National Herald Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है. ईडी का तर्क है कि निजी शिकायत पर कोर्ट द्वारा लिया गया संज्ञान , पुलिस FIR से अधिक विश्वसनीय है.
National Herald Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है. ईडी का तर्क है कि निजी शिकायत पर कोर्ट द्वारा लिया गया संज्ञान , पुलिस FIR से अधिक विश्वसनीय है. एजेंसी के अनुसार, गंभीर आरोपों को तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए. दिल्ली उच्च न्यायालय सोमवार (20 अप्रैल) को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की याचिका पर सुनवाई करेगा.
सोनिया-राहुल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अर्जी पर विचार करेगी, जिसने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था. निचली अदालत ने ED की शिकायत को कानूनी रूप से अस्वीकार्य बताया था क्योंकि यह किसी मौजूदा एफआईआर पर आधारित नहीं थी. इससे पहले हाईकोर्ट ने गांधी परिवार, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन सहित अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब मांगा था. ED ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ-साथ दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के साथ-साथ सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन पर साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है.
गांधी परिवार के पास यंग इंडियन के 76 प्रतिशत शेयर
यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से संबंधित लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की, जो नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करती थी. इसमें आगे आरोप लगाया गया कि गांधी परिवार के पास यंग इंडियन के 76 प्रतिशत शेयर थे, जिन्होंने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले में एजेएल की संपत्ति को धोखाधड़ी से हड़प लिया. 19 फरवरी को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ईडी के लिए पेश हुए और तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने से इनकार करने के लिए दिए गए कारण स्पष्ट नहीं थे. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि कानून के आधार पर बहस होनी चाहिए.
एजेंसी की जांच एक निजी शिकायत परः निचली अदालत
अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच और परिणामी अभियोजन शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम में उल्लिखित अपराध के लिए एफआईआर की अनुपस्थिति में सुनवाई योग्य नहीं थी. निचली अदालत ने कहा कि ED की जांच एक निजी शिकायत पर आधारित है. एफआईआर और 2014 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा की गई शिकायत और परिणामी समन आदेश प्राप्त होने के बावजूद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपराध के संबंध में एफआईआर दर्ज करने से परहेज किया. ईडी ने उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में दावा किया है कि ट्रायल कोर्ट के आदेश ने वास्तव में मनी लॉन्ड्रर्स की एक श्रेणी को केवल इस आधार पर हॉल पास दे दिया है कि अपराध की सूचना एक व्यक्ति ने मजिस्ट्रेट को शिकायत के माध्यम से दी है.
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News Source: PTI
