Home Latest News & Updates लखनऊ अग्निकांड के बाद देश में उठी मांग, सरकार को बनाना चाहिए एक सेफ्टी नियम; SC में याचिका दायर

लखनऊ अग्निकांड के बाद देश में उठी मांग, सरकार को बनाना चाहिए एक सेफ्टी नियम; SC में याचिका दायर

by Sachin Kumar 27 June 2026, 2:18 PM IST
27 June 2026, 2:18 PM IST
Plea SC fire life safety framework public occupancy

Supreme Court : हाल ही में लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से 15 स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी. इसके बाद देश भर में सार्वजनिक स्थानों पर बनी बिल्डिंगों में एक सेफ्टी नियम की मांग उठने लगी. इसी बीच स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और दूसरी सार्वजनिक इमारतों में आग लगने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई. याचिका में राष्ट्रीय ढांचे को मजबूती देने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है.

जीवन सुरक्षा ऑडिट किया जाए

वकील नरेन्द्र कुमार गोस्वामी की तरफ से दायर की गई याचिका में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ये निर्देश देने की मांग की गई है कि वे तीन-चार महीनों के भीतर सार्वजनिक बिल्डिंगों का आग और जीवन सुरक्षा ऑडिट करें. इनमें कोचिंग हब, स्कूलों, अस्पतालों, होटलों, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल और मॉल को शामिल किया गया. दिल्ली और लखनऊ की घटनाओं का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि ऐसी घटनाओं के बार-बार होने की एक बड़ी वजह है कि इन सार्वजनिक इमारतों में जीवन सुरक्षा से जुड़े कड़े इंतजाम नहीं किए गए थे. साथ ही इनके लिए कोई कानून भी लागू नहीं है.

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ऐसी बिल्डिंगों का न किया जाए इस्तेमाल

गोस्वामी ने कहा कि न्यायिक और प्रशासनिक चेतावनियों के बाद भी ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लग पाई. इस मामले में कई सारी FIR दर्ज की गई हैं और घटना के बाद बनाई गईं कमेटियां भी काफी नहीं है. अब वक्त आ गया है कि आर्टिकल 21 के तहत इन घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. याचिका में सभी राज्यों को अदालत में जिलावार उच्च जोखिम वाले परिसरों का डेटा प्रस्तुत करने की मांग गई है. इसमें अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के बिना परिसरों की संख्या भी शामिल हो. साथ ही सार्वजनिक बिल्डिंगों का इस्तेमाल तब तक नहीं किया जाना चाहिए जब तक उनको NOC न मिल जाए.

सार्वजनिक इमारतों का होना चाहिए निरीक्षण

इसके अलावा याचिका में मांग की गई है कि उन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अनिवार्य विभागीय कार्यवाही और आपराधिक कानून के तहत विचार किया जाए जो ऐसी बिल्डिंगों के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं. साथ ही अधिकारियों को बच्चों और छात्रों की खास सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. इसके लिए असुरक्षित बेसमेंट, अवैध फ्लोर, भीड़-भाड़ वाली सीढ़ियों, सिर्फ़ एक निकास वाले परिसर या ऐसी इमारतों में स्कूल का निरीक्षण किया जाना चाहिए.

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