US Tariff on India: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के साथ ही दुनियाभर में टैरिफ का बम फोड़ना शुरू कर दिया था. भारत भी उसका प्रमुख प्रभावित देश है. अप्रैल 2025 से अब तक टैरिफ दर के साथ-साथ भारत-US ट्रेड रिश्तों में भी कई बार उतार-चढ़ाव हुए हैं. सबसे पहले भारत पर 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ लगाया गया था. इस बीच समय-समय पर इसको बढ़ाया और घटाया गया. लेकिन एक बार फिर भारत और चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी तेज हो गई है.
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कानून पर साइन किया है, जो उन्हें रूस और उसके टॉप एनर्जी खरीदारों जैसे चीन और भारत पर भारी टैरिफ दर लागू करने का अधिकार देता है. व्हाइट हाउस ने कहा, “शुक्रवार, 18 सितंबर, 2026 को, प्रेसिडेंट ने H.R. 5334, “लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” पर साइन करके इसे कानून बनाया, जो रूस पर कानूनी बैन, टैरिफ को मंजूरी देता है और ईरान पर मौजूदा बैन को बढ़ाता है.” इससे भारत को बड़ा झटका लगा है. किसी भी दिन ट्रंप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर आकर भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर सकते हैं. पिछले एक साल में टैरिफ की दरें और शर्तें तेजी से बदली हैं. यहां आपको इसकी पूरी टाइमलाइन के बारे में बताया गया है. साथ ही जानें कि अमेरिका के इस बिल से भारत पर क्या असर पड़ेगा और भारत सरकार का इस पर क्या रुख है.
कब-कब बढ़ा टैरिफ
यहां दोनों देशों के बीच टैरिफ से जुड़े खास बदलावों का टाइमलाइन दिया गया है.

2 अप्रैल, 2025- राष्ट्रपति बनने के तीन महीने बाद ही इस तारीख को “लिबरेशन डे” घोषित करते हुए, ट्रंप ने कई देशों पर टैरिफ (एडिशनल इंपोर्ट ड्यूटी) लगाने की घोषणा की थी. भारत के मामले में, यह 26 परसेंट (10 परसेंट बेसलाइन टैरिफ और 16 परसेंट रेसिप्रोकल टैरिफ) था. इस तारीख से पहले, भारत पर सिर्फ MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) वाली टैरिफ दर लागू थी. भारतीय को सिर्फ वही बेसिक स्टैंडर्ड टैरिफ देना पड़ता था जो अमेरिका विश्व व्यापाल संगठन (WTO) के बाकी सभी सदस्य देशों से लेता था.
9 अप्रैल, 2025- बातचीत के बाद US ने भारतीय सामान पर 90 दिनों (9 जुलाई, 2025 तक) के लिए 16 परसेंट रेसिप्रोकल टैरिफ को सस्पेंड कर दिया था. लेकिन 10 परसेंट बेसलाइन टैरिफ लागू रहा.
31 जुलाई, 2025– US ने 7 अगस्त, 2025 से 25 प्रतिशत रैसिप्रोकल टैरिफ लागू करने की घोषणा की.
6 अगस्त, 2025- नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की लगातार खरीद के लिए पेनल्टी के तौर पर भारत से आने वाले सामान पर एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की गई. इस ऑर्डर के बाद, एक छोटी छूट लिस्ट को छोड़कर, भारतीय सामान पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया.
7 फरवरी, 2026– भारत और US एक ट्रेड डील पर सहमत हुए, जिसके तहत वॉशिंगटन ने भारतीय सामान पर रेसिप्रोकल टैरिफ को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. US ने भारतीय सामान पर एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ वापस ले लिया, जो रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया था. अब 18 प्रतिशत की दर लागू थी.
20 फरवरी, 2026– ट्रेड डील के कुछ ही दिनों बाद, US सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 की बहुमत से एक अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का भारत और दूसरे देशों पर भारी टैरिफ लगाने के लिए इमरजेंसी पावर (IEEPA एक्ट) का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने ट्रंप के लगाए गए कई पिछले इमरजेंसी टैरिफ और इस नए 18% के एग्रीमेंट को कानूनी तौर पर उलझा दिया.
24 फरवरी, 2026– सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रंप पीछे नहीं हटे. उन्होंने तुरंत एक और कानून लागू किया- ट्रेड एक्ट 1974 का सेक्शन 122. कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, उन्होंने भारत समेत कई देशों पर 150 दिनों के लिए टेम्पररी 10% ग्लोबल इंपोर्ट सरचार्ज लगा दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि भारत के लिए टैरिफ रेट अस्थायी तौर पर 18% से घटाकर 10% (MFN रेट के अलावा) कर दिया गया.
24 जुलाई, 2026- ग्लोबल टैरिफ खत्म हो गया. इसके बाद ट्रंप ने एक नया पैंतरा आजमाया. अमेरिका ने ‘जबरन मजदूरी’ से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए, सेक्शन 301 के तहत भारत पर फिर से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया. ज़्यादातर एक्सपोर्ट पर असरदार रेट MFN टैरिफ + 10 परसेंट ही रहा. हालांकि 45 प्रतिशत से जरूरी सामानों पर छूट दी गई.
18 सितंबर, 2026– राष्ट्रपति ट्रंप ने “लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” पर साइन किए, जो उन्हें चीन और भारत समेत रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है.
क्या है सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ?
प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट पास किया. यह एक्ट राष्ट्रपति ट्रंप को चीन और भारत सहित रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. यह कानून रूस के “शैडो फ्लीट” और रूसी एनर्जी बैन से बचने में मदद करने वाले दूसरे विदेशी लोगों को टारगेट करता है, जिसमें जहाज के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, इंश्योरेंस देने वाले और कवर की गई एक्टिविटी में शामिल दूसरी पार्टियां शामिल हैं. यह कानून ट्रंप को इसे लागू करने के मामले में पूरी छूट देता है, जिसमें यह भी शामिल है कि किन देशों पर टैरिफ लगेगा, कौन से टैरिफ रेट लगेंगे और क्या बैन के नियमों में छूट दी जाएगी. अगर ट्रंप चाहें तो राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए भारत को इससे राहत भी दे सकते हैं.

हालिया स्थिति
फिलहाल भारत पर सेक्शन 301 टैरिफ के तहत 10 परसेंट का टैरिफ लागू है. उदाहरण के लिए, अगर भारत की किसी शर्ट पर US में 5 परसेंट MFN टैरिफ लगता है, तो अभी कुल टैरिफ 5 परसेंट प्लस अतिरिक्त 10 परसेंट (Sec 301 के तहत लगाया गया) है. इसके अलावा, सेक्टरल ड्यूटी भी हैं: स्टील और एल्युमिनियम पर 50 परसेंट और ऑटो कंपोनेंट पर 25 परसेंट. स्मार्टफोन, दवाइयां और एनर्जी प्रोडक्ट्स पर छूट है.
किसको लगेगी कितनी मार
पिछले एक सालों से ज्यादा समय से ट्रंप भारत और चीन जैसे देशों तो टैरिफ के बोझ तले दबाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कभी कोर्ट तो कभी आपसी बातचीत से संकट के बादल छटते गए. हालांकि अब ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 बादल कब और कितना फटेगा यह देखना होगा. बिल में भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन रूसी तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही गई है.
यह कानून प्रेसिडेंट के साइन करने के 30 दिनों के अंदर लागू हो जाएगा. इसके बाद उन देशों से इंपोर्ट किए गए सामान पर 100 परसेंट तक टैरिफ लगाया जाएगा, जो कुल वॉल्यूम के हिसाब से पिछले 12 महीनों में रूसी कच्चे तेल या नैचुरल गैस के टॉप पांच खरीदार रहे हैं. किसी देश को टैरिफ से छूट तब मिलेगी, जब उसके रूसी गैस इंपोर्ट का हिस्सा रूस के कुल एक्सपोर्ट का 15 परसेंट से कम हो और उसने इंपोर्ट को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हों.
भारत का रुख
इस बीच, बिल हाउस से पास होने के बाद भारत ने गुरुवार को कहा कि वह अलग-अलग सोर्स से तेल खरीदना जारी रखेगा. भारत के फैसला उसके नागरिकों के हितों के आधार पर होगा. भारत का पक्का मानना है कि सस्ता फ्यूल उसके 1.4 बिलियन लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी और देश की इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए जरूरी है. भारत अपनी क्रूड ऑयल की जरूरत का 85% से ज्यादा इम्पोर्ट करता है, जिसमें रूस का तेल लगभग 45% से 50% है.
टैरिफ लागू होने के बाद क्या असर होगा
- अगर अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ पूरी तरह से लागू करता है, तो इससे दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगा.
- इससे अमेरिका को भारत का लगभग ₹7 लाख करोड़ ($80-87 बिलियन) का सालाना एक्सपोर्ट पूरी तरह रुक सकता है, क्योंकि भारतीय सामान US मार्केट में दोगुना महंगा हो जाएगा. ऐसी स्थिति में अमेरिकी खरीदार भारत छोड़कर बांग्लादेश, वियतनाम या अन्य देशों में सस्ते विकल्पों की ओर चले जाएंगे.
- टेक्सटाइल और कपड़े, जेम्स और ज्वेलरी, लेदर उत्पाद, मरीन उत्पाद और इंजीनियरिंग के सामान के एक्सपोर्ट पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. लोग बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के कपड़े और सामान खरीदना पसंद करेंगे.
- इस बात को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है कि क्या फार्मास्यूटिकल्स और स्मार्टफोन (जो अभी टैक्स-फ्री कैटेगरी में आते हैं) पर भी असर पड़ेगा.
- इसके अलावा, क्याोंकि यह टैक्स रूस से तेल खरीदने पर पेनल्टी के तौर पर लगाया जाएगा, इसलिए भारत को सस्ता रूसी तेल छोड़कर खाड़ी देशों से महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों और घरेलू महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.
- डॉलर के कम इनफ्लो के कारण भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर सकता है, जिससे विदेशों से दूसरे सामानों का इंपोर्ट और भी महंगा हो जाएगा.
- इसके जवाब में, भारत भी अमेरिकी खेती के प्रोडक्ट (जैसे बादाम, सेब) और अमेरिकी टेक कंपनियों पर भारी टैक्स लगाकर कड़ा जवाब दे सकता है.
भारत पर लगेगा 100 प्रतिशत टैरिफ! ट्रंप ने बिल पर किए साइन, इन देशों को मिली छूट
News Source: PTI
