Home Top News मध्य-पूर्व में भारी तनाव: जॉर्डन ने मार गिराईं ईरान की 5 बैलिस्टिक मिसाइलें, दहल उठा आसमान

मध्य-पूर्व में भारी तनाव: जॉर्डन ने मार गिराईं ईरान की 5 बैलिस्टिक मिसाइलें, दहल उठा आसमान

by Sanjay Kumar Srivastava 29 July 2026, 9:37 PM IST (Updated 29 July 2026, 9:47 PM IST)
29 July 2026, 9:37 PM IST (Updated 29 July 2026, 9:47 PM IST)
मध्य-पूर्व में भारी तनाव: जॉर्डन ने मार गिराईं ईरान की 5 बैलिस्टिक मिसाइलें, मिलिशिया के ठिकाने नेस्तनाबूद

Middle-East Tension: मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है. बुधवार तड़के ईरान द्वारा दागी गई पांच बैलिस्टिक मिसाइलों को जॉर्डन की सेना ने हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, यह हमला रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन स्थित मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस और अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड मुख्यालय को निशाना बनाकर किया था. इस हमले से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपने बलों पर ईरान के एक और बड़े हमले को नाकाम करने का दावा किया था.

अमेरिका- सऊदी अरब का संयुक्त सैन्य अभियान

क्षेत्र में बढ़ते खतरों को देखते हुए अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभियान भी चलाया. दोनों देशों ने इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए. यह कार्रवाई हाल के दिनों में सऊदी अरब पर हुए हमलों के जवाब में की गई है. ईरान समर्थित मिलिशिया ने इस बात की पुष्टि की है कि इन अमेरिकी-सऊदी हमलों में उसके 20 लड़ाके मारे गए हैं. इस ताजा सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में एक व्यापक युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है. यह लड़ाई ऐसे समय में हुई है जब मध्यस्थों का कहना था कि युद्ध खत्म करने की बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. यह युद्ध 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के साथ शुरू हुआ था.

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पेंटागन ने मांगा युद्ध का खर्चा

हालांकि दोनों पक्षों ने जून में एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इस महीने फिर से भारी बमबारी शुरू हो गई. इसकी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने पर असहमति थी. यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. ईरान ने युद्ध के दौरान इसे बंद कर दिया था. इन हमलों से एक बार फिर पता चलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस युद्ध को खत्म करना कितना मुश्किल रहा है.

इस युद्ध के कारण इस क्षेत्र से बाहर भी ईंधन और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. हाल के हफ्तों में लड़ाई के दौरान चार अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि पेंटागन ने युद्ध के बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए कांग्रेस से पैसे मांगे, जो इस मामले को लेकर पहले से ही काफी संशय में थी. फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण तेल की कीमतें बढ़ गईं. अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.1 प्रतिशत बढ़कर 84.58 डॉलर प्रति बैरल हो गई.

अमेरिका ने इराक में मिलिशिया पर किए हमले

जॉर्डन की सेना ने कहा कि पांच मिसाइलों को रोका गया और नष्ट कर दिया गया. ईरान की सरकारी आईआरएनए समाचार एजेंसी ने अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक बयान में कहा कि गार्ड के एयरोस्पेस फोर्स ने मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस और जॉर्डन में अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. कुछ घंटे पहले यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसकी सेनाएं सतर्क और उच्च स्तर की तैयारी में हैं. इराक में मिलिशिया के खिलाफ हमलों की घोषणा करते हुए अमेरिका ने चेतावनी दी कि अमेरिकी सैनिकों या सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला होता है तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

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इराक में आपातकालीन बैठक

इराकी प्रधान मंत्री अली अल जैदी ने हमलों पर चर्चा के लिए बुधवार को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई. दो इराकी सरकारी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बात की, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने के लिए अधिकृत नहीं थे. उन्होंने कहा कि अल जैदी की सऊदी अरब की यात्रा जो गुरुवार के लिए निर्धारित थी, बिना किसी अन्य तिथि निर्धारित किए स्थगित कर दी गई थी.

सऊदी अरब ने मार गिराए ड्रोन

सऊदी अरब ने कहा कि उसने लगातार दूसरे दिन इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा छोड़े गए ड्रोन को मार गिराया. वहीं, यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब की नाकेबंदी के तहत एक सऊदी तेल टैंकर को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया. सोमवार को हूथी विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने उन तेल सुविधाओं को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए, जिनका इस्तेमाल सऊदी अरब के पूर्वी इलाके से रेड सी (लाल सागर) के बंदरगाह शहर यानबू तक तेल पहुंचाने के लिए किया जाता है.

यानबू सऊदी निर्यात के लिए एक अहम रास्ता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान के नियंत्रण के कारण अन्य रास्ते बंद हो गए हैं. विद्रोहियों ने कहा कि उनका हमला सऊदी अरब के एक ड्रोन के जवाब में था, जिसने यमन के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था. ‘प्लैनेट लैब्स’ सैटेलाइट तस्वीरों में सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में स्थित सऊदी अरामको की अबकैक तेल प्रसंस्करण सुविधा को नुकसान पहुंचा हुआ दिखा. यह सुविधा दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल स्थिरीकरण संयंत्र है. इसमें प्रतिदिन लगभग 7 मिलियन बैरल कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता है.

अरामको तेल कंपनी की एक रिफाइनरी बंद

सितंबर 2019 में हूथी विद्रोहियों द्वारा अबकैक पर किए गए हमलों के कारण प्रतिदिन 5.7 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन बाधित हुआ था, जिससे वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आया. इसके अलावा, एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि सऊदी अरब के रेड सी तट पर स्थित जाज़ान में अरामको तेल कंपनी की एक रिफाइनरी को शनिवार को हूथी हमले में हुए नुकसान के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है.

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अधिकारी ने नुकसान को काफी बड़ा बताया और कहा कि इसकी मरम्मत में कई दिन लगेंगे. यह रिफाइनरी प्रतिदिन 400,000 बैरल तेल का उत्पादन करती है. टेक्सास स्थित IIR एनर्जी कंसल्टेंसी एजेंसी ने कहा कि जाज़ान तेल प्रसंस्करण सुविधा, जो हमले के बाद से कम क्षमता पर चल रही थी, सोमवार को पूरी तरह बंद हो गई. IIR एनर्जी के अनुसार, रिफाइनरी की मरम्मत और उसे फिर से शुरू करने का काम 15 अगस्त तक होने की उम्मीद है.

ओमान के प्रस्ताव को किया खारिज

होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस टकराव का एक मुख्य केंद्र रहा है. ईरान के उपविदेश मंत्री ने कहा कि उनके देश ने ओमान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें इस अहम जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों के ट्रैफ़िक को संयुक्त रूप से संभालने की बात कही गई थी. ओमान इस जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है. मंगलवार रात ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर प्रसारित एक इंटरव्यू में काज़ेम ग़रीबाबादी ने बताया कि ओमान के प्रस्ताव में जलडमरूमध्य को दो रास्तों में बांटने की बात थी, ताकि हर रास्ते से जलमार्ग से गुज़रने वाले 50 प्रतिशत जहाज़ आ-जा सकें.

उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव तेहरान की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहा. इसके जवाब में ईरान ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें ईरान के समुद्री क्षेत्र से जहाज़ों के गुज़रने के लिए एक अस्थायी योजना शामिल थी. उन्होंने आगे कहा कि ईरान की नीति यह है कि जलडमरूमध्य की स्थिति कभी भी युद्ध-पूर्व वाली स्थिति में न लौटे. टकराव से पहले जहाज़ इस जलमार्ग से बिना किसी रोक-टोक के गुज़रते थे.

सऊदी अरब देगा हमले का जवाब

US सेंट्रल कमांड ने कहा कि पिछले 72 घंटों में IRGC (ईरान की पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड) के निर्देश पर हुए 30 से ज़्यादा हवाई ड्रोन हमलों के जवाब में US और सऊदी लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में कई आतंकवादी लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों पर हमले किए. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इन हमलों की बात मानी और चेतावनी दी कि देश तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का जवाब ज़रूर देगा. ‘पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़’ (PMF), जो मुख्य रूप से शिया और ईरान समर्थित हथियारबंद समूहों का गठबंधन है और आधिकारिक तौर पर इराकी सेना के कमांड में है, ने कहा कि रात भर चले इन हमलों में 20 लड़ाके मारे गए और 32 गंभीर घायल हो गए.

मित्र देशों पर हमले के लिए रास्ता नहीं देगा इराक

पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ (PMF) में शामिल समूहों ने 2014 में इस्लामिक स्टेट समूह द्वारा इराक के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा करने के बाद उसके खिलाफ लड़ाई में हिस्सा लिया था. 2016 में इराकी सरकार ने PMF को इराकी सशस्त्र बलों के भीतर एक स्वतंत्र सैन्य इकाई का दर्जा दिया, लेकिन असल में इसके सदस्य मिलिशिया काफी हद तक आज़ादी से काम करते हैं. कुछ ने US ठिकानों पर हमले भी किए हैं.

इराकी सेना ने कहा कि देश इराकी ज़मीन का इस्तेमाल मित्र देशों पर हमले के लिए रास्ता या लॉन्चिंग पॉइंट के तौर पर होने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है.इराकी मिलिशिया ने ड्रोन हमलों में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है. ईरान समर्थित हथियारबंद समूहों के एक बड़े संगठन ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक’ ने सऊदी दावों को मनगढ़ंत बताया और कहा कि सोमवार के हमले हूतियों ने किए थे, जिन्होंने खुद सऊदी तेल ठिकानों पर हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.

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