Home Latest News & Updates चर्चित जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद बड़ा फैसला: पूर्व CM के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद, पहुंचे सलाखों के पीछे

चर्चित जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद बड़ा फैसला: पूर्व CM के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद, पहुंचे सलाखों के पीछे

by Sanjay Kumar Srivastava
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चर्चित जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद बड़ा फैसला: पूर्व सीएम के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद

Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2003 में चर्चित एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2003 में चर्चित एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के मामले में सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस फैसले के बाद सूबे में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.अमित जोगी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष हैं. हाईकोर्ट के इस निर्णय ने 31 मई 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है. उस समय ट्रायल कोर्ट के स्पेशल जज रायपुर ने अमित जोगी को बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले को दोबारा खोला गया था. इसके बाद ही हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपना निर्णय दिया.

हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी

आदेश में कहा गया है कि हमारा मानना ​​है कि आरोपी अमित जोगी को बरी करने वाले ट्रायल जज द्वारा दिया गया फैसला स्पष्ट रूप से अवैध, गलत, विकृत, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सबूतों के विपरीत और बिना किसी ठोस आधार के है. उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि अमित जोगी को बरी करने के संबंध में ट्रायल कोर्ट में 2007 का पारित आदेश अस्थिर होने के कारण रद्द किया जाता है. हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अमित जोगी को आईपीसी की धारा 120-बी के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 302 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

1,000 रुपये का जुर्माना भी

हाईकोर्ट ने उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. जुर्माने का भुगतान न करने पर अमित जोगी को परिणामस्वरूप छह महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता जग्गी की 4 जून 2003 को हत्या कर दी गई थी, जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे. मामले की शुरुआत में राज्य पुलिस ने जांच की थी और बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दिया गया. सीबीआई ने जांच के दौरान अमित जोगी सहित कई आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. 31 मई 2007 को, रायपुर की एक ट्रायल कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है.

ट्रायल कोर्ट ने कर दिया था बरी

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया. बाद में सीबीआई ने बरी करने के फैसले को चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने देरी के आधार पर 2011 में उसकी याचिका खारिज कर दी. छत्तीसगढ़ सरकार और मृतक के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग अपीलें भी खारिज कर दी गईं.पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर नए सिरे से विचार करने के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हाईकोर्ट ने पिछले महीने मामले में कार्यवाही फिर से शुरू की थी.

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News Source: PTI

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