Supreme Court: NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए रद्द करने का आदेश दिया है. शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने भी अपना रुख बदलते हुए 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान किया है. पार्टी ने कहा कि केंद्र सरकार के कदम और शीर्ष अदालत के आदेश के बाद प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं रह गई है.
CJP ने अपना मार्च वापस लेने का फैसला किया
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष दास ने कहा कि सरकार की तरफ से मिले आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है. वहीं, वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने बताया कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है. जैसा कि हम जानते हैं कि 20 से 25 जुलाई तक दिल्ली में जंतर-मंतर पर और देश के कई हिस्सों में शिक्षा में सुधार को लेकर बहुत सक्रिय विरोध प्रदर्शन हुए थे. इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और युवाओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए थे. केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया था कि वे किसी भी आपराधिक कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाएंगे और मुआवजा देंगे.
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छात्रों को मुआवजे देने पर क्या बोला केंद्र?
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत में दिए गए भरोसे पर कायम है. उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा. हालांकि, केंद्र सरकार ने मुआवजे देने के लिए तीन महीने का वक्त मांगा है. मुआवजे का तरीका तय करने के लिए विभिन्न राज्यों की सरकारों और संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद इसकी रकम तय की जाएगी.
क्या 2873 लोगों पर होगी कार्रवाई?
दरअसल, कोर्ट ने स्टूडेंट्स के ऊपर दर्ज हुईं एफआईआर करने का आदेश दिया है. लेकिन आपराधिक इतिहास वाले 2873 व्यक्तियों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है. तुषार मेहता ने कोर्ट ने बताया कि इन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है. सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन ने इन 2873 लोगों की सूची मांगी है.
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News Source: PTI
