SpaceX Starship Launch: अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर ऐसा कदम उठाया गया है, जो आने वाले समय की तस्वीर बदल सकता है. दरअसल, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने टेक्सास के स्टारबेस से अपने बहुत ही शक्तिशाली स्टारशिप रॉकेट को लॉन्च किया है. इस मिशन को सिर्फ एक और रॉकेट लॉन्च नहीं माना जा रहा, क्योंकि स्टारशिप का मकसद पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने के साथ-साथ भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए नई तकनीक को परखना है. कंपनी का विजन इससे भी बड़ा है. वो ऐसी तकनीक तैयार करना चाहती है, जिससे इंसान चांद और मंगल तक ज्यादा आसानी से पहुंच सके.
दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट
स्टारशिप करीब 407 फीट ऊंचा है और इसे अब तक बनाए गए सबसे बड़े और शक्तिशाली रॉकेटों में गिना जाता है. इसकी खासियत सिर्फ इसका साइज नहीं, बल्कि डिजाइन है. इसके दोनों हिस्से सुपर हैवी बूस्टर और शिप अपर स्टेज को पूरी तरह और तेजी से दोबारा इस्तेमाल करने के हिसाब से तैयार किया गया है. स्पेसएक्स के लिए यही प्रयोग अंतरिक्ष तकनीक का सबसे बड़ा लक्ष्य है. अगर रॉकेट को बार-बार इस्तेमाल किया जा सके तो फ्यूचर में स्पेस जाने का खर्चा और टाइम दोनों को कम करने की संभावना बढ़ सकती है.
स्टारलिंक V3 की एंट्री
इस मिशन की एक और बड़ी खासियत स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती है. स्टारशिप से 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की प्लानिंग है. ये स्पेसएक्स के स्टारलिंक नेटवर्क की अगली पीढ़ी के सैटेलाइट हैं. कंपनी के मुताबिक स्टारलिंक V3 में ज्यादा क्षमता, बेहतर डेटा डेंसिटी और ज्यादा पावर जनरेशन की सुविधा है. इन्हें करीब 1 Tbps तक की डाउनलिंक और 160 Gbps तक की अपलिंक क्षमता को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. कंपनी का दावा है कि ये पिछली V2 पीढ़ी की तुलना में डाउनलोड क्षमता में करीब 10 गुना और अपलोड क्षमता में करीब 22 गुना बढ़ोतरी है.
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करीब 10 घंटे का मिशन
स्टारशिप की शुरुआती ऑर्बिट फ्लाइट को लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है. मिशन के दौरान करीब 6 बार पृथ्वी की परिक्रमा करने की प्लानिंग है. ये पूरी यात्रा लगभग 10 घंटे चल सकती है. इसके बाद स्टारशिप के पैसिफिक ओशियन में, चिली के पश्चिमी हिस्से की तरफ ओर स्पैशडाउन का लक्ष्य रखा गया है. वहीं, सुपर हैवी बूस्टर के लिए लॉन्च के बाद स्टेज सेपरेशन, बूस्टर बर्न और लैंडिंग बर्न जैसे अहम चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करना भी उद्देश्यों में शामिल है.
अगली उड़ान की तैयारी
इस मिशन में स्टारशिप की हीटशील्ड को भी करीब से जांचने की कोशिश होगी. तीन स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स में अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं, जो स्टारशिप के हीटशील्ड की तस्वीरें लेने और उन्हें धरती पर भेजने में मदद करेंगे. इन तस्वीरों से वैज्ञानिक और इंजीनियर भविष्य की उड़ानों के लिए हीटशील्ड की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे. सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद अपने एंटेना और सौर पैनल खोलेंगे. इसके बाद वे स्टारलिंक नेटवर्क से रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक्स के जरिए संपर्क स्थापित करेंगे.
चांद से मंगल तक नजर
स्पेसएक्स की नजर सिर्फ पृथ्वी की कक्षा तक सीमित नहीं है. कंपनी स्टारशिप को ऐसी तकनीक के रूप में विकसित करना चाहती है, जो भविष्य में इंसानों को चांद और मंगल जैसे दूसरे खगोलीय पिंडों तक पहुंचाने में मदद कर सके. यानी आज का ये रॉकेट लॉन्च सिर्फ अंतरिक्ष में एक उड़ान नहीं, बल्कि भविष्य की उन संभावनाओं की टेस्टिंग है जहां इंसान पृथ्वी की सीमाओं से आगे जाकर नए ठिकाने तलाश सकता है.
News Source: ANI
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