Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चारों तरफ तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है. इस आपदा में अब तक 1,003 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. सुरक्षा बलों ने नेपाल के आठ जिलों से अब तक 1,003 शव बरामद किए हैं. नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिकों के अलावा कई सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. पूर्वी, मध्य और पश्चिमी नेपाल की नदियों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण बचाव और राहत अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं. इस बीच प्रशासन ने बाढ़ का नया अलर्ट जारी किया है. सुरक्षा बल लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं. अब तक करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है. प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने में जुटी हुई हैं.
चीन में 16 लोगों की मौत हुई
वहीं, 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों में भारी तबाही मचाई थी. हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी अपने साथ नीचे की ओर ले गई, जिसके कारण घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए. इसके अलावा पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है और इन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में नेपाल सरकार को काफी समय लग सकता है. चीनी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में चीन की तरफ भी 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में लगभग 550 लोग लापता हैं. NDRRMA के अनुसार, नेपाल में चितवन जिले से 321 शव बरामद किए गए. इसके बाद नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170, नुवाकोट से 95, गोरखा से 65, धाडिंग से 57, रसुवा से 41 और तनहुं से 38 शव मिले हैं. नेपाली अधिकारियों ने मंगलवार को देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में बाढ़ के खतरे को लेकर नया अलर्ट जारी किया और नदियों के पास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सावधानी बरतने की अपील की.

मध्य नेपाल में जलस्तर बढ़ने का खतरा
NDRRMA ने एक नोटिस जारी किया है, जिसमें नुवाकोट और रसुवा जिलों में अचानक बाढ़ आने की बहुत ज़्यादा संभावना है. यहां पर छोटी नदी और नालों में पानी का बहाव बढ़ने की उम्मीद है. इस बयान में यह भी कहा गया है कि मध्य नेपाल के तापलेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, खोटांग, ओखलढुंगा, रामेछाप, दोलखा, सिंधुपलचौक, कावरेपलानचौक, ललितपुर, भक्तपुर, काठमांडू और धाडिंग जैसे जिलों में भी जलस्तर बढ़ने का खतरा है. अथॉरिटी ने बताया कि पश्चिमी नेपाल में जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया है, उनमें गोरखा, लमजुंग, डोल्पा, रुकुम ईस्ट, रुकुम वेस्ट, जाजरकोट, दार्चुला, बैतडी, डडेलधुरा, डोटी, कैलाली और कंचनपुर शामिल हैं. NDRRMA ने नदियों के किनारे और जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए सतर्क रहें और जरूरी सावधानी बरतें.
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नदियों के जलस्तर पर रखी जा रही है निगरानी
अधिकारियों ने बताया कि कोशी, नारायणी, बागमती, करनाली, महाकाली और उनकी सहायक नदियां कंकई, कमला, बबई, पूर्वी राप्ती और पश्चिमी राप्ती जैसी नदियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. यहां पर कभी जलस्तर बढ़ सकता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा नदी और बाढ़ की स्थिति पर सीधे नजर रखने के लिए रसुवा जिले के तिमुरे में एक रियल-टाइम कैमरा लगाया है. यह कैमरा सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ के खतरों के बारे में समय पर जानकारी देने और शुरुआती चेतावनी प्रणाली को लगाया गया है. नेपाल के ऊर्जा मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने मंगलवार को ऊर्जा और मौसम विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ रसुवा और नुवाकोट समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों को लेकर चर्चा की. बिराज भक्त ने यह भी कहा कि चर्चा के दौरान नदियों की लगातार निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और जोखिम कम करने की तैयारियों में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

VSAT सिस्टम रख रहा कड़ी निगरानी
दूसरी ओर सिस्टम को पूरी तरह से चालू करने के लिए जरूरी ‘वेरी स्मॉल अपर्चर टर्मिनल’ (VSAT) और कम्युनिकेशन सिस्टम को मैनेज करने का काम भी चल रहा है. VSAT सिस्टम दूर-दराज के इलाकों में लगे सेंसर से जरूरी रियल-टाइम हाइड्रो-मौसम संबंधी डेटा को सेंट्रल मॉडलिंग और फोरकास्टिंग स्टेशनों तक भेजकर बाढ़ की निगरानी में मदद कर सकते हैं. कैमरे से मिलने वाली फुटेज और जानकारी को 24 घंटे बाढ़ की भविष्यवाणी और शुरुआती चेतावनी सेवा के साथ जोड़ा जाएगा. अधिकारियों ने कहा कि इससे नदी की स्थितियों की लगातार निगरानी करने और संभावित बाढ़ के शुरुआती संकेतों की पहचान करने में मदद मिलेगी. नेपाल सरकार ने खोज और बचाव कार्यों के लिए 21,300 से ज़्यादा सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है, जबकि हेलीकॉप्टर फंसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए लगातार उड़ानें भर रहे हैं.
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सड़कों को लेकर सरकार ने किया निर्देश जारी
मध्य नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में विनाशकारी बाढ़ के बाद ट्रैफिक का दबाव बढ़ने के कारण अधिकारियों ने काठमांडू को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले पृथ्वी और त्रिभुवन हाईवे पर वन-वे ट्रैफिक नियम लागू कर दिए हैं. ट्रैफिक के नए इंतजामों के तहत काठमांडू से हेटौडा जाने वाली गाड़ियों को फार्पिंग-फाखेल-कुलेखानी-भीमफेदी रूट का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है. अधिकारियों के अनुसार, हेटौडा से काठमांडू जाने वाली गाड़ियों को भीमफेदी-कुलेखानी-सिसनेरी-दक्षिणकाली रूट का इस्तेमाल करना चाहिए. हेटौडा से काठमांडू जाने वाली 10 पहियों तक की मालवाहक और यात्री गाड़ियों को त्रिभुवन हाईवे का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है. साथ ही हेटौडा लौटने वाली गाड़ियों को कांति हाईवे का इस्तेमाल करना चाहिए. धाडिंग जिले के कृष्णाभीर में बाढ़ से हाईवे के कुछ हिस्से बह जाने और इस रूट पर ट्रैफिक बाधित होने के बाद वन-वे ट्रैफिक के इंतजाम लागू किए गए थे.

बस्तियों और इमारतों को डूबते हुए देखा
आपको बताते चलें कि जब बाढ़ ने नीचे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया तो शिव गिरी और छह अन्य लोगों के पास ऊपर चढ़ने के अलावा कोई चारा नहीं था. इसके बाद रसुवा में मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से ऊपर की ओर भागते हुए उन्होंने घरों, बस्तियों और इमारतों को डूबते हुए देखा. गिरी ने ‘नेपाल न्यूज’ वेबसाइट को बताया कि उनके कई साथी और उनका चचेरा भाई भी बाढ़ में बह गए. तिमुरे और धुंचे कस्बों तक जाने वाले आम रास्ते बंद होने के कारण इस समूह ने लगभग 12 घंटे तक जंगल में पैदल यात्रा की और फिर एक गुफा मिली जहां उन्होंने रात बिताई. उनकी यह मुश्किल भरी यात्रा नेपाल के बाढ़ प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जान बचाने की उन कोशिशों का हिस्सा थी. साथ ही बचाव दल अभी भी उन सैकड़ों मजदूरों और कर्मचारियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे 26 अगस्त से कोई संपर्क नहीं हो पाया है. माना जा रहा है कि उनमें से कई लोग सुरंगों के अंदर फंसे हुए हैं. अथॉरिटी ने सोमवार को बताया कि अब तक सुरंगों से लगभग 280 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें अभी भी फंसे हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है.
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बचाव के लिए मांगी मदद
मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में टेक्निकल कर्मचारी गिरी ने बताया कि अगले दिन उनका समूह प्रोजेक्ट साइट की ओर नीचे उतरा, खुद को विस्थापित बताया और बचाव के लिए मदद मांगी. नेपाली सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें काठमांडू पहुंचाया, जहां गिरी का त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे सिविल इंजीनियर संदीप राणा लगभग 100 अन्य कर्मचारियों के साथ पहाड़ी पर चढ़कर बढ़ती बाढ़ से बच निकले. राणा ने सोमवार को ‘द राइजिंग नेपाल’ को बताया कि जब वह प्रोजेक्ट ऑफिस में थे, तभी इमरजेंसी सायरन बजा. इससे पहले कि कर्मचारी तय असेंबली पॉइंट तक पहुंच पाते, उन्हें बताया गया कि डैम साइट से लगभग 12 किलोमीटर ऊपर की ओर जबरदस्त बाढ़ आ गई है.

राटोपाटी न्यूज़ पोर्टल के अनुसार, रामचंद्र और उनके पांच साथी सुरंग से बाहर निकलने के रास्ते से सैकड़ों मीटर दूर थे. तभी रास्ते में पानी भरने लगा. बहने से बचने के लिए उन्होंने सुरंग की छत पर लगी लोहे की सीढ़ी को पकड़ लिया. रामचंद्र ने बताया कि छह लोगों ने खुद को संभालने के लिए टिन की एक शीट का इस्तेमाल किया और करीब छह घंटे तक एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी पर जाते रहे. हम छह लोग थे और बाद में सुरंग के दरवाजे पर हमें एक और व्यक्ति मिला. ये बातें तब सामने आईं जब नेपाल के हाइड्रोपावर कॉरिडोर में तबाही के बारे में पता चलने लगा. मौके पर 90 सदस्यों वाली एक संयुक्त बचाव टीम तैनात की गई है. टीम सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंची और छह वर्ग फुट का एक छेद बनाया. अधिकारियों ने बताया कि बचावकर्मी रस्सियों की मदद से उस छेद से नीचे उतरे और अंदर फँसे लोगों को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
