Home Latest News & Updates हर साल सड़क हादसों की शिकार हो रही 11 लाख जिंदगियां, भारत में सबसे अधिक घटनाएं! चौंका देंगे ये आंकड़े

हर साल सड़क हादसों की शिकार हो रही 11 लाख जिंदगियां, भारत में सबसे अधिक घटनाएं! चौंका देंगे ये आंकड़े

by Amit Dubey 30 June 2026, 4:42 PM IST (Updated 30 June 2026, 4:45 PM IST)
30 June 2026, 4:42 PM IST (Updated 30 June 2026, 4:45 PM IST)
Road Accidents Data

Road Accidents Data: हमारे देश भारत में अच्छी-अच्छी सड़कें बन रही हैं. देश के किसी भी कोने में आप चले जाइए, वहां आपको सड़कें दिख जाएंगी. बीते कुछ वर्षों में भारत में कई ऐसे एक्सप्रेसवे भी बने हैं, जिन्होंने यात्रा के लिए पहले लगने वाले अधिक समय को काफी कम कर दिया है.

उदाहरण के लिए हाल ही में दिल्ली से देहरादून के लिए बनाए गए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को ही ले लीजिए. पहले राजधानी दिल्ली से देहरादून जाने के लिए करीब 6 घंटे का वक्त लगता था, अब इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से यह समय घटकर करीब ढाई घंटे का हो चुका है. देश में फैलते सड़कों के जाल एक ओर जहां लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ा रहा हैं, वहीं दूसरी और आय दिन इनपर हो रहे सड़क हादसे काफी चिंता वाले विषय बन चुके हैं.

इस बीच जब नजर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों पर पड़ती है तो दुनिया समेत भारत में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं हैरान कर देती हैं. मई 2026 के WHO आंकड़ों के अनुसार, विश्व में एक साल में 11 लाख से अधिक लोगों की मौतें सड़क हादसे में होती हैं. कई रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि दुनिया में सबसे अधिक सड़क हादसे भारत में होते हैं. हम इन आंकड़ों को देखेंगे और इनके बारे में जानेंगे, लेकिन उससे पहले हाल ही में देश में हुई दो सड़क घटनाओं की बात करेंगे, जिसमें अलग-अलग घटनाओं में एक परिवार के 4 और एक परिवार के 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई.

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हादसा

बीते दिनों दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक बड़ा हादसा हो गया. इसमें एक ही परिवार के चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. इस हादसे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. जानकारी के अनुसार, यह हादसा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सहारनपुर के पास हुआ. वीडियो में देखा गया कि जब एक्सप्रेसवे पर एक कार रिवर्स ले रही (पीछे की ओर आती कार) थी, तो पीछे से तेज स्पीड में आ रही स्कॉर्पियो ने उसमें जोरदार टक्कर मार दी. यह टक्कर इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और स्कॉर्पियो पलट कर क्षतिग्रस्त हो गई. इस हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत की खबर सामने आई, जबकि तीन लोग जख्मी बताए गए.

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एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत

दूसरी घटना महाराष्ट्र के अमरावती की है. जानकारी के अनुसार, सोमवार को पुलिस ने बताया कि अमरावती जिले में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर एक खड़ी ट्रक से कार टकरा गई. इस दुर्घटना में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई. पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह दुर्घटना रविवार (28 जून 2026) दोपहर करीब 12.30 बजे धामनगांव रेलवे सीमा के पास हुई थी.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि परिवार के सदस्य एक समारोह में शामिल होने के लिए अकोला जा रहे थे, तभी उनकी कार रेलवे लाइन की सीमा के पास खड़ी एक ट्रक से टकरा गई. मृतकों की पहचान भास्कर जीवने, उनके बेटे रमेश (जो कार चला रहा था), पत्नी लता, बहू आरती और 10 वर्षीय पोती तृषा के रूप में की गई थी. ये सभी चंद्रपुर के निवासी थे.

सड़क हादसे में हर साल 11 लाख लोगों की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले सड़क हादसों में हर साल 11 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है. वहीं, 20 से 50 लाख लोग ऐसे होते हैं, जो इन हादसों में गंभीर चोट के शिकार होते हैं और उनमें से कई दिव्यांग (विकलांग) हो जाते हैं. सड़क दुर्घटनाओं से व्यक्तियों, उनके परिवारों और पूरे देश को काफी आर्थिक नुकसान होता है. सड़क दुर्घटनाओं के कारण अधिकांश देशों को अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3% खर्च करना पड़ता है.

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सड़क दुर्घटना संबंधित अहम बातें

  • WHO के अनुसार, दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लगभग 1.19 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है.
  • सड़क दुर्घटनाओं में लगी चोटें 5 से 29 साल की उम्र के बच्चों और युवाओं की मौत का मुख्य कारण हैं.
  • सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में से दो तिहाई कामकाजी उम्र (18 से 59 वर्ष) के लोगों में होती हैं.
  • सड़क हादसे में पुरुषों के मारे जाने की संभावना महिलाओं की तुलना में आमतौर पर 3 गुना अधिक होती है.
  • विश्व भर में सड़कों पर होने वाली मौतों में से 92% मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं, जबकि इन देशों में विश्व के लगभग 60% वाहन मौजूद हैं.
  • सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की दर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अफ्रीकी क्षेत्र में सबसे अधिक और यूरोपीय क्षेत्र में सबसे कम है. यहां तक ​​कि उच्च आय वाले देशों में भी, निम्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में शामिल होने की संभावना अधिक होती है.
  • सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में से आधे से अधिक मौतें पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और मोटरसाइकिल चालकों सहित सड़कों पर चलने की आदत नहीं रखने वाले लोगों (कभी-कभी सड़कों पर चलने वाले) के बीच होती हैं.
  • सड़क यातायात दुर्घटनाओं के कारण अधिकांश देशों को अपने सकल घरेलू उत्पाद का 3% नुकसान होता है.

भारत में सड़क दुर्घटनाएं

अब भारत में सड़क हादसे के आंकड़ों को देखते हैं. ये आंकड़े सड़क और परिवहन मंत्रालय से लिए गए हैं. हम यहां आपको 2021 से लेकर 2023 तक देश में हुए सड़क हादसों की संख्या की जानकारी दे रहे हैं. साल 2021 में भारत में कुल 4 लाख 12 हजार 432 सड़क हादसे हुए थे. इसमें 3 लाख 84 हजार 448 लोग घायल हुए थे और कुल 1 लाख 53 हजार 972 लोगों की मौत हुई थी.

अब बात साल 2022 की करेंगे. इस साल में कुल सड़क हादसे 4 लाख 61 हजार 312 हुए थे, जिनमें 1 लाख 68 हजार 491 लोगों की मौत और 4 लाख 43 हजार 366 लोग घायल हुए थे. वहीं, साल 2023 में कुल 4 लाख 80 हजार 583 सड़क हादसे हुए थे. इसमें 1 लाख 72 हजार 890 लोगों की मौत हुई थी और 4 लाख 62 हजार 825 लोग घायल हुए थे.

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सड़क दुर्घटनाओं की कुछ खास वजहें

WHO के अनुसार, दुनिया में सड़क दुर्घटनाएं की कई वजहें हैं, इनमें से कुछ खास वजहों को हम यहां आपको बता रहे हैं.

तेज स्पीड
औसत गति में वृद्धि दुर्घटना होने की संभावना और दुर्घटना के परिणामों की गंभीरता दोनों से सीधे तौर पर संबंधित है. उदाहरण के लिए, औसत गति में प्रत्येक 1% की वृद्धि से घातक दुर्घटना का जोखिम 4% और गंभीर दुर्घटना का जोखिम 3% बढ़ जाता है.

नशे में गाड़ी चलानाआपने कई जगहों, सड़कों और एक्सप्रेसवे पर लिखा हुआ देखा होगा कि शराब या कोई भी नशा करके गाड़ी न चलाएं. WHO कहता है कि नशा (शराब आदि) के प्रभाव में गाड़ी चलाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप मौत या गंभीर चोटें हो सकती हैं.

सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग न करना

अगर आप मोटरसाइकिल, स्कूटर चला रहे हैं या पीछे बैठे हुए हैं तो आपको अपनी सुरक्षा और नियम का पालन करते हुए हेलमेट पहनना होता है. वहीं, अगर आप कार में बैठे हुए हैं तो सीट बेल्ट बांधनी होती है. इसके अलावा आप जब भी किसी वाहन या गाड़ी पर बैठते हैं तो उसके अनुसार, सुरक्षा के जो भी उपकरण होते हैं, वो आपको पहनने होते हैं. कई लोग इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं. इससे भी सड़क हादसे में जान गंवाने या गंभीर रूप से चोट लगने की अधिक संभावनाएं होती हैं.

  • WHO के अनुसार, हेलमेट का सही उपयोग दुर्घटना में मौत के जोखिम को 6 गुना से अधिक और मस्तिष्क की चोट के जोखिम को 74% तक कम कर सकता है.
  • सीट बेल्ट पहनने से वाहन में सवार लोगों की मौत का खतरा 50% तक कम हो सकता है.
  • बच्चों को सुरक्षित रखने वाले उपकरणों का उपयोग करने से शिशुओं की मृत्यु दर में 71% तक की कमी आ सकती है.

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गाड़ी चलाते समय ध्यान भटकना

गाड़ी चलाते वक्त आपका ध्यान कहीं और नहीं भटकना चाहिए क्योंकि ध्यान भटकते ही हादसे की आशंका काफी बढ़ जाती है. आपने सड़क किनारे और कई जगहों पर लिखा हुआ देखा होगा कि गाड़ी चलाते समय फोन पर बात न करें. सावधानी हटी दुर्घटना घटी. अगर आपको नींद आ रही है तो गाड़ी न चलाएं.

WHO के अनुसार, मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले ड्राइवरों के दुर्घटना में शामिल होने की संभावना मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने वाले ड्राइवरों की तुलना में लगभग 4 गुना अधिक होती है. गाड़ी चलाते समय फोन का इस्तेमाल करने से प्रतिक्रिया समय धीमा हो जाता है (खासकर ब्रेक लगाने की प्रतिक्रिया समय, साथ ही ट्रैफिक सिग्नल पर प्रतिक्रिया समय भी), और सही लेन में रहना और उचित दूरी बनाए रखना मुश्किल हो जाता है.
हैंड्स-फ्री फोन, हैंडहेल्ड फोन सेट की तुलना में ज्यादा सुरक्षित नहीं होते. मैसेज भेजने से दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है. इन सभी के अलावा गाड़ी चलाने के लिए सड़क सुरक्षा के नियमों का पता न होना, यातायात सिग्नल्स का नॉलेज न होना और यातायात कानूनों का पालन न करना भी हादसे की वजह होते हैं.

सड़क हादसों का रोकथाम

अब हम बात सड़क हादसे की रोकथाम की करेंगे. WHO के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है. सरकारों को सड़क सुरक्षा के लिए कई कदम उठाने चाहिए. इसके लिए परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों के साथ-साथ निजी क्षेत्र और नागरिक समाज संगठनों की भागीदारी आवश्यक है. इसमें सड़कों, वाहनों और सभी सड़क का इस्तेमाल करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कदम शामिल हैं.

प्रभावी उपायों में सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर का डिजाइन तैयार करना और भूमि उपयोग और परिवहन नियोजन में सड़क सुरक्षा सुविधाओं को शामिल करना, वाहनों की सुरक्षा सुविधाओं में सुधार करना; सड़क यातायात दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए दुर्घटना के बाद की देखभाल को बढ़ाना; प्रमुख जोखिमों से संबंधित कानूनों को निर्धारित करना और लागू करना और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना शामिल है.

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