Indian Fashion: अब विदेशी फैशन पर अपनी मिट्टी की खुशबू काफी भारी पड़ रही है. दरअसल, कांजीवरम और कोल्हापुरी का ट्रेंड देखकर अब हर किसी को यकीन हो चुका है कि दादी के संदूक वाला फैशन लौट आया है.
16 April, 2026
हाथ से बुनी सूती साड़ी की वो शान, कलाई पर खनकती ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर चूड़ियां और राजस्थान की सुनहरी धूप में सूखते ब्लॉक प्रिंट वाले दुपट्टे, इन सबमें एक अलग ही मैजिक है. दशकों तक हम भारतीयों ने इस जादू को किनारे रखकर वेस्टर्न कपड़ों, फास्ट फैशन और यूरोपीय रनवे के ट्रेंड्स को फॉलो किया. लेकिन अब हवा का रुख बदल रहा है. कुछ पुराना, कुछ अपना वापस लौट रहा है और ये वापसी किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरे गर्व के साथ घर वापसी की तरह हो रही है. दरअसल, अब भारत अपने फैशन को फिर से ढूंढ़ रहा है. ये बदलाव म्यूजियम की गैलरी या दादी के संदूक तक नहीं रहा, बल्कि ये इंस्टाग्राम रील्स, फिल्म प्रीमियर, बड़े स्टार्स की शादियों और यहां तक कि मॉर्डन स्टार्टअप ऑफिसेस में भी नजर आ रहा है. कहा जा सकता है कि आज के दौर में भारत के सबसे स्टाइलिश लोग वही हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं.

जब लोगों ने मुड़कर देखा
कल्चरल चेंज रातों-रात नहीं आते, लेकिन कुछ पल ऐसे होते हैं जो सब कुछ क्लियर कर देते हैं. साल 2025 में जब रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा जैसे पैन-इंडिया स्टार्स ने शादी की, तो उन्होंने अपने ट्रेडिशनल को चुना. रश्मिका की कांजीवरम साड़ी और विजय की क्लासिक धोती ने दुनिया को मैसेज दिया कि अपनी जड़ें कोई समझौता नहीं, बल्कि सबसे प्यारी डेस्टिनेशन हैं. इस शादी के 48 घंटों के अंदर इंटरनेट पर ट्रेडिशनल साउथ इंडियन कपड़ों और जूलरी की सर्च ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. यही नहीं, जब आलिया भट्ट सब्यसाची की साड़ी में ग्लोबल इवेंट्स पर दिखती हैं या दीपिका पादुकोण कान्स के रेड कार्पेट पर साड़ी का जलवा बिखेरती हैं, तो वो सिर्फ कपड़े नहीं पहनतीं, बल्कि एक स्टेटमेंट देती हैं. इंडियन सेलिब्रिटीज अब दुनिया को खुश करने के लिए वेस्टर्न कपड़े नहीं पहन रहे, बल्कि दुनिया को अपने ट्रेडिशनल का दीवाना बना रहे हैं.

क्यों आया बदलाव?
इस बदलाव के पीछे कई वजहें हैं. कोविड 19 के दौरान जब हम सब घरों में बंद थे, तब हमने बाहरी दिखावे के बजाय खुद के कंफर्ट को चुना. लोगों ने फील किया कि एक सिल्क या सूती कुर्ते में जो सुकून है, वो विदेशी ब्रांड्स में नहीं. इसी बीच, नए इंडियन फैशन डिजाइनर्स भारतीय कढ़ाई और बुनाई को नए रंग और रूप में पेश कर रहे हैं. उन्होंने इन ट्रेडिशनल आर्ट को कूल और मॉडर्न बना दिया. साथ ही, आज पूरी दुनिया जब सस्टेनेबल फैशन की बात कर रही है, तो भारत का प्राचीन हाथ से बुना और नेचुरल कलर्स वाला फैशन इसका सबसे परफेक्ट जवाब बनकर सामना आया है. यानी जिसे हम भारतीय सदियों से ट्रेडिशन कह रहे थे, आज दुनिया उसे फ्यूचर फैशन मान रही है.

देसी ट्रेंड्स
अब साड़ी का मतलब सिर्फ एक स्टाइल नहीं रह गया. आज की लड़कियां आंध्र की ‘निवी’, महाराष्ट्र की ‘नौवारी’ और बंगाल की ‘आतपौरे’ स्टाइल को फिर से अपना रही हैं. इसके अलावा कमरबंद का ट्रेंड भी वापस लौट चुका है. कभी सिर्फ दुल्हनों या डांसर्स तक सीमित रहने वाला कमरबंद अब एक स्टेटमेंट एक्सेसरी बन गया है. इसे साड़ियों, लहंगों और यहां तक कि इंडो-वेस्टर्न कपड़ों के साथ भी स्टाइल किया जा रहा है. इतना ही नहीं, कोल्हापुरी चप्पलों का जलवा भी खूब छाया हुआ है. गांव के कारीगरों से शुरू हुई कोल्हापुरी चप्पलें अब ग्लोबल फैशन वीक्स तक पहुंच गई हैं. चाहे जींस हो या साड़ी, ये हर लुक को परफेक्ट बना देती हैं.

ब्लॉक प्रिंट
अजरख और ब्लॉक प्रिंट की डिमांड तो बढ़ती ही जा रही है. कच्छ की पुरानी अजरख छपाई और सांगानेरी ब्लॉक प्रिंट आज सबसे ज्यादा डिमांड में हैं. इसके डार्क ब्लू और रेड कलर के पैटर्न हर किसी की पसंद बने हुए हैं. वहीं, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी के भी क्या कहने? कभी इसे सोने-चांदी के मुकाबले काफी कम समझा जाता था, लेकिन आज ये आर्ट लवर्स की पहली पसंद है. हाथ से बने कुर्ते और सूती साड़ियों के साथ एक हैवी ऑक्सीडाइज्ड चोकर या झुमके आपके पूरे लुक में जान डाल देते हैं. कहने का मतलब ये है कि चाहे चंदेरी हो, पोचंपल्ली इकत या गांधी जी का फेवरेट खादी, आज यंगस्टर्स इन कपड़ों को गर्व से पहन रहे हैं. साथ ही पुराने फैशन को भी खुशी से फ्लॉन्ट कर रहे हैं.
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