Chocolate History in India: अगर कोई ऐसी चीज है जिसे बच्चे, यंगस्टर्स और बड़े-बूढ़े, सभी बिना किसी झिझक के पसंद करते हैं, तो वो है चॉकलेट. दुनिया में ज्यादातर लोगों को चॉकलेट खाना या उससे बनी चीजें खाना खूब पसंद होता है. स्कूल में अच्छे नंबर आने पर मिली पहली चॉकलेट, बर्थडे के केक की मीठी चॉकलेट लेयर, दादा-दादी के हाथों मिला छोटा सा चॉकलेट गिफ्ट या फिर त्योहारों पर मिलने वाला चॉकलेट गिफ्ट बॉक्स, हर किसी की यादों में चॉकलेट का अपने लिए एक खास जगह रखती है. आज चॉकलेट सिर्फ एक मीठा स्नैक नहीं रही, बल्कि ये इंडियन खानपान और मिठाइयों का भी अहम हिस्सा बन चुकी है. गणेश चतुर्थी पर चॉकलेट मोदक, दिवाली पर चॉकलेट बर्फी, शादी-ब्याह में चॉकलेट लड्डू और बेकरी में चॉकलेट गुलाब जामुन जैसी मिठाइयां, इसकी बढ़ती पॉपुलैरिटी की गवाह हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों किलोमीटर दूर पैदा हुई चॉकलेट आखिर भारत तक कैसे पहुंची और यहां की पारंपरिक मिठाइयों में कैसे घुल-मिल गई? दरअसल, इसके पीछे की कहानी काफी ज्यादा दिलचस्प है. कभी राजाओं की पसंद और विदेशी लग्जरी मानी जाने वाली चॉकलेट आज भारतीय त्योहारों, मिठाइयों और हर छोटे-बड़े जश्न का हिस्सा बन चुकी है. ऐसे में आज चॉकलेट के भारत पहुंचने और यहां के स्वाद में घुल-मिल जाने की दिलचस्प कहानी जानते हैं.
3,000 साल पुरानी कहानी
चॉकलेट की शुरुआत आज से लगभग 3,000 साल पहले सेंट्रल अमेरिका में हुई थी. उस टाइम वहां रहने वाली माया और एजटेक सिविलाइजेशन कोको के बीजों से एक खास तरह की कड़वी ड्रिंक तैयार किया करती थीं. हैरानी की बात है कि, उस दौर में चॉकलेट वैसी बिल्कुल नहीं थी जैसी आज हमें मार्केट में मिलती है. सदियों पहले कोको को बहुत ही कीमती और पवित्र माना जाता था. तब धार्मिक रिचुअल्स, खास प्रोग्रामों और रॉयल फैमिलीज के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जाता था. कई जगहों पर तो कोको के बीज मुद्रा यानी पैसे की तरह भी इस्तेमाल किए जाते थे.

यूरोप में बदला स्वाद
टाइम के साथ यूरोपीय व्यापारी समुद्री रास्तों से कोको को अपने देशों में ले गए. इसके बाद वहां चॉकलेट बनाने की टेक्निक में लगातार सुधार होता रहा. इसमें चीनी, दूध और बाकी चीज़ें मिलाई गई, जिससे कोको का स्वाद मीठा भी हुआ और सॉफ्ट भी हुआ. फिर 19वीं सदी तक आते-आते फैक्ट्रियों में बड़े लेवल पर चॉकलेट बनने लगी. फिर यही वो दौर शुरू हुआ था, जब चॉकलेट बार, कैंडी और बाकी चॉकलेट फ्रोडक्ट्स दुनिया भर में पॉपुलर होने लगे.
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ब्रिटिश काल में पहुंची भारत
भारत में चॉकलेट की एंट्री ब्रिटिश शासन के दौरान हुई. उस टाइम ये विदेशी और महंगी चीज मानी जाती थी. शुरुआत में तो सिर्फ अंग्रेज परिवारों, बड़े शहरों के अमीर लोगों और यूरोपीय खानपान पसंद करने वाले लोगों तक ही इसकी पहुंच हुआ करती थी. आम भारतीय परिवारों के लिए चॉकलेट किसी लग्जरी से कम नहीं थी. इसलिए लंबे टाइम तक ये सिर्फ खास मौकों या कुछ ही लोगों के लिए लिमिटेड रही.
1948 ने बदली तस्वीर
भारत में चॉकलेट की पॉपुलैरिटी का सबसे बड़ा मोड़ 1948 में आया. तब कैडबरी ने भारतीय मार्केट में अपना कदम रखा. कंपनी ने अलग-अलग कीमतों में लोगों के लिए चॉकलेट अवेलेबल कराई. अट्रैक्टिव एडवरटाइजिंग कैंपेन चलाए और त्योहारों, गिफ्ट कल्चर के साथ चॉकलेट को एड करना शुरू किया. धीरे-धीरे चॉकलेट सिर्फ बच्चों की पसंद नहीं रही, बल्कि हर उम्र के लोगों की फेवरेट मिठास बन गई. आज जन्मदिन, त्योहार, रिजल्ट, प्रमोशन या किसी भी खुशी के मौके पर चॉकलेट गिफ्ट करना बहुत ही आम सी बात हो गई है.

भारत में भी होने लगी कोको
जैसे-जैसे चॉकलेट की डिमांड भारत में बढ़ी, वैसे-वैसे यहां भी लोगों ने कोको की खेती पर भी फोकस करना शुरू कर दिया. साइंटिस्ट्स और एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स ने पाया कि केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य कोको की खेती के लिए बढ़िया हैं. वहां का गर्म और नमी वाला क्लाइमेट कोको की खेती के लिए काफी बढ़िया है. फिर 1960 के दशक से किसानों को कोको की खेती करने के लिए खूब बढ़ावा दिया जाने लगा. इसके बाद देश में लोकल लेवल पर कोको का प्रोडक्शन बढ़ा और भारतीय चॉकलेट बिजनेस को मजबूती मिलने लगी. आज भारत में कई कंपनियां भारतीय किसानों से कोको खरीदकर देश में ही बेहतरीन क्वालिटी की चॉकलेट तैयार कर रही हैं.
चॉकलेट ने बदला मिठाइ का स्वाद
भारत की सबसे बड़ी खासियत ये रही है कि यहां हर नई चीज को अपने स्वाद और कल्चर के हिसाब से अपना लिया जाता है. चॉकलेट के साथ भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ. शुरुआत में चॉकलेट का इस्तेमाल सिर्फ केक, पेस्ट्री और बिस्किट बनाने के लिए ही किया जाता था. फिर धीरे-धीरे मिठाई बनाने वाले कारीगरों ने इसे ट्रेडिशनल इंडियन मिठाइयों के साथ मिलाकर नए-नए एक्सपेरिमेंट्स करने शुरू किए. खोया, नारियल, घी, काजू, बादाम और पिस्ता जैसी देसी चीज़ों में लोगों ने चॉकलेट का स्वाद मिलाना शुरू कर दिया. रिजल्ट ये निकला कि भारतीय मिठाइयों का एक बिल्कुल नया और मॉर्डन रूप सामने आया.
चॉकलेट मिठाई
अगर आज किसी मिठाई की दुकान पर जाएं तो आपको चॉकलेट से बनी कई तरह की मिठाइयां आसानी से मिल जाएंगी. चॉकलेट से बनी मिठाइयों में चॉकलेट बर्फी, चॉकलेट पेड़ा, चॉकलेट लड्डू, चॉकलेट मोदक, चॉकलेट संदेश, चॉकलेट गुलाब जामुन, चॉकलेट रसगुल्ला, चॉकलेट केक और ब्राउनी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. खास बात ये है कि अब दीवाली, रक्षाबंधन, भाई दूज, बर्थडे, शादी और कॉरपोरेट गिफ्टिंग में भी चॉकलेट से बनी मिठाइयों की डिमांड लगातार बढ़ रही है. ट्रेडिशनल मिठाइयों के साथ चॉकलेट का ये फ्यूजन सिर्फ भारत के लोगों को ही नहीं, बल्कि विदेशियों को भी खूब पसंद आ रहा है.

चॉकलेट इंडस्ट्री
पिछले कुछ सालों में भारत में ‘बीन-टू-बार’ चॉकलेट बनाने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ा है. इसका मतलब है कि कई छोटे और बड़े ब्रांड सीधे किसानों से कोको खरीदकर उसी से प्रीमियम चॉकलेट तैयार कर रहे हैं. ये कंपनियां भारतीय कोको की खास खुशबू और स्वाद को दुनिया के सामने पेश कर रही हैं. इससे किसानों को बेहतर आमदनी मिलने के साथ-साथ भारत की पहचान एक उभरते हुए चॉकलेट उत्पादक देश की तरह भी स्ट्रॉन्ग हो रही है.
भारत का चॉकलेट टाउन
भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जो अपनी नेचुरल ब्यूटी, हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स या टेस्टी फूड के लिए जानी जाती हैं. लेकिन अगर किसी हिल स्टेशन की पहचान वहां बनने वाली चॉकलेट्स से हो, तो बात कुछ अलग ही हो जाती है. दरअसल, तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ों के बीच बसा खूबसूरत शहर ऊटी ऐसा ही एक टूरिस्ट प्लेस है. इसे प्यार से ‘भारत का चॉकलेट टाउन’ भी कहा जाता है. ऊटी घूमने आने वाले ज्यादातर टूरिस्ट यहां की वादियों, चाय के बागानों और ठंडी हवाओं का मज़ा लेने के साथ-साथ यहां की मशहूर होममेड चॉकलेट्स खरीदना बिल्कुल नहीं भूलते. यही वजह है कि सालों से ये शहर अपनी मीठी पहचान के लिए भी खास माना जाता है.
कैसे बनी पहचान?
ऊटी का चॉकलेट से रिश्ता किसी बड़ी कंपनी की वजह से नहीं बना. दरअसल, इसकी शुरुआत तब हुई जब यहां के लोकल लोगों ने अपने-अपने घरों में चॉकलेट बनानी शुरू की. यहां के लोग ताजा दूध, क्रीम और अच्छी क्वालिटी की चीज़ों का इस्तेमाल करके हाथों से चॉकलेट तैयार करते थे. धीरे-धीरे यहां आने वाले टूरिस्ट इन चॉकलेट्स को अपने साथ यादगार गिफ्ट की तरह ले जाने लगे. एक-दूसरे से मिली तारीफों ने ऊटी की चॉकलेट्स को नई पहचान दिलाई. फिर टाइम के साथ यहां चॉकलेट की छोटी-छोटी दुकानों की संख्या भी बढ़ती चली गई. आज सिचुएशन ये है कि ऊटी से लौटते टाइम शायद ही कोई टूरिस्ट ऐसा हो, जिसके बैग में होममेड चॉकलेट्स का एक डिब्बा न हो.

ऊटी का मौसम
ऊटी की सबसे बड़ी खासियत इसका सालभर रहने वाला ठंडा और बढ़िया मौसम है. यहां टेंपरेचर बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता, इसलिए चॉकलेट्स को सेफ रखने के लिए ज्यादा रेफ्रिजरेशन की जरूरत नहीं पड़ती. यही मौसम लोकल चॉकलेट मेकर्स को अलग-अलग फ्लेवर के साथ नए एक्सपेरिमेंट करने का मौका भी देता है. इसके अलावा नीलगिरि डेयरी फार्मिंग के लिए भी जाना जाता है. इससे यहां आसानी से ताजा दूध और क्रीम मिल जाती है. यही वजह है कि यहां की चॉकलेट्स का स्वाद काफी रिच और क्रीमी होता है.
ढेरों ऑप्शन
ऊटी की चॉकलेट्स सिर्फ मिल्क चॉकलेट तक लिमिटेड नहीं हैं. यहां आपको कई शानदार फ्लेवर मिल जाएंगे, जैसे- डार्क चॉकलेट, फ्रूट एंड नट चॉकलेट, ट्रफल्स, प्रालिन, ड्राई फ्रूट चॉकलेट, कॉफी फ्लेवर, ऑरेंज और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर और रम फ्लेवर चॉकलेट. यहां के दुकानदार भी बड़े प्यार से हर फ्लेवर के बारे में बताते हैं और चॉकलेट को सही तरीके से रखने की जानकारी भी देते हैं. ऐसे में अगर आप ऐसी जगह ढूंढ़ रहे हैं, जहां खूबसूरत नजारों के साथ टेस्टी होममेड चॉकलेट्स का भी मज़ा मिल सके, तो ऊटी आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है.
भारत की मीठी कहानी
करीब 3,000 साल पहले मिडिल अमेरिका के जंगलों से शुरू हुई चॉकलेट की जर्नी आज भारत की रसोई और मिठाइयों तक पहुंच चुकी है. कभी विदेशी और महंगी मानी जाने वाली चॉकलेट अब हर घर, हर त्योहार और हर सेलिब्रेशन का हिस्सा बन गई है. यही वजह है कि आज चॉकलेट सिर्फ बच्चों की पसंद नहीं, बल्कि भारतीय मिठाइयों की नई पहचान भी बन चुकी है. चॉकलेट बर्फी हो, मोदक हो या फिर लड्डू, ये मीठा स्वाद अब इंडियन कल्चर में पूरी तरह घुल-मिल चुका है. शायद यही वजह है कि चॉकलेट अब सिर्फ एक विदेशी मिठाई नहीं, बल्कि भारत की अपनी मीठी कहानी का भी मेन कैरेक्टर बन चुकी है.
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