ABVP Politics: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) दिल्ली के आह्वान पर आज नई दिल्ली में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों और प्रमुख छात्र प्रतिनिधियों का विशाल महाजुटान हुआ. इसमें 15 हजार विद्यार्थियों ने सहभागिता की. देश के अलग-अलग हिस्सों से आए इन निर्वाचित प्रतिनिधियों ने एक मंच पर एकत्रित होकर ‘अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ’ का सामूहिक संकल्प लिया. यह महाजुटान देश के विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए उन छात्र प्रतिनिधियों की एकजुट आवाज बना, जो अपने-अपने परिसरों में लाखों विद्यार्थियों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान
लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान होना चाहिए
हाल ही में संपन्न विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्रसंघ चुनावों में अभाविप ने उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए अनेक प्रमुख छात्रसंघों में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है. इन्हीं निर्वाचित प्रतिनिधियों ने आज दिल्ली में एकत्रित होकर स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और विधि का शासन सर्वोपरि हैं. देशभर में ‘अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ’ अभियान के अंतर्गत आयोजित छात्र गर्जना रैलियों की कड़ी में यह महाजुटान छात्रशक्ति की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का व्यापक राष्ट्रीय स्वरूप प्रस्तुत करता है.
अनिवार्य शर्तें हैं लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन
इस महाजुटान में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष यश डबास, सचिव रिया छावड़ी एवं संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह. पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अंकित भिदान एवं पूर्व अध्यक्ष गौरववीर सोहल. लद्दाख विश्वविद्यालय के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि. डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष नवदीप राणा. उत्कल विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अभिराम. गुवाहाटी विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष मानस प्रतिम कलिता तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व संयुक्त सचिव वैभव मीणा सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारी एवं प्रमुख छात्र प्रतिनिधि सम्मिलित हुए. इन प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचित जनादेश का सम्मान, संस्थाओं की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन भी इसकी अनिवार्य शर्तें हैं.
सार्वजनिक भ्रम का माध्यम क्यों बनाया जा रहा?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी वास्तविक शक्ति जनता के जनादेश, संविधान तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता में निहित है. राजनीतिक असहमति और सरकार की आलोचना लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति नागरिकों के मन में अविश्वास पैदा करने के प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण हैं. राहुल गांधी एवं विपक्षी दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस आपत्ति है, तो उसे संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करने के बजाय राजनीतिक आरोपों और सार्वजनिक भ्रम का माध्यम क्यों बनाया जा रहा है? लोकतंत्र आरोपों, राजनीतिक नैरेटिव और सड़कों पर दबाव बनाने से नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रियाओं के सम्मान से मजबूत होता है.
लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय देना चाहिए
वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों पर ‘Smash the Patriarchy’ और महिला नेतृत्व की बात करते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के भीतर भी इन आदर्शों की वास्तविक अभिव्यक्ति दिखाई देनी चाहिए. क्या कांग्रेस में महिलाओं को निर्णायक नेतृत्व की पर्याप्त भूमिका मिलेगी या महिला सशक्तीकरण की बातें केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित रहेंगी? विपक्ष को अपने सार्वजनिक दावों और संगठनात्मक व्यवहार में समानता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय देना चाहिए. भारत में सरकारें जनता के मत से बनती और बदलती हैं, न कि भीड़ के दबाव अथवा अराजकता के माध्यम से. बांग्लादेश और नेपाल की परिस्थितियां भारत के लोकतांत्रिक भविष्य का कोई खाका नहीं हो सकतीं. देश का युवा संविधान, राष्ट्रीय दायित्व और लोकतांत्रिक सहभागिता में विश्वास रखता है. आज देशभर के विश्वविद्यालयों के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों का दिल्ली में एक मंच पर एकत्रित होना इसी विश्वास का प्रमाण है. ABVP लोकतांत्रिक माध्यमों से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय हितों के संरक्षण के लिए निरंतर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी.
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छात्रशक्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खड़ी
ABVP दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों का दिल्ली में यह महाजुटान भारतीय लोकतंत्र में युवाओं की आस्था और उनकी जिम्मेदार भूमिका का स्पष्ट संदेश है. विभिन्न विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन किया है और इन प्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे अपने परिसरों में सकारात्मक छात्र राजनीति, स्वस्थ संवाद एवं लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करें. विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने के केंद्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नेतृत्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की महत्वपूर्ण प्रयोगशालाएं हैं. आज देशभर के छात्र प्रतिनिधियों ने एक मंच से यह स्पष्ट किया है कि छात्रशक्ति अराजकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं के साथ खड़ी है. ABVP दिल्ली इस प्रतिबद्धता को विश्वविद्यालय परिसरों में और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी.
उपस्थित सभी छात्र प्रतिनिधियों ने लिया संकल्प
ABVP नीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के निर्वाचित अध्यक्ष यश डबास ने कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों के निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों का दिल्ली में एकत्रित होना विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्रीय एकजुटता का परिचायक है. हम सभी अपने-अपने विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के विश्वास और जनादेश से चुनकर आए हैं. हमारा स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र में विचारों की भिन्नता और असहमति का पूरा सम्मान होना चाहिए, लेकिन अराजकता और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं हो सकती. देश का युवा सकारात्मक परिवर्तन, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. आज यहां उपस्थित सभी छात्र प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया है कि वे अपने-अपने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लोकतांत्रिक संवाद, अनुशासन और संवैधानिक मर्यादाओं को मजबूत करेंगे.
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