Israel on Iran US Deal: बीते 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों की मौत हो गई थी. इसकी जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल के अलावा अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों (कुवैत, सऊदी अरब, कतर समेत अन्य देशों में) पर हमला किया था. उसके बाद पश्चिम एशिया में जंग शुरू हो गई थी. अब 15 जून को ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का ऐलान हो गया. दोनों ही देश 19 जून को स्विट्जरलैंड में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.
इस बीच इजरायल ने इस समझौते से खुद को अलग बताया. इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-ग्विर (Itamar Ben-Gvir) ने कहा कि ट्रंप की डील इजरायल को बाध्य नहीं करती. उन्होंने आगे यह भी कहा है, “हम इस समझौते में शामिल नहीं हैं क्योंकि यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता और हम पर किसी भी तरह से लागू नहीं होता.” आइए जानते हैं कि इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-ग्विर ने ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर इजरायल के रुख को लेकर और क्या-क्या कहा है.
इजरायल कोई कमजोर देश नहीं- इतामार बेन-ग्विर
सोमवार को इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-ग्विर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, “ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता. इजरायल अमेरिका के अधीन नहीं है और हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं!” उन्होंने आगे कहा, “हमारा फर्ज इजरायल के नागरिकों, IDF के सैनिकों और यहूदी लोगों के प्रति है. साथ ही, हजारों सालों के निर्वासन के दौरान सताए गए और मारे गए यहूदियों के प्रति हमारा ऐतिहासिक फर्ज है कि हम इजरायल की धरती पर यहूदियों को सुरक्षा दें.”
नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर ने बताया, “जब भी हमने इजरायल की सुरक्षा से समझौता करके अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके, हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी.” उन्होंने आगे बताया, “ओस्लो समझौते के समय भी ऐसा ही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते में भी यही हुआ और गाजा में हालात को काबू में रखने की हर कोशिश के दौरान भी यही हुआ, जिसका नतीजा बाद में हमारे लिए बहुत बुरा साबित हुआ. हम जोर देकर कहते हैं: हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं. फिर भी, इजरायल कोई कमजोर या अस्थिर देश (बनाना रिपब्लिक) नहीं है.”
यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता- इतामार बेन-ग्विर
इतामार बेन-ग्विर ने बताया, “मैं प्रधानमंत्री (बेंजामिन नेतन्याहू) से हमेशा ये बातें कहता हूं और हर अहम ऐतिहासिक मोड़ पर बंद दरवाजों के पीछे भी इन्हें दोहराता हूं: ऐतिहासिक पलों में ऐतिहासिक फैसला ही लेना चाहिए.” उन्होंने कहा कि उनका रुख साफ है. इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर ने कहा, “मेरा रुख साफ है: हम इस समझौते में शामिल नहीं हैं क्योंकि यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता और हम पर किसी भी तरह से लागू नहीं होता.”
उन्होंने बताया, “हिज्बुल्लाह को पूरी तरह खत्म करने से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं किया जा सकता; हमारे लड़ाकों ने जिन इलाकों पर कब्जा किया है और जहां से आतंकी ढांचे को साफ किया है, वहां से पीछे नहीं हटना चाहिए. हमें ऐसी स्थिति में वापस नहीं जाना चाहिए जहां हजारों आतंकवादी उत्तरी बस्तियों की सीमाओं पर बैठे हों और निश्चित रूप से, इजरायल पर होने वाले हमलों के सामने हमें एक पल के लिए भी चुप नहीं रहना चाहिए.”

दुश्मनों के सामने अपनी नजरें झुकाने का कोई इरादा नहीं- इजरायल
इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर ने कहा, “हमें यह साफ कर देना चाहिए कि लेबनान से इजरायल की तरफ ड्रोन, UAV या मिसाइल छोड़े जाने पर इजरायल दहिया में हमला करेगा. कुछ महीने पहले तक यही ‘डिटरेंस बैलेंस’ (शक्ति संतुलन) था और हमें इसे किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “और सबसे बड़ी बात, हमें सभी को यह साफ बता देना चाहिए कि इजरायल के लोग 3000 साल पुराने लोग हैं. एक ऐसे अमर लोग जो लंबे सफर से नहीं डरते. हमें ब्रह्मांड के रचयिता पर भरोसा है. हम एक मजबूत और गर्व करने वाले लोग हैं जो मजबूती और गर्व के साथ अपनी मातृभूमि लौटे हैं और अब दुश्मनों के सामने अपनी नजरें झुकाने का हमारा कोई इरादा नहीं है. वे दिन बीत गए जब यहूदी मार खाते थे और चुप रहते थे. अब ऐसा कभी नहीं होगा!”
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News Source: PTI
