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‘तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं’… पत्नी के ताने पर खोया आपा, फिर उठाया ये खौफनाक कदम

by Sanjay Kumar Srivastava 3 July 2026, 4:34 PM IST
3 July 2026, 4:34 PM IST
'तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं'... पत्नी के ताने पर खोया आपा, फिर उठाया खौफनाक कदम, HC ने सुनाया ये फैसला

MP High Court: ‘तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं’- पत्नी का यह ताना ही उसकी मौत की वजह बन गया. घर में आपसी विवाद के दौरान कहा कि मैं तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं. इसी बात पर पति अपनी आपा खो बैठा और गर्भवती पत्नी की हत्या कर दी. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है. लोअर कोर्ट ने गर्भवती पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद की सजा दी थी, जिसे हाई कोर्ट ने घटाकर अब सिर्फ सात साल कर दिया है. जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने माना कि यह मर्डर पहले से सोची-समझी साजिश नहीं थी.

हत्या के बाद पुलिस को खुद ही दी जानकारी

कोर्ट के मुताबिक, पत्नी का यह बयान पति की खराब आर्थिक और सामाजिक हैसियत पर सीधा हमला था, जिससे आवेश में आकर उसने आपा खो दिया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, छिंदवाड़ा के चौराई ब्लॉक के रहने वाले शिव कहार ने 18 सितंबर, 2021 को अपनी पत्नी किरण की हत्या कर दी थी, जब वह सात महीने की गर्भवती थी. कहार ने उसके सिर पर पत्थर से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई. घटना के बाद उसने खुद अपने ससुर को फ़ोन किया और पुलिस स्टेशन को अपनी पत्नी की हत्या की जानकारी दी, जिसके बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया.

दंपती के बीच हुई थी बहस

आरोपी ने अपने बयान में कहा था कि घटना के दिन उसकी और पत्नी किरण के बीच बहस हुई थी, जिसके दौरान उसने कहा कि मैं तुम्हारे जैसे हज़ार पति रख सकती हूं. इससे उसे गुस्सा आ गया और उसने पास पड़े पत्थर से किरण के सिर पर वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई. छिंदवाड़ा जिला न्यायालय ने कहार को उसकी हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. लेकिन बाद में सजा के खिलाफ मप्र हाईकोर्ट में अपील दायर की गई. उच्च न्यायालय ने आरोपी की आजीवन कारावास की सजा को घटाकर सात साल के कठोर कारावास में बदल दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि पत्नी के अपमानजनक शब्दों के कारण अचानक और गंभीर उत्तेजना थी.

हाई कोर्ट ने माना- पत्नी की नजर में पति का कोई मूल्य नहीं

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, हम पाते हैं कि यह कोई पूर्व-निर्धारित अपराध नहीं था, पास में पड़े पत्थर का इस्तेमाल किरण को चोट पहुंचाने के लिए किया गया था, जिससे उसकी मौत हो गई. आरोपी ने खुद ही घटना की जानकारी पुलिस और किरण के रिश्तेदारों को दी. पीठ ने कहा कि पत्नी के ताने का अर्थ है कि एक इंसान या पति के रूप में उसका कोई मूल्य नहीं है.

कोर्ट ने मामले के सभी तथ्यों और हालात को देखते हुए ‘हत्या न माने जाने वाले गैर-इरादतन हत्या’ के लिए दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए अपीलकर्ता को अपनी पत्नी की मौत का कारण बनने के लिए धारा 304 पार्ट-II के तहत दोषी ठहराया और उसे सात साल की कठोर कैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. अगर जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो उसे एक साल की और कठोर कैद काटनी होगी.

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News Source: PTI

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