Iran-US Tension: 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले से शुरू हुई जंग अब तक शांत नहीं हुई है. पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. एक ओर ट्रंप प्रशासन स्पष्ट कर चुका है कि वह इस समुद्री मार्ग को स्वतंत्र गलियारा मानता है और यहां पहले जैसी स्थिति बहाल करना चाहता है. वहीं, दूसरी ओर तेहरान का कहना है कि वह अब इस मार्ग पर पहले जैसी स्थिति नहीं बनने देगा. ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर टैरिफ लगाने की भी बात कही है. अब समुद्री गलियारे को लेकर जारी यह संघर्ष परमाणु हथियार की बहस तक पहुंच गया है. अमेरिका ने धमकी दी है कि वह ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बना सकता है. इस पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने पलटवार किया है. मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अमेरिका की आलोचना करते हुए उसे वैश्विक परमाणु अप्रसार के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया.
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर जताया अफसोस
एक प्रेस ब्रीफिंग में इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका असल में परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है. किसी देश के खिलाफ धमकी देना और यह संकेत देना कि हम किसी खास हथियार का इस्तेमाल कर सकते हैं. अपने आप में ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (Non-Proliferation Treaty) के उल्लंघन को बढ़ाता देने जैसा है. बघाई ने अमेरिका की इस आक्रामक बयानबाजी पर संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) जैसी संस्थाओं की चुप्पी पर अफसोस जताया है. उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मिसाल पेश कर रहा है.
रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर दृढ़ बनाएगा
बघाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे खिलाफ दी जा रही धमकियां हमें अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए और अधिक दृढ़ बनाएंगी. साथ ही अगर अमेरिका इस तरह की धमकियां देता है तो ईरान अपनी परमाणु नीति को भी बदल सकता है. बघाई ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा है और आगे भी रहेगा. यह बात कई बार हम साबित भी कर चुके हैं. दूसरी ओर बीते करीब 20 सालों से यह दावा किया जा रहा है कि तेहरान ने परमाणु हथिया बना लिया है, जबकि वह सारी बहस हवा हवाई साबित हुई हैं. हालांकि, अभी भी ईरान का परमाणु अप्रसार संधि की शर्तों पर रुख नहीं बदला है. ईरान इस संधि का सदस्य है और तेहरान का कहना है कि जब तक वह इस संधि का हिस्सा है तब तक इसकी शर्तों का पालन करता रहेगा.
IAEA पर ईरान ने लगाया पक्षपात का आरोप
वहीं, IAEA ने ईरानी परमाणु स्थलों का फिर से निरीक्षण करने के लिए कहा था. इस पर तेहरान ने वैश्विक संस्था पर पक्षपात करने का आरोप लगाया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि यह संस्था ईरान के बुनियादी ढांचे पर हुए पिछले हमलों की निंदा करने में भी विफल रही है. निरीक्षणों के बारे में बात करते हुए बाघाई ने कहा कि हम अभी उस चरण तक बिल्कुल भी नहीं पहुंचे हैं. साथ ही IAEA के महानिदेशक पर ईरान का बकाया है और उन्हें पुराने बकाया को चुकाना चाहिए. उसके बाद ही भविष्य की राह पर बात करनी चाहिए.
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ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना ही लक्ष्य
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वाशिंगटन ने तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह कदम उठाया है. साथ ही उन्होंने मौजूदा संघर्ष के बीच तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए बहुत छोटी कीमत बताया है. अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले आयोवा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना ही अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का मुख्य कारण था.
चलो मध्य पूर्व की ओर चलते हैं
ट्रंप का स्पष्ट शब्दों में कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही हमारा मकसद है. सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले के बारे में उन्होंने कहा चलो मध्य पूर्व की ओर चलते हैं, क्योंकि हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने नहीं दे सकते हैं. ईरान के साथ संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर जताई गई चिंताओं पर ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई से मिलने वाले सुरक्षा लाभों के सामने यह आर्थिक असर जायज है.
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News Source: ANI
