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सावधान! बढ़ रहा समुद्र का जलस्तर : क्या कहती है संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ? कहीं डूब न जाए मुंबई और कोलकाता

by Sanjay Kumar Srivastava 1 September 2026, 7:23 PM IST (Updated 1 September 2026, 7:29 PM IST)
1 September 2026, 7:23 PM IST (Updated 1 September 2026, 7:29 PM IST)
सावधान! बढ़ रहा समुद्र का जलस्तरः क्या कहती है संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट, कहीं डूब न जाए मुंबई और कोलकाता, 1.4 करोड़ आबादी पर संकट

Sea level: संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से भारत के मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख तटीय शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है. ‘समुद्र के जलस्तर में वृद्धि से जुड़ी चुनौतियां और उपाय’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह संकट अब दूर का भविष्य नहीं बल्कि वर्तमान की तेज़ी से बढ़ती हकीकत बन चुका है. इतिहास में पहली बार समुद्र का पानी इतनी तीव्र गति से बढ़ रहा है, जो दुनिया भर की आबादी के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है.

1.4 करोड़ आबादी पर संकट

दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों, विशेषकर मुंबई, कोलकाता और ढाका में 1.4 करोड़ (14 मिलियन) से अधिक लोगों के घर हमेशा के लिए पानी में समा जाने और भारी विस्थापन का तत्काल खतरा है. बढ़ते जलस्तर से जल प्रणालियों, परिवहन नेटवर्क, बिजली ग्रिडों, इमारतों और भूजल संसाधनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है. अमीर देशों के मियामी, न्यूयॉर्क और ग्वांगझू जैसे शहरों में तटीय बुनियादी ढांचे पर 2 से 3.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्तीय जोखिम है. यह संकट न केवल वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक विकास को बाधित कर रहा है, बल्कि बुनियादी मानवाधिकारों के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है. संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र का जलस्तर बढ़ने और जमीन धंसने के दोहरे संकट से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा चरम पर पहुंच गया है, जिससे मनुष्यों की सेहत पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है.

पानी जनित बीमारियों का बढ़ा खतरा

तटीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और साफ-सफाई का बुनियादी ढांचा नष्ट होने से पानी जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. इसके अलावा, लोगों में चोट लगने, जान गंवाने और मानसिक तनाव का जोखिम तेजी से बढ़ा है. स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि खारे पानी के जमीन के अंदर फैलने से तटीय इलाकों के कुएं और मिट्टी नमकीन हो रहे हैं. तूफानों के कारण जलस्रोतों में दीर्घकालिक प्रदूषण फैल रहा है, जिससे पीने का साफ पानी, खेती की पैदावार और सिंचाई प्रणालियां सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस संकट से न सिर्फ लोगों का रोजगार और आवास छिन रहा है, बल्कि जरूरी जलीय इकोसिस्टम भी पूरी तरह तबाह हो रहा है.

2024 में 5.9 मिमी बढ़ा समुद्र का जलस्तर

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि नदी बेसिन, मीठे पानी के सिस्टम, तटों और महासागर को जोड़ने वाली सही और एकीकृत नीतियों को ठीक से लागू नहीं किया गया तो इसका सबसे ज़्यादा असर कमज़ोर समूहों और क्षेत्रों पर पड़ेगा. जैसे कि पारंपरिक मछली पकड़ने वाले, छोटे स्तर का पर्यटन और बंदरगाह पर निर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं, समुद्र के जलस्तर में तेज़ी, जो मनुष्यों की वजह से हो रही ग्लोबल वार्मिंग का सीधा नतीजा है. 2014 और 2023 के बीच दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर हर साल 4.7 मिमी बढ़ा. अकेले 2024 में समुद्र का जलस्तर 5.9 मिमी बढ़ा, जो एक नया रिकॉर्ड है. इसकी मुख्य वजह महासागरों का बहुत ज़्यादा गर्म होना था.

मजबूत तकनीकी ढांचे की जरूरत

कुछ इलाकों में तो यह पिछले 4,000 सालों में सबसे तेज़ गति से गर्म हुआ. उम्मीद है कि जलवायु प्रणाली में पहले से ही मौजूद गर्मी के कारण 2050 तक यह दर बढ़ती रहेगी. समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी को पलटा नहीं जा सकता और यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, इसलिए इसके लिए समय रहते, एहतियाती और लंबे समय की अनुकूलन योजना बनाना ज़रूरी है. इसमें कहा गया है कि इसके लिए पर्याप्त, आसानी से उपलब्ध और पहले से अनुमान लगाने योग्य फंड, बेहतर डेटा और वैज्ञानिक क्षमताएं और मज़बूत तकनीकी, संस्थागत और कानूनी ढांचे की ज़रूरत है. ये चीज़ें प्रभावित लोगों और राज्यों को इस खतरे से निपटने में मदद करेंगी.

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News Source: PTI

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