Home Top News इलाहाबाद HC का UP सरकार को निर्देश: जूनियर की गलतियों के लिए सीनियर अफसर भी होंगे जिम्मेदार

इलाहाबाद HC का UP सरकार को निर्देश: जूनियर की गलतियों के लिए सीनियर अफसर भी होंगे जिम्मेदार

by Sanjay Kumar Srivastava 5 June 2026, 12:50 PM IST (Updated 5 June 2026, 4:33 PM IST)
5 June 2026, 12:50 PM IST (Updated 5 June 2026, 4:33 PM IST)
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी सरकार को निर्देश: जूनियर की गलतियों के लिए सीनियर अधिकारी भी होंगे जिम्मेदार

High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रशासनिक सुधारों के लिए उच्च जिम्मेदारी के सिद्धांत को अपनाने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विभागों या अधीनस्थों की गलतियों के लिए वरिष्ठ नौकरशाहों और शीर्ष प्रशासनिक प्रमुखों को जवाबदेह और आपराधिक रूप से उत्तरदायी ठहराने का आग्रह किया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करना वरिष्ठ अधिकारियों की पेशेवर जिम्मेदारी है. इसके साथ ही मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वह इस फैसले को मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत समीक्षा में पेश करें. साथ ही अदालत की चिंताओं से उन्हें अवगत कराएं.

जांच में दो दशक की देरी पर सुनवाई

याचिकाकर्ता अवनेश कुमार अग्रवाल ने बरेली की एक विशेष अदालत द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके खिलाफ दो आपराधिक मामलों के कारण एनओसी रोक दी गई थी, जिनमें से एक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा था. एक मामले में जांच लगभग दो दशकों से लंबित है और दूसरे में आरोप पत्र 18 साल की देरी के बाद 2024 में प्रस्तुत किया गया था.

3 जून के अपने आदेश में अदालत ने मनीष कुमार सिंह बनाम यूपी राज्य मामले में उच्च न्यायालय के 2023 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें राज्य सरकार को भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों में सरकारी विभागों द्वारा दर्ज एफआईआर की जांच की निगरानी के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने का निर्देश दिया गया था. उस मामले में अन्य निर्देश जारी करने के अलावा खंडपीठ ने निर्देश दिया कि जांच को चरणबद्ध तरीके से शीघ्रता से पूरा किया जाए.

नौकरशाही की मंशा पर कोर्ट ने उठाया सवाल

अदालत को पता चला कि 2023 के फैसले के बाद समिति का गठन दिसंबर 2025 में किया गया था, जिसे अदालत ने वर्तमान कार्यवाही के दौरान नोट किया था. अदालत ने तब कहा कि अदालत द्वारा जारी निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण बाधा नौकरशाही के कुछ वर्गों की मानसिकता में निहित है, जिनका दृष्टिकोण साफ नहीं है. अदालत ने कहा कि यह कार्यशैली मुख्य रूप से सार्वजनिक प्रशासन में लालफीताशाही को प्रेरित करता है. स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को याद दिलाया कि मुख्य सचिव राज्य प्रशासन की धुरी हैं, जिन्हें उनका प्रतिनिधित्व करने वालों से असाधारण सतर्कता की आवश्यकता होती है.

अदालत ने कहा कि अतिरिक्त महाधिवक्ता को इस बात की सराहना करनी चाहिए कि मुख्य सचिव कैबिनेट और मंत्रिपरिषद के सचिव के रूप में कार्य करते हैं और उस क्षमता में नागरिक प्रशासन, नीति कार्यान्वयन और अंतर विभागीय समन्वय के सभी मामलों पर मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रमुख सलाहकार के रूप में भी कार्य करते हैं. यह एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त पद पर है.

अदालत ने कहा कि इसलिए यह जरूरी है कि कानून अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय असाधारण सतर्कता, सावधानी और संस्थागत जिम्मेदारी की ऊंची भावना के साथ आचरण करें. नतीजतन, पीठ ने अपने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को फैसले की एक प्रति तुरंत उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए बरेली में क्षेत्रीय पासपोर्ट प्राधिकरण को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार याचिकाकर्ता के लिए पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकृत करने का आदेश दिया.

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News Source: PTI

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