Adda Embroidery: फैशन वर्ड्स में स्टाइल बदलता रहता है. नए ट्रेंड आते हैं, पुराने गायब हो जाते हैं, लेकिन कुछ आर्ट्स कभी पुरानी नहीं पड़तीं. अड्डा एम्ब्रॉयडरी भी ऐसी ही एक खूबसूरत आर्ट है. इसने सालों से अपनी खास पहचान बनाए रखी है. ये सिर्फ कपड़ों पर की जाने वाली कढ़ाई नहीं, बल्कि इंडियन हैंडीक्राफ्ट और बारीक मेहनत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है.
नाम का असर
अड्डा एम्ब्रॉयडरी का नाम उस लकड़ी के फ्रेम यानी ‘अड्डा’ से पड़ा है, जिस पर कपड़े को कसकर बांधा जाता है. इसके बाद कारीगर घंटों और कई बार महीनों तक बैठकर बारीकी से कढ़ाई करते हैं. इस आर्ट में जरी, रेशम के धागे, पर्ल, सीक्विन और बीड्स का इस्तेमाल किया जाता है. हर डिज़ाइन में कारीगर की मेहनत और एक्सपीरियंस साफ नजर आता है.

हाथों का काम
वैसे भी, किसी भी कपड़े की असली कीमत उसकी चमक या डिजाइन से नहीं, बल्कि उसे बनाने वाले हाथों की मेहनत से तय होती है. आज के टाइम में लोग सिर्फ कपड़े नहीं खरीद रहे, बल्कि उसके पीछे छिपी आर्ट, कल्चर और असली हैंडीक्राफ्ट को भी देख रहे हैं. यही वजह है कि अड्डा एम्ब्रॉयडरी आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है.
खासियत
इस आर्ट की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कोई भी दो कारीगर एक जैसी कढ़ाई नहीं कर सकते. हर हाथ का अपना अलग अंदाज होता है, जिससे हर आउटफिट अपने आप में यूनिक बन जाता है. यही खासियत मशीन से बने कपड़ों और हाथ से तैयार किए गए कपड़ों के बीच बड़ा अंतर पैदा करती है.
राजघरानों की पहचान
पहले अड्डा एम्ब्रॉयडरी राजघरानों और शाही आउटफिट्स में यूज होती थी. टाइम के साथ ये आर्ट शादी-ब्याह के कपड़ों का अहम हिस्सा बन गई. आज भी दुल्हन के लहंगे, साड़ी और दुपट्टे पर की गई खूबसूरत अड्डा कढ़ाई पूरे लुक को रॉयल बना देती है. कई बार एक ब्राइडल आउटफिट तैयार करने में महीनों लग जाते हैं. यही वजह है कि ऐसे कपड़े पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार की धरोहर बनकर संभाले जाते हैं.

ब्राइडल फैशन से आगे
हालांकि, अब ये आर्ट सिर्फ ब्राइडल फैशन तक नहीं रही. बदलते फैशन के साथ अड्डा एम्ब्रॉयडरी ने भी खुद को नए अंदाज में ढाल लिया है. आज जैकेट, को-ऑर्ड सेट, गाउन, इंडो-वेस्टर्न आउटफिट और मॉडर्न ड्रेसेज में भी इसकी खूबसूरत कारीगरी देखने को मिलती है. जंग जेनेरेशन भी ऐसे कपड़ों को पसंद कर रही है जिनमें ट्रेडिशनल आर्ट और मॉर्डन डिजाइन एक साथ हो. वैसे भी आज का कस्टमर ये जानना चाहता हैं कि, उनके कपड़े किसने बनाए, किस टेक्निक से तैयार हुए और उनके पीछे कौन सी कहानी जुड़ी हुई है. ऐसे में अड्डा एम्ब्रॉयडरी सिर्फ एक डिजाइन नहीं, बल्कि कारीगरों की मेहनत, उनके परिवारों की विरासत और भारतीय कल्चर से जुड़ने का एक जरिया बन गई है.
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