US Leaving NATO: डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रूट के साथ मीटिंग की, जिसमें उन्होंने संगठन के प्रति अपनी नाराजगी जताई. ट्रंप ने कहा कि NATO सदस्य देशों ने उनकी मदद की अपील को नजरअंदाज कर दिया.
9 April, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नाटो के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रूट के साथ मीटिंग की. इस मीटिंग का मकसद ईरान युद्ध को लेकर मिलिट्री अलायंस के प्रति ट्रंप के गुस्से को शांत करना था, लेकिन ट्रंप ने रूट से NATO के बारे में कई शिकायते की. प्राइवेट मीटिंग से पहले, ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका नाटो छोड़ने पर विचार कर सकता है, क्योंकि NATO सदस्य देशों ने उनकी मदद की अपील को नजरअंदाज कर दिया था, जब होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए उन्होंने मदद की अपील की थी. इसके बाद, उन्होंने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में पोस्ट किया, जिससे पता चलता है कि वह अभी भी नाराज हैं.
NATO से बाहर निकलना चाहते ट्रंप
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा, “जब हमें उनकी जरूरत थी, तब NATO वहां नहीं था और अगर हमें उनकी दोबारा जरूरत पड़ी तो वे वहां नहीं होंगे. ” व्हाइट हाउस ने तुरंत कोई और अपडेट नहीं दिया. रिपब्लिकन प्रेसिडेंट के रूटे के साथ पहले भी अच्छे रिश्ते रहे हैं, और यह मीटिंग US और ईरान के मंगलवार देर रात दो हफ़्ते के सीजफायर पर सहमत होने के बाद हुई. बुधवार को इससे पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने माना कि ट्रंप ने NATO छोड़ने पर चर्चा की थी. लेविट ने कहा, “मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिस पर प्रेसिडेंट कुछ घंटों में सेक्रेटरी-जनरल रूटे के साथ चर्चा करेंगे.”
कांग्रेस ने 2023 में एक कानून पास किया था जो किसी भी US प्रेसिडेंट को उसकी मंज़ूरी के बिना NATO से बाहर निकलने से रोकता है. ट्रंप लंबे समय से NATO के आलोचक रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कहा था कि उनके पास खुद से अलायंस छोड़ने का अधिकार है.
क्या है NATO
NATO का मतलब है नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन. यह यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के 32 देशों का एक ताकतवर अलायंस है. NATO का सबसे जरूरी सिद्धांत “सामूहिक रक्षा” है. इसके तहत, अगर किसी एक मेंबर देश पर हमला होता है, तो इसे सभी मेंबर देशों पर हमला माना जाएगा और वे मिलकर इसका बचाव करेंगे. लेकिन अमेरिका ईरान युद्ध में ऐसा नहीं हुआ. जब ट्रंप ने ईरान द्वार बंद किए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के मदद मांगी तो किसी भी सहयोगी देश ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया. उल्टा ब्रिटेन ने कहा कि यह युद्ध उनका नहीं है, इसलिए वे इसमें शामलि नहीं होंगे, जिससे ट्रंप और ज्यादा नाराज हो गए हैं.
सहयोगियों ने नही की मदद
ट्रंप इस बात से भी नाराज हैं कि NATO के साथी स्पेन और फ्रांस ने ईरान युद्ध में US के लिए अपने एयरस्पेस या जॉइंट मिलिट्री फैसिलिटी के इस्तेमाल पर रोक लगाई. हालांकि, वे और दूसरे देश लड़ाई खत्म होने पर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए एक इंटरनेशनल कोएलिशन की मदद करने पर सहमत हुए. ट्रंप पहले भी NATO छोड़ने की धमकी दे चुके हैं और अक्सर कहते रहे हैं कि वे उन साथियों को छोड़ देंगे जो अपने मिलिट्री बजट पर ज़्यादा खर्च नहीं करते. NATO के पूर्व सेक्रेटरी-जनरल जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि उन्हें डर था कि ट्रंप 2018 में, प्रेसिडेंट के तौर पर अपने पहले टर्म के दौरान अलायंस से अलग हो सकते हैं.
‘दुश्मनी पालना फायदेमंद नहीं’
ट्रंप की मीटिंग से पहले, केंटकी रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैककोनेल ने मंगलवार रात अलायंस के सपोर्ट में एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, “11 सितंबर के हमलों के बाद, NATO सहयोगियों ने अपने युवा सैनिकों को अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका के अपने सैनिकों के साथ लड़ने और मरने के लिए भेजा.” मैककॉनेल, जो डिफेंस खर्च की देखरेख करने वाली कमेटी में हैं, ने ट्रंप से “साफ और एक जैसा” रहने की अपील की और कहा कि यह अमेरिका के फायदे में नहीं है कि “हमारे फायदे शेयर करने वाले साथियों के साथ दुश्मनी पालने में ज़्यादा समय बिताया जाए, बजाय इसके कि उन दुश्मनों को रोका जाए जो हमें धमकाते हैं.”
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News Source: PTI
