Home Latest News & Updates मुंबई में 55 साल के व्यक्ति की मैनहोल में गिरने से मौत, हर दिन 2 लोग इसी तरह गंवाते हैं जान, ये आंकड़ें चौंका देंगे

मुंबई में 55 साल के व्यक्ति की मैनहोल में गिरने से मौत, हर दिन 2 लोग इसी तरह गंवाते हैं जान, ये आंकड़ें चौंका देंगे

by Neha Singh 3 July 2026, 4:49 PM IST (Updated 3 July 2026, 4:54 PM IST)
3 July 2026, 4:49 PM IST (Updated 3 July 2026, 4:54 PM IST)
Death Due to Manhole

Death Due to Manhole: हर साल की तरह इस बार भी बारिश अपने साथ मातम लेकर आई है. मानसून की शुरुआत में मुंबई में एक दुखद हादसा हो गया. मैनहोल में गिरने से एक 55 साल के व्यक्ति की मौत हो गई. बारिश के मौसम में, बाढ़ के कारण खुले मैनहोल और नाले दिखाई नहीं देते हैं, जिससे लोग अनजाने में इसकी चपेट में आ जाते हैं. यह सिर्फ मुंबई की समस्या नहीं है. देश भर के कई शहरों में हर मानसून के मौसम में ऐसी ही घटनाएं होती हैं. कहीं मैनहोल के ढक्कन गायब रहते हैं, तो कहीं चेतावनी देने वाले साइन बोर्ड नहीं लगे रहते हैं. इन लापरवाही से पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहन सवारों और बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा होता है.

हर साल खुले मैनहोल, सीवर और नालों से जुड़े हादसों में 800-900 लोग अपनी जान गंवा देते हैं. औसतन, हर दिन ऐसे हादसों में लगभग दो से तीन लोगों की मौत होती है. ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सैंकड़ों परिवारों की कहानियां छुपी हैं जिन्होंने ऐसे हादसों में किसी अपने को खोया है. ऐसे में सवाल यह है कि अगर हर मानसून के बाद भी हालात नहीं बदलते हैं, तो इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? नीचे दिए गए आंकड़े आपको और चौंका देंगे.

हालिया दुर्घटना

CCTV फुटेज में वह दिल दहला देने वाला पल दिखा जब 55 साल के शेख, जो अपने मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे, एक खड़े टेम्पो के पास से गुजरे और अचानक गायब हो गए. तीन कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले मजदूरों ने मेंटेनेंस का काम करने के लिए कुछ समय के लिए मैनहोल का ढक्कन हटा दिया था. शेख बारिश के समय मैनहोल देख नहीं पाए और उसमें गिर गए. यह दुर्घटना इस हफ्ते शहर में बारिश से जुड़ी दूसरी मौत थी, जिससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लोगों में भारी गुस्सा फैल गया. डैमेज कंट्रोल के लिए तुरंत कदम उठाते हुए, BMC ने चार सिविक अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया और एक हाई-लेवल जांच शुरू की. बारिश के कारण ही मंगलवार को पूर्वी मुंबई के चेंबूर में एक स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने से एक 11 साल के लड़के की मौत हो गई.

मैनहोल में हुई मौत पर अपने बयान में BMC ने दावा किया कि शेख अपने मोबाइल फोन पर बात कर रहा था और मजदूरों ने कथित तौर पर उसे अलर्ट करने की कोशिश की. कॉर्पोरेशन ने कहा कि पहली नजर में कॉन्ट्रैक्टर साइट पर जरूरी सुरक्षा उपाय पक्का करने में नाकाम रहा. म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने मौत की जांच करने और बचाव के उपाय बताने के लिए एक हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई और सात दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी.

Himachal Mumbai Rain Deaths
Mumbai Rain Death

मौत पर राजनीति

सिविक बॉडी ने अपने सभी डिपार्टमेंट को मैनहोल वर्क साइट के आसपास बैरिकेडिंग पक्का करने का भी निर्देश दिया और आठ दिनों के अंदर सभी मैनहोल का इंस्पेक्शन करने का आदेश दिया. शिवसेना (UBT) की सदस्य और BMC में विपक्ष की नेता किशोरी पेडनेकर ने खुले मैनहोल के आसपास बैरिकेड न होने पर सवाल उठाया. पूर्व MP और शिवसेना नेता मिलिंद देवड़ा ने इस मौत को एक ऐसी दुखद घटना बताया जिसे रोका जा सकता था और जवाबदेही की मांग की. यह घटना महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठाई गई, जहां स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि मौत “गैर इरादतन हत्या” के बराबर है और सरकार से इस पर डिटेल में बयान देने को कहा. हालांकि मौत पर राजनीति के बाद भी हालात बदलने की संभावन कम है. हर मानसून में ये आंकड़ें थोड़े कम-ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन इनमें सुधार होने की संभावना बहुत कम है. क्योंकि सुधार होने होते तो शायद अब तक हो जाते.

2017 की मंबई बाढ़

2017 में जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. दीपक अमरापुरकर की मौत चर्चा में आई थी, जब बारिश में मैनहोल में गिरने से उनकी मौत हो गई थी. 29 अगस्त को मुंबई में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे पूरा शहर थम गया और बड़े पैमाने पर जलभराव हो गया. डॉ. अमरापुरकर दोपहर में अपनी कार से अस्पताल से घर के लिए निकले. उनकी कार एक स्टेशन के पास ट्रैफिक जाम में फंस गई और उसमें पानी भर गया. ऐसे में उन्होंने अपनी कार छोड़ दी और ड्राइवर से कार घर लाने को कहा. डॉक्टर खुद एक छाता लेकर पैदल पानी को पार करके घर जाने लगे.

सेनापति बापट मार्ग पर फिटवाला जंक्शन के पास जलभराव के कारण, वह सड़क पर खुला एक गहरा मैनहोल नहीं देख पाए और उसमें गिर गए. वहां मौजूद लोगों ने उन्हें गिरते देखा और उनकी छतरी मैनहोल के पास पड़ी मिली. लगभग 36 घंटे तक चली व्यापक खोज के बाद, उनका शव 31 अगस्त 2017 को घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर एक सीवेज नाले से बरामद किया गया. पुलिस जांच और BMC की इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार, घटना वाले दिन, छह लोकल लोगों ने बिना इजाजत मैनहोल का ढक्कन हटा दिया था और पानी की निकासी तेज करने के लिए बिना किसी वॉर्निंग बोर्ड या बैरिकेड के उसे खुला छोड़ दिया था.

हर साल 800 ज्यादा लोगों की मैनहोल और गड्ढों में गिरने से होती है मौत

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), के मुताबिक हर साल 800 से 100 मौतें गड्ढों या मैनहोल में गिरने के कारण हो रही हैं. 2021 से 2024 तक के उपलब्ध डेटा को देखने पर यह साफ होता है कि भारत में गड्ढों में गिरने और मैनहोल/सीवर में गिरने से होने वाले एक्सीडेंट एक गंभीर समस्या हैं, जिसमें कोई सुधार होता हुआ नहीं दिखता. 2021 में 841 लोगों की मौत दोनों कारणों से हुईं. 2022 में मैनहोल से जुड़ी मौतों में बढ़ोतरी हुई, जिससे पता चलता है कि शहरी इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम और खुले मैनहोल की समस्या अभी पूरी तरह से हल नहीं हुई है. 2023 में 847 लोगों की मौत मैनहोल और गड्ढे में गिरने से हुई, तो वहीं 2024 में 810 लोगों ने अपनी जान गंवा दी. हालांकि, इसी दौरान मैनहोल और सीवर से जुड़ी मौतों में बढ़ोतरी हुई, जिससे पता चलता है कि शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में गंभीर कमियां बनी हुई हैं. कुल मिलाकर, डेटा बताता है कि मैनहोल और सीवर सेफ्टी अभी भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है.

वर्षगड्ढे में गिरने से मौतेंमैनहोल/सीवर में गिरने से मौतेंकुल
2021728113841
20228002071,007
2023728119847
2024618192810

हर दिन 2 से 3 लोगों की मौत

इस डेटा से यह समझ में आता है कि हर दिन लगभग 2 से तीन लोग मैनहोल में गिरकर या गड्ढों में गिरकर अपनी जान गंवा रहे हैं. कई दर्दनाक कहानियों के बारे में हम जानते भी नहीं हैं. लोकल प्रशासन, म्युनिसिपल बॉडी और कंस्ट्रक्शन एजेंसियों को यह दुर्घटनाएं कम करने के लिए और कड़े सेफ्टी नियम लागू करने और रेगुलर मॉनिटरिंग करने की जरूरत है.

मानसून क्यों बन जाता है मातम का कारण

भारत में मॉनसून के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है. लोकल म्युनिसिपल बॉडी (जैसे BMC और MCD) की लापरवाही और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर मानसून के मौसम में होने वाली दुर्घटनाओं का मुख्य कारण हैं.

गड्ढे और मैनहोल से जुड़ी दुर्घटनाएं: बाढ़ के दौरान, सड़कों पर खुले मैनहोल और गहरे गड्ढे पानी में छिप जाते हैं. डॉ. दीपक अमरापुरकर जैसे जाने-माने लोग भी इस लापरवाही का शिकार हुए. बिना किसी बैरिकेड या चेतावनी के साइन के खुले रहने पर, ये मैनहोल एक ऐसा मौत का गड्ढा बना जाता है, जो किसी भी शख्स को निगल सकता है. मानसून शुरू होने से पहले अक्सर गड्ढों को भरने का काम सिर्फ कागजों पर या बहुत खराब क्वालिटी के मटीरियल से किया जाता है.

करंट लगने की घटनाएं: बारिश के पानी में खुले और लटके हुए बिजली के तारों से करंट लगना एक आम समस्या है. जब पानी घुटनों तक भर जाता है, तो बिजली के खंभों से पानी में बहने वाला करंट पैदल चलने वालों के लिए जानलेवा हो सकता है. इस साल भी ठाणे की 17 साल की आलिया और ठाणे 42 शशि ने खुले बिजली के तारों के कारण अपनी जान गंवा दी.

पुराने ड्रेनेज सिस्टम: मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों के ड्रेनेज सिस्टम ब्रिटिश जमाने के हैं या दशकों पुराने हैं. यह सिस्टम आज की भारी आबादी और मौजूदा कंक्रीट शहरों से बहने वाले पानी का बोझ संभालने में पूरी तरह से नाकाम है. इसी कारण थोड़ी सी भी बारिश आने पर सड़के भर जाती हैं और लोगों को स्कूल-ऑफिस जाने में भी भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है.

नेचुरल पानी के रास्तों का बंद होना: बिल्डरों और लैंड माफियाओं ने बाढ़ के मैदानों, झीलों और तालाबों को भर दिया है और उन पर कई मंजिला इमारतें बना दी हैं. जब नेचुरल पानी निकलने के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो पानी सड़कों और घरों में घुस जाता है. शहरों में मिट्टी वाली खुली जगहें गायब हो गई हैं. सड़कें, फुटपाथ और सोसाइटियां पूरी तरह से कंक्रीट और डामर से ढकी हुई हैं. इस वजह से ग्राउंडवाटर रिचार्ज नहीं हो पाता है और हल्की बारिश भी मिनटों में “शहरी बाढ़” में बदल जाती है.

बारिश बनी काल! हिमाचल और मुंबई में 6 की मौत, कोई मैनहोल में गिरा तो किसी को लगा करंट

News Source: PTI

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