Israel-Lebanon War: होर्मुज जलडमरूमध्य में ADNOC के तेल टैंकर पर भीषण हमला हुआ. इसके लिए संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया है. उधर, ईरान समर्थित हूतियों ने यमन में लाल सागर के एक बंदरगाह पर हमला किया. दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों में नौ लोग मारे गए.
होर्मुज में एक जहाज पर हमला
शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने बताया कि अबू धाबी की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC के एक टैंकर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रते समय हमला किया गया. एजेंसी ने बताया कि यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ और इसमें कोई घायल नहीं हुआ. पिछले एक हफ़्ते में इस अहम समुद्री रास्ते पर ADNOC द्वारा संचालित जहाजों पर हुआ यह तीसरा हमला है. संयुक्त अरब अमीरात ने हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया और उससे बिना उकसावे के किए जा रहे इन हमलों को रोकने को कहा. 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से शिपिंग बाधित हुई है और यह जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है.
तीन बच्चों सहित सात लोग मारे गए
दक्षिणी लेबनान पर इज़रायली हवाई हमलों में शनिवार को नौ लोग मारे गए, यह इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच 20 जून को अनिश्चित संघर्ष विराम लागू होने के बाद से सबसे घातक हमलों में से एक है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य समाचार एजेंसी ने कहा कि अंसार गांव के किनारे एक घर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों में तीन बच्चों सहित सात लोग मारे गए और दो घायल हो गए. दूसरे, दीर अल-ज़हरानी गांव में दो लोग मारे गए और नौ घायल हो गए. हिजबुल्लाह ने सीधी बातचीत से इनकार कर दिया.
यमन में हूतियों ने लाल सागर बंदरगाह पर किया हमला
यमन की सेना ने शनिवार को कहा कि ईरान समर्थित हूतियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण वाले लाल सागर के एक अहम बंदरगाह पर हमला किया, जिसमें एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई. सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नाज़िली ने कहा कि हूतियों ने शुक्रवार शाम मोखा बंदरगाह पर छह बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. उन्होंने इसे एक नई आतंकवादी कार्रवाई बताया.
उन्होंने बताया कि हमले में आठ लोग घायल हो गए और दो मरीन लापता हैं. सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों और सऊदी अरब पर हूतियों का यह हालिया हमला है. यह तनाव बढ़ने का एक हिस्सा है, जिससे यमन के पूरी तरह से युद्ध की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया है. 2022 में हुए संघर्ष-विराम समझौते के कारण देश के गृह युद्ध के दौरान हो रही भारी लड़ाई रुक गई थी. जानकारों का कहना है कि हूतियों की बढ़ती आक्रामकता यह दिखाती है कि ईरान किस तरह अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बढ़ा रहा है.
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News Source: PTI
