US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की संभावना अब बन रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को बैन से राहत देने और फाइनल डील के हिस्से के तौर पर रुके हुए फंड जारी करने को तैयार हैं, लेकिन सिर्फ तभी जब तेहरान न्यूक्लियर मुद्दे पर ठोस प्रगति दिखाएगा. एक US अधिकारी ने सोमवार को बताया, यूनाइटेड स्टेट्स मीडिएटर के जरिए “पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव बातचीत” कर रहा है.
रविवार को ट्रंप ने बताया कि उन्हें इस हफ्ते ईरान के साथ और बातचीत की उम्मीद है. US अधिकारी के मुताबिक, स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो बातचीत को लीड कर रहे हैं.
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अटकी बातचीत
अमेरिकी अधिकारी यह भी साफ किया कि जब तक न्यूक्लियर मुद्दों को सुलझाया नहीं जाता, तब तक कोई डील नहीं होगी. इससे पहले ट्रंप ने शनिवार (लोकल टाइम) को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के ईरान के नए प्रपोजल को यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि यह “मंजूर नहीं है.” ट्रंप ने कहा, “वे एक डील करना चाहते हैं, लेकिन ईरान की डील वह डील नहीं है जो मैं करना चाहता हूं. यह वही है जिस पर हम शायद एक साल पहले सहमत हो गए होते. उन्होंने ज्यादा ही दांव खेला.” संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ट्रंप ने प्रस्ताव इसलिए ठुकरा दिया, क्योंकि उन्हें ईरान की नीयत और ईमानदारी पर संदेह था.
ईरान ने न्यूक्लियर मुद्दे पर लचीलापन दिखाया
US अधिकारी के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिया है कि वह न्यूक्लियर मुद्दे पर अपने रुख में लचीलापन दिखाने को तैयार है. हालांकि दोनों पक्ष अभी तक इस बात पर सहमत नहीं हुए हैं कि समझौता कब और कैसे पूरा होगा. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि तेहरान ने न्यूयॉर्क में कतर के बिचौलियों के जरिए अमेरिका के साथ आगे की इनडायरेक्ट बातचीत की है. उन्होंने कहा कि ईरान वॉशिंगटन से आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है. उम्मीद है मंगलवार तक जवाब मिल जाएगा.
न्यूयॉर्क में हुई बैठक
पिछले हफ्ते, 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर, अराघची ने सात दिन के एक प्रस्ताव की रूपरेखा पेश की थी, जिसके तहत अगर वाशिंगटन कुछ शर्तें पूरी करता है तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल देगा. ईरान ने कहा कि प्रस्ताव बिचौलियों के जरिए बताया गया था और जलमार्ग को फिर से खोलने को अमेरिकी मिलिट्री दबाव में कमी जैसे उपायों से जोड़ा गया था. लेकिन रविवार को संयुक्त राष्ट्र में US एम्बेसडर माइक वाल्ट्ज ने कहा कि वॉशिंगटन ने इस प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया है और दावा किया कि तेहरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत से पहले सेंक्शन में राहत और “अरबों के फ्रीज़्ड एसेट्स” तक एक्सेस मांगा था.
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News Source: ANI
