म से ही नागरिकता मिल जाती है. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत जन्म से मिलने वाली नागरिकता के लिए केवल भारत में पैदा होना ही काफी नहीं है. इसके लिए समय-सीमा भी जरूरी है. इसलिए, किसी व्यक्ति के जन्म की जगह, समय और जन्म के समय उसके माता-पिता की नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज बहुत जरूरी माने जाते हैं. इसे तीन हिस्सों में समझा जा सकता है.
1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्में सभी लोग भारत के नागरिक है. उनकी नागरिकता साबित करने के लिए केवल उनका जन्म प्रमाण पत्र काफी है.
1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच भारत में जन्में लोगों के लिए उनके जन्म प्रमाण पत्र के साथ उनके माता-पिता में से किसी एक का भारतीय होना जरूरी है. इसमें माता-पिता में से किसी एक के पास भारत का जन्म प्रमाण पत्र होना सबसे मजबूत सबूत होगा.
3 दिसंबर 2004 के बाद भारत में जन्मे बच्चों के लिए उनके माता- पिता दोनों का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है या दोनों के पास भारत का जन्म प्रमाण पत्र होना चाहिए. इसके अलावा यह भी माना जाएगा, अगर जन्म के समय दोनों में से एक के पास नागरिकता हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो.
कुल मिलाकर कहे तो, भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए किसी भी व्यक्ति के पास उसके खुद के जन्म प्रमाण पत्र के साथ-साथ माता-पिता या दादा-दादी के नागरिकता का रिकॉर्ड (जन्म प्रमाण पत्र या सरकारी सेवा का रिकॉर्ड) होना चाहिए.

सहायक सबूत
कोर्ट, NRC प्रक्रिया और SIR प्रक्रिया में जन्म प्रमाण पत्र के अलावा कुछ अन्य सहायक दस्तावेजों को भी मांगा जा सकता है, जिससे नागरिकता तय करने के लिए जन्म से जुड़ी डिटेल का मिलान किया जा सके. इन सहायक दस्तावेजों में मूल निवास प्रमाण पत्र , 10वीं की मार्कशीट, टीसी, सरकारी नौकरी के सबूत और पुराने जमीन के दस्तावेज शामिल हैं.
ये दस्तावेज नहीं है नागरिकता का प्रमाण
आधार कार्ड- आधार अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में यह साफ कहा गया है कि आधार कार्ड केवल पहचान और भारत में निवास का प्रमाण है. भारत में 182 दिनों से अधिक समय तक रहने वाला कोई भी विदेशी नागरिक वैध रूप से आधार कार्ड बनवा सकता है, इसलिए यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है.
पैन कार्ड- पैन कार्ड केवल आयकर विभाग द्वारा टैक्स और वित्तीय लेनदेन के लिए जारी किया गया दस्तावेज है. विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों को भी भारत में व्यापार करने के लिए पैन कार्ड दिया जाता है, इसलिए यह भी नागिरकता का प्रमाण नहीं है.
वोटर आईडी कार्ड- इससे आपको भारत में वोट करने का अधिकार मिलता है, लेकिन कानूनी समीक्षा के दौरान अदालत सिर्फ वोटर आईडी कार्ड को आपकी नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं मानती है.
राशन कार्ड- यह सिर्फ पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत अनाज और सरकारी सब्सिडी पाने के लिए परिवार के रहने की जगह और आर्थिक स्थिति का एक दस्तावेज है.

राजनीतिक हल्ला
विदेश मंत्रालय के बयान के बाद से देश में नागरिकता को लेकर हल्ला मच गया है. विपक्षी पार्टियां और अन्य बड़े चेहरे सरकार पर हमलावर हो गए हैं. राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस मामले पर सरकार पर निशाना साधा. एक्स पर उन्होंने कहा, “तो फिर कौन सा डॉक्यूमेंट नागरिकता का सबूत है? BLO मेरी नागरिकता पर शक कर सकता है, मुझे मेरे वोट से दूर कर सकता है. नतीजा BJP चुनाव जीत जाती है. अब सुप्रीम कोर्ट जाओ!” गीतकार जावेद अख्तर ने MEA के स्पष्टीकरण को “बेतुका” बताया। उन्होंने कहा “विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का सबूत नहीं। सच में??? तो क्या सरकार बिना नागरिकता की जांच किए कुछ लोगों को पासपोर्ट दे रही है? यह बेतुका है.”
TMC लीडर महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि आज भारतीय सिटिजनशिप का एकमात्र सबूत हिंदू और BJP वोटर होना है. इसके अलावा कुछ नहीं चलेगा.” AIMIM चीफ और हैदराबाद के MP असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, सरकार के अनुसार कोई भी डॉक्यूमेंट सिटिजनशिप का पक्का सबूत नहीं है. 2030 तक सिर्फ एक डॉक्यूमेंट सिटिजनशिप का सबूत होगा- BJP मेंबरशिप.
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