BRICS Summit 2026: ब्रिक्स समिट का साझा घोषणा पत्र जारी कर दिया गया है. इसमें ग्लोबल साउथ के लिए समान भागीदारी का आह्वान किया गया है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर ईरान और UAE के बीच गहरे मतभेदों को कई दौर की अनौपचारिक बातचीत के बाद दूर कर लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की मेजबानी में हो रहे दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के पहले दिन की चर्चाओं के समापन के बाद साझा घोषणा पत्र को अपनाए जाने की घोषणा की.
ईरान और UAE की नाराजगी को किया दूर
दूसरी ओर घोषणापत्र के मसौदे पर बातचीत के आखिरी समय तक चलती रही क्योंकि शुरुआत में ईरान और UAE दोनों ही अपने रुख पर अड़े हुए थे. हालांकि, भारत ने बातचीत के माध्यम से समाधान ढूंढ निकाला. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भी कहा था कि ब्रिक्स आम सहमति पर आधारित समूह है, जिसका मतलब है कि कोई भी एक सदस्य अंतिम संयुक्त घोषणापत्र को रोक सकता है.
पुराने संस्थानों से नई दुनिया को नहीं चलाया जा सकता
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हाथ मिलाते हुए देखा गया. मोदी ने अपने समापन भाषण में कहा कि आज की चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के जरिए नहीं चलाया जा सकता है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार जरूरी है. साथ ही हमने इस बात पर जोर दिया है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में ग्लोबल साउथ की बराबर की भागीदारी होनी चाहिए.
क्या है नए घोषणापत्र में?
भारत की अध्यक्षता में बनाए गए घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जाहिर की. टैरिफ ने व्यापार को प्रभावित किया है और यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के भी खिलाफ है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा दबाव वाले नियमों की भी कड़े शब्दों में आलोचना की है.
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विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाया जाए
इसके अलावा घोषणा पत्र में संघर्षों को रोकने के लिए एकजुटता की मांग की है. इसमें संघर्षों की मूल वजहों को रोकने के लिए कई प्रयास भी शामिल हैं. समूह ने बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से भी निपटाने की बात कही है. ब्रिक्स देशों ने एक ऐसे बहुपक्षीय दृष्टिकोण की वकालत की जो प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग देशों के नजरिए को ध्यान में रखे. साथ ही अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में बातचीत व सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया है.
मध्य पूर्व में शांति लाने का प्रयास करना चाहिए
वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स समूह को मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए प्रयास करने चाहिए. शी ने यह भी कहा कि चीन शांति स्थापित करने के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करेगा. यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के हितों के खिलाफ है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा.
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News Source: PTI
