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‘UAPA मामलों में ‘बेल नियम है और जेल अपवाद’…’ SC ने नार्को-आतंकवाद मामले में एक आरोपी को दी जमानत

by Sachin Kumar
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UAPA : शीर्ष अदालत ने UAPA के तहत बंद एक आरोपी को जमानत दे दी और कहा कि UAPA मामलों में भी ज़मानत एक नियम है और जेल एक अपवाद है. कोर्ट ने आरोपी को पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी देने का भी निर्देश दिया है.

UAPA : सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले पर असहमति जताई है जिसमें 2020 के दंगों में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार दिया था. शीर्ष अदालत ने UAPA के तहत बंद एक आरोपी को जमानत दे दी और कहा कि UAPA मामलों में भी ज़मानत एक नियम है और जेल एक अपवाद है. कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स की तस्करी और आतंकवाद को फंड देने के आरोपी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जस्टिस BV नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने जमानत दी है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी देने का निर्देश दिया है.

अनुच्छेद 21- 22 के अधीन काम करना चाहिए

हाई-प्रोफ़ाइल नार्को-टेरर मामले में NIA जांच कर रही है, जिसमें 2020 में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि UAPA की धारा 43D(5) अनिश्चित काल तक जेल में रखने को सही ठहरा सकती है, लेकिन अनुच्छेद 21 और 22 के अधीन ही काम करना चाहिए. यह धारा जमानत पर कड़ी पाबंदियां लगाती है. दिल्ली दंगों से जुड़े गुलफिशा फातिमा मामले में दो जजों की बेंच की तरफ फैसले पर असहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि उसने KA नजीब मामले में दिए गए फैसले का ठीक से पालन नहीं किया गया. इसमें UAPA के तहत मामलों में मुकदमे में होने वाली लंबी देरी को जमानत का एक आधार माना गया था.

सभ्य समाज की नींव

दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कई आरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम को इस प्रकार की राहत नहीं दी गई. बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जमानत एक नियम है, जबकि जेल सिर्फ एक अपवाद है. यह अनुच्छेद 21 और 22 से निकला एक संवैधानिक सिद्धांत है और निर्दोष होने की धारणा कानून के शासन से चलने वाले किसी भी सभ्य समाज की नींव है.

अंद्राबी ने दी HC के फैसले को SC में चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि केए नजीब मामले में उसका फैसला एक बाध्यकारी कानून है. इसको ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट या फिर इस कोर्ट की कम जजों वाली बेंच भी कमजोर नहीं करतीं. साथ ही उससे न तो बच सकती है और न ही अनदेखीं कर सकती है. बता दें कि केए नजीब मामला सुप्रीम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला है, जो 2021 में UAPA के तहत जमानत देने का मामला था. दूसरी तरफ अंद्राबी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि सेलफोन रिकॉर्ड की जांच से पता चलता है कि अंद्राबी सीमा पार के आंतकियों के संपर्क में था.

हेरोइन सप्लाई करने का था जिम्मा

वहीं, आरोपियों की गिरफ्तारी से जुड़ी घटनाओं का क्रम बताते हुए NIA ने कहा कि 11 जून, 2020 को पुलिस ने हंदवाड़ा के कैरो ब्रिज पर अब्दुल मोमिन पीर की एक कार को रोका. तलाशी के दौरान 20.01 लाख रुपये नकद और दो किलो हेरोइन जब्त की गई और फिर पीर को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद पीर की तरफ से किए गए खुलासे के बाद अंद्राबी को गिरफ्तार किया गया. चार्जशीट में कहा गया है कि शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपी कथित तौर पर सीमा पार से तस्करी और जम्मू-कश्मीर तथा देश के अन्य हिस्सों में हेरोइन की सप्लाई में शामिल था. वे पाकिस्तान में मौजूद अपने साथियों से हेरोइन हासिल करते थे.

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News Source: PTI

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