Home Top News क्या ईरान-US युद्ध में होगी चीन की एंट्री? चीनी कंपनी पर हमले में 1 की मौत, जानें पश्चिम-एशिया का हाल

क्या ईरान-US युद्ध में होगी चीन की एंट्री? चीनी कंपनी पर हमले में 1 की मौत, जानें पश्चिम-एशिया का हाल

by Amit Dubey 30 July 2026, 3:52 PM IST (Updated 30 July 2026, 3:54 PM IST)
30 July 2026, 3:52 PM IST (Updated 30 July 2026, 3:54 PM IST)
West Asia Tension

West Asia Tension: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जो कभी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग माना जाता था, आज उसपर अपना हक जमाने के लिए युद्ध हो रहा है. यह रास्ता जिसके जरिए जहाजों को फ्री में गुजरना होता था, आज उसके लिए टैक्स वसूलने की धमकी दी जा रही है. कभी ईरान तो कभी अमेरिका, होर्मुज में टैक्स लेने की बात कह रहे हैं. लेकिन, इस टैक्स की मंशा को अभी तक झटका लगते हुए आ रहा है क्योंकि यह रास्ता नियम के तहत स्वतंत्र मार्ग रहा है और कोई भी इसपर अपना हक जमाकर टैक्स वसूली नहीं कर सकता.

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था. इनके हमले का जो सबसे बड़ा मुद्दा था, वह यह था कि ईरान परमाणु हथियार न बना पाए. हालांकि, जून में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका ने एक 60 दिवसीय अंतरिम युद्धविराम समझौते पर साइन किए थे. डील में ईरान की ओर से कहा गया था कि ईरान इस बात की पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार प्राप्त नहीं करेगा और न ही उनका विकास करेगा. हालांकि, डील में कई प्रमुख बातें भी थीं, लेकिन मामला अब पश्चिम एशिया और खासकर के होर्मुज को लेकर हो गया है.

अभी की स्थिति की बात करें तो ईरान और अमेरिका के बीच एक-दूसरे के खिलाफ हमले जारी हैं. इससे पश्चिम एशिया में एक बार फिर से शांति पर खतरा मंडरा रहा है. ताजा मामला ईरान के द्वारा कुवैत में हमले का है. ईरान के हमले में कुवैत में एक चीनी कंपनी को भी नुकसान हुआ है. इतना ही नहीं ईरान के द्वारा किए चीनी कंपनी पर इस अटैक में एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है.

अब सवाल यह है कि क्या पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष और युद्ध में चीन की भी एंट्री होने वाली है? इसके बारे में हम जानेंगे साथ ही हम यह भी जानेंगे कि अभी पश्चिम एशिया का हाल क्या है. शुरुआत हम होर्मुज से करेंगे.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह जब से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में युद्ध का केंद्र बना है, तब से इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तर में ईरान और दक्षिण में यूएई और ओमान हैं.

विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है.
भारत के लिए भी यह रास्ता बहुत ही खास है क्योंकि यहां से वह 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है.

अभी की स्थिति की बात करें तो यह ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष में मुख्य केंद्र बना हुआ है. दोनों देशों के बीच युद्ध की वजह से यह जहाजों के लिए काफी संवेदनशील रास्ता बना हुआ है. यहां से गुजरने वाले जहाजों और उनके नाविकों के लिए सुरक्षा को देखते हुए चिंता बनी हुई है. इस रास्ते के बाधित हो जाने से भारत समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए तेल सप्लाई पर बुरा प्रभाव पड़ने का खतरा मंडराते रहा है. इसकी वजह से तेल महंगा होने की भी संभावना है.

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चीनी कंपनी की बिल्डिंग पर ईरान का हमला- कुवैत

मिली जानकारी के अनुसार, कुवैत की मिलिट्री ने कहा कि गुरुवार सुबह उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की बिल्डिंग पर ईरान का हमला हुआ. इससे बिल्डिंग को बहुत नुकसान हुआ और एक वर्कर की मौत हो गई. यह हमला जॉर्डन के एयर डिफेंस ने ईरान से लॉन्च की गई पांच मिसाइलों को मार गिराने के कुछ घंटों बाद किया.

ये हमले तब हुए जब US मिलिट्री ने कहा कि उसने “ईरान के खिलाफ भारी हमले” पूरे कर लिए हैं, जो जॉर्डन में US बेस पर पहले हुए ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में किए गए थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के “दर्जनों” टारगेट पर हमला किया, जिसमें मिलिट्री कमांड सेंटर के साथ-साथ मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी, और कोस्टल सर्विलांस और डिफेंस साइट्स शामिल हैं. जॉर्डन की सरकारी न्यूज एजेंसी ने देश की आर्म्ड फोर्सेज के स्पोक्सपर्सन के हवाले से कहा कि मिसाइलों को रोकने में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

कई दिनों की शांत माहौल के बाद कई फ्रंट पर तनाव बढ़ने से पूरी तरह से युद्ध की वापसी का खतरा बढ़ गया है. इसने पांच महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की मुश्किल पर भी जोर दिया, जिसने दुनिया की इकॉनमी को हिलाकर रख दिया है और अमेरिकियों के बीच नापसंद है. इस लड़ाई से यह चिंता और बढ़ सकती है कि US अपने बेस और साथियों की रक्षा के लिए जरूरी एडवांस्ड हथियारों के पहले से ही कम हो चुके स्टॉक को और कम कर रहा है.

क्या अब ईरान-US युद्ध में होगी चीन की एंट्री?

न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत की मिलिट्री ने कहा कि गुरुवार सुबह उत्तरी कुवैत में एक चीनी कंपनी की बिल्डिंग पर ईरान का हमला हुआ. इससे बिल्डिंग को बहुत नुकसान हुआ और एक वर्कर की मौत हो गई. अब सवाल यह है कि क्या ईरान-यूएस युद्ध में चीन की एंट्री होगी? इसको लेकर कई जानकार बताते हैं कि दूर-दूर तक इसकी बिल्कुल भी संभावना नहीं है कि चीन इस युद्ध में सीधे और प्रत्यक्ष रूप से शामिल होगा. हां, यह जरूर कहा जा सकता है कि कुवैत में चीनी कंपनी पर हमले को लेकर वह ईरान पर थोड़ी नाराजगी जाहिर कर सकता है, लेकिन वह अमेरिका के साथ इस युद्ध में ईरान की ओर ही खड़ा है.

कई रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि चीन ही नहीं रूस भी परोक्ष रूप से ईरान का समर्थन कर रहा है. यह दावा किया गया है कि चीन, ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है. हालांकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर रूस या चीन, इस संघर्ष व युद्ध में सीधे तौर पर ईरान को समर्थन करते हैं, हथियार की आपूर्ति करते हैं या सैन्य सहायता करते हैं तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं. ट्रंप ने इसको लेकर आर्थिक प्रतिबंध की भी धमकी दी है. अगर हम चीन की आधिकारिक रुख की बात करें तो यह हमेशा से पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने का पक्षधर रहा है. वह यह कहता रहा है कि किसी भी विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश पर जोर देना चाहिए.

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अमेरिका ने ईरान पर की जवाबी कार्रवाई

जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर तेहरान के हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं. यह हमला तब हुआ जब अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ मिलकर पड़ोसी देश इराक में ईरान समर्थित मिलिशियाओं पर हमला किया, जिसमें कम से कम 20 लड़ाके और छह ईरानी सलाहकार मारे गए.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर हमले की जानकारी देते हुए बताया, “29 जुलाई को रात 10 बजे (ET), U.S. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की फोर्स ने ईरान के खिलाफ जोरदार हमले किए. ये हमले कल U.S. फोर्स पर मिसाइल से हमले की कोशिश के जवाब में किए गए थे.”

सेंट्रल कमांड ने आगे कहा, “CENTCOM ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों पर हमले किए. इनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी, तटीय निगरानी और सुरक्षा साइटें, और समुद्री क्षमताएं शामिल थीं. इन हमलों का मकसद ईरान और उसके प्रॉक्सी से अमेरिकी फोर्स, कमर्शियल शिपिंग और पड़ोसी खाड़ी देशों को होने वाले खतरे को और कम करना था.”

अमेरिकी सेना ने बताया,”28 जुलाई को, IRGC फोर्स ने मिडिल ईस्ट में मौजूद U.S. फोर्स पर अचानक हमले की कोशिश में ईरान से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. ईरान की सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया. अभी मिडिल ईस्ट में 50,000 से ज्यादा U.S. सैनिक तैनात हैं और वे पूरी तरह सतर्क, फोकस्ड, घातक और तैयार हैं.”

ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित केशम द्वीप पर हुए हमलों में दो लोग घायल हो गए और उत्तर-पश्चिम में खुजेस्तान प्रांत में भी विस्फोटों की खबर मिली है.

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सऊदी अरब पर इराकी मिलिशिया का अटैक

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने पिछले कुछ दिनों में इराकी मिलिशिया पर अपनी तेल फैसिलिटीज पर ड्रोन से हमला करने का आरोप लगाया था. इराकी मिलिशिया के एक ग्रुप ने शुरू में इन आरोपों से इनकार किया, जबकि ईरान के सपोर्ट वाले एक और ग्रुप – यमन में हूती बागियों – ने कहा कि उन्होंने एक अलग लेकिन जुड़े हुए झगड़े के हिस्से के तौर पर सऊदी एनर्जी फैसिलिटीज पर हमला किया था.

इस मामले से वाकिफ दो लोगों के मुताबिक, जिन्हें प्राइवेट मीटिंग्स के बारे में पब्लिकली कमेंट करने का अधिकार नहीं था, सऊदी डिफेंस मिनिस्टर खालिद बिन सलमान ने बुधवार को ट्रंप और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस से अलग-अलग मुलाकात की. उन्होंने कहा कि इराकी मिलिशिया के खिलाफ US हमलों में शामिल होने का सऊदी का फैसला ईरान को यह मैसेज देने के लिए था कि वह ईरान या उसके प्रॉक्सी को सऊदी तेल इंडस्ट्री और दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करते हुए बर्दाश्त नहीं करेगा. साथ ही, डिफेंस मिनिस्टर ने ट्रंप और वेंस को इस बात पर जोर दिया कि सऊदी चाहते हैं कि जंग में कमी आए और वॉशिंगटन और तेहरान बातचीत पर वापस आएं.

ताजा विवाद से पहले, मीडिएटर्स ने US और ईरान को बातचीत की टेबल पर वापस लाने को लेकर उम्मीद जताई थी. हाल के हफ्तों में होर्मुज स्ट्रेट में फिर से लड़ाई की वजह से एक अंतरिम समझौता टूट गया. होर्मुज ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक जरूरी समुद्री रास्ता है जिसे ईरानी हमलों ने फिर से बंद कर दिया है.

एक रीजनल अधिकारी ने कहा कि मीडिएटर्स शांति बहाल करने और सीजफायर को वापस पटरी पर लाने के लिए “अभी भी दोनों पक्षों के साथ कोशिश कर रहे हैं”. उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि क्या कोई प्रोग्रेस हो रही है और नाम न बताने की शर्त पर बंद कमरे में हुई डिप्लोमेसी पर बात की.

पश्चिम एशिया में युद्ध की वापसी का खतरा

कई दिनों की अपेक्षाकृत शांति के बाद विभिन्न मोर्चों पर अचानक भड़की झड़पों ने पश्चिम एशिया में पूर्ण युद्ध की वापसी का खतरा बढ़ा दिया है. इसने पांच महीने से चल रहे उस संघर्ष को समाप्त करने की कठिनाई को भी उजागर किया है जिसने विश्व अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है और अमेरिकियों के बीच अलोकप्रिय है.

इस लड़ाई से इस चिंता में भी इजाफा होने की संभावना है कि अमेरिका अपने ठिकानों और सहयोगियों की रक्षा के लिए आवश्यक गोला-बारूद के पहले से ही कम हो चुके भंडार को और कम कर रहा है.

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