India-China Trade: भारत और चीन के रिश्तों में इन दिनों कूटनीतिक हलचल तेज है. 18वें ब्रिक्स समिट के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत पहुंचे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है. लेकिन राजनीति और कूटनीति के साथ दोनों देशों के रिश्तों का एक बहुत अहम पहलू कारोबार भी है. आंकड़े बताते हैं कि भारत और चीन के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है. हालांकि, इसके साथ ही भारत का व्यापार घाटा भी चिंता बढ़ा रहा है.
127.7 अरब डॉलर का खेल
भारत ने साल 2025-26 में चीन के साथ कुल 127.7 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार किया. ये आंकड़ा 2024-25 के 118.39 अरब डॉलर के मुकाबले करीब 7.9 फीसदी ज्यादा है. हालांकि, इस बढ़ते कारोबार की तस्वीर पूरी तरह संतुलित नहीं है. दरअसल, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया. वहीं, एक साल पहले ये करीब 85 अरब डॉलर था. यानी भारत चीन से जितना सामान खरीद रहा है, उसके मुकाबले चीन को होने वाला भारतीय निर्यात काफी कम है.
एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट
भारत के लिए अच्छी खबर ये है कि चीन को होने वाला निर्यात भी बढ़ा है. 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात 36.62 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 14.25 अरब डॉलर था. दूसरी तरफ चीन से भारत का आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.62 अरब डॉलर पहुंच गया. 2024-25 में यह 113.44 अरब डॉलर था. भारत के कुल आयातित सामान में चीन की हिस्सेदारी करीब 17 फीसदी रही, जो पिछले साल 15.7 फीसदी थी. वहीं, भारतीय एक्सपोर्ट्स में चीन की हिस्सेदारी 4.4 फीसदी रही.
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चीन पर निर्भर भारत?
यहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है. भारत चीन से सिर्फ तैयार सामान ही नहीं खरीदता, बल्कि बड़ी मात्रा में ऐसे औद्योगिक इनपुट भी मंगाता है, जिनका इस्तेमाल भारत की अपनी मैन्युफैक्चरिंग में होता है. 2025 में चीन से भारत के करीब 98.5 फीसदी इम्पोर्ट इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स थे. इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कम्प्यूटर्स और ऑर्गेनिक केमिकल्स की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही. करीब 82.6 अरब डॉलर के इम्पोर्ट्स इन्हीं चार प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े थे. इलेक्ट्रॉनिक्स इम्पोर्ट्स में चीन की हिस्सेदारी करीब 43 फीसदी रही. मशीनरी और कम्प्यूटर्स में 40 फीसदी और ऑर्गेनिक केमिलक्स में लगभग 44 फीसदी है. यानी मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV बैटरी, सोलर मॉड्यूल, फ़ार्मास्युटिकल API और स्पेशल केमिकल्स जैसे कई क्षेत्रों की सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका है.
चीन से कितनी हुई कमाई?
व्यापार के साथ निवेश भी दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा है. अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में चीन से करीब 2.51 अरब डॉलर का फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट आया. भारत ने मार्च में कुछ FDI नियमों में राहत दी, लेकिन ये राहत चीन, हांगकांग और भारत के साथ लैंड बॉर्डर शेयर करने वाले बाकी देशों में पंजीकृत संस्थाओं पर लागू नहीं होती. यानी निवेश के मोर्चे पर अभी भी काफी सावधानी बरती जा रही है.
ब्रिक्स पर नजर
ब्रिक्स अब दुनिया की बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्था का प्रभावशाली समूह बन चुका है. इसमें 11 देश शामिल हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, लगभग 40 फीसदी ग्लोबल GDP और करीब 26 फीसदी ग्लोबल ट्रेड का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे में ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी और झी जिंगपिंग की बातचीत सिर्फ सीमा और कूटनीति तक नहीं रहेगी. दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार, भारत का भारी व्यापार घाटा और चीन पर मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन की निर्भरता भी बातचीत के अहम मुद्दे हो सकते हैं. यानी भारत-चीन व्यापार का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन असली चुनौती ये है कि इस बढ़ते कारोबार को भारत के पक्ष में ज्यादा संतुलित कैसे बनाया जाए?
News Source: PTI
