Yemen News: यमन में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना में ताबड़तोड़ हमले किए जाने का दावा किया है. वहीं, हूती के अल-मसीरा टीवी ने बताया कि सऊदी अरब ने शहर पर एक बार फिर हवाई हमले किए हैं. सना के एक निवासी ने कहा कि हमें आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनाई दे रही थीं और पूरे शहर में जोरदार धमाके हो रहे थे. उन्होंने आगे कहा कि धमाकों की वजह से घरों की खिड़कियां हिलने लगीं और इमारतों में कंपन भी महसूस किया.
हूतियों के ठिकानों को बनाया गया निशाना
एक अन्य स्थानीय ने बताया कि जब धमाके होने शुरू हुए तो हमारे पैरों के नीचे की जमीन हिलने लगी. ऐसा लगा जैसा तेज भूकंप आया हो. हमारी खिड़कियां तेज-तेज हिल रही थी और बच्चे काफी डर गए थे. लोगों ने यहां तक बताया कि ये सभी हवाई हमले हूतियों के ठिकानों को निशान बनाकर किए गए थे. हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है. बता दें कि इससे पहले हूतियों ने दावा किया था कि उसने सऊदी अरब की राजधानी अरामको की एक फैसिलिटी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से जबरदस्त हमले किए थे.
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सऊदी अरब के खिलाफ की गई समुद्री नाकेबंदी
हूती संगठनों ने कहा कि यह हमला सना पर सऊदी अरब पर किए गए हमलों का जवाब था. सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान यमन में 60 हवाई और मिसाइल हमले किए गए हैं. हूती और सऊदी अरब के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया, जब हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद सीमा पार से मिसाइलों और ड्रोन से ताबड़तोड़ हमले किए गए.
यमनी सरकार को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त
हूती और यमनी सरकार की सेना के बीच जंग अब तेज हो गई है. यमन की सरकारी सेना को बड़े पैमाने पर सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है. हूती ने 10 सितंबर को लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर ‘मोचा’ पर कब्जा कर लिया. साथ ही इसके अगले दिन रणनीतिक रूप से अहम मय्यून द्वीप पर भी कब्जा कर लिया. यमन में संघर्ष की शुरुआत साल 2014 के आखिर में हुई थी. उस वक्त हूतियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य कार्रवाई की शुरू की.
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