Delhi News: दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. शिक्षा विभाग ने राजधानी के सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई, 2026 तक स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) का गठन करने के निर्देश दिए हैं. यह व्यवस्था दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के तहत लागू की जा रही है.
सरकार के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में बनने वाली यह समिति अगले तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस तय करेगी. इसका उद्देश्य मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर रोक लगाना, अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करना और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है.
कमेटी में कौन-कौन होगा?
SLFRC में स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों का भी प्रतिनिधित्व होगा. समिति में पांच अभिभावक प्रतिनिधि और तीन शिक्षक प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे. इनका चयन सार्वजनिक लॉटरी (ड्रा ऑफ लॉट्स) के माध्यम से होगा, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी. पूरी प्रक्रिया की निगरानी शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर करेंगे. इसके अलावा, स्कूलों को लॉटरी आयोजित करने से कम से कम सात दिन पहले सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके.
31 जुलाई तक देना होगा फीस प्रस्ताव
दिल्ली सरकार ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे 31 जुलाई, 2026 तक अगले तीन वर्षों के लिए अपना शुल्क प्रस्ताव SLFRC के सामने प्रस्तुत करें. इसके साथ पिछले तीन वर्षों के चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित ऑडिटेड वित्तीय विवरण देना भी अनिवार्य होगा. बिना ऑडिट वाले या स्वयं प्रमाणित दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नई फीस संरचना को विधिवत मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक सभी स्कूल शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अनुसार ही फीस वसूलेंगे. यदि इस दौरान कोई स्कूल अतिरिक्त फीस वसूलता है, तो वह अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन होगी और जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को वापस या समायोजित की जाएगी.
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नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि शिक्षा समाज सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने या छिपे हुए शुल्कों के जरिए अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल SLFRC गठन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक दंड, स्कूल की मान्यता निलंबित या रद्द करने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्कूल प्रबंधन का सरकारी अधिग्रहण जैसे सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं.
अभिभावकों ने उठाए सवाल
हालांकि, अभिभावकों का कहना है कि यह कदम पहले उठाया जाना चाहिए था. उनका कहना है कि बढ़ती फीस के खिलाफ वे लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं और कई मामलों में अदालत का भी रुख कर चुके हैं. उनका मानना है कि अगर यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले लागू होती तो इसका ज्यादा प्रभाव पड़ता. अब सत्र के बीच में नई व्यवस्था लागू होने से कानूनी विवाद बढ़ने और फीस निर्धारण में देरी की आशंका भी जताई जा रही है.
निजी स्कूलों ने कैमरे पर आने से किया इनकार
इस पूरे मुद्दे पर निजी स्कूलों का पक्ष जानने के लिए कई स्कूलों से संपर्क किया गया, लेकिन चार से पांच स्कूलों ने कैमरे पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि सरकार का यह फैसला निजी स्कूलों के खिलाफ है और वे फिलहाल इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि नई व्यवस्था का क्रियान्वयन किस तरह होता है और क्या इससे वास्तव में अभिभावकों को राहत मिलती है.
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- दिल्ली से शालिनी झा की रिपोर्ट
