MP News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा आदिवासी ब्लॉक से एक गंभीर खबर सामने आ रही है. यहां दूषित पानी और संक्रमण की वजह से कई आदिवासी बच्चे बीमारियों की चपेट में आ गए हैं और अब तक 11 मासूमों की जान जाने का दावा किया जा रहा है. इस संवेदनशील मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की राज्य स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीडि़त परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और गंभीर बच्चों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट करने की मांग की है.
बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका गांवों में दहशत
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि बिरसा ब्लॉक में दूषित पानी, मलेरिया, निमोनिया और सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों का कहर जारी है. उन्होंने दावा किया कि पिछले एक हफ्ते में 11 बच्चों की जान जा चुकी है, हालांकि प्रशासन केवल 7 मौतों की बात स्वीकार कर रहा है. बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका जैसे गांवों में दहशत का माहौल है और पिछले दस दिनों से लगभग हर दूसरे घर में बच्चा बुखार से पीडि़त है. बोंदारी गांव के समारू धुर्वे ने तो अपने दो मासूम बच्चों साहिल और नामिन को निमोनिया के कारण खो दिया.
आदिवासियों की जान संकट में
दिग्विजय सिंह ने सरकार के हर घर नल से जल अभियान पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एक तरफ 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिगड़ी नल-जल योजनाओं और दूषित जल स्रोतों के कारण आदिवासियों की जान संकट में है. स्थानीय विधायक संजय उइके और बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे ने भी प्रभावित परिवारों और अस्पताल में भर्ती बच्चों से मुलाकात कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर चिंता जाहिर की है.
करीब 50 बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे
फिलहाल बालाघाट जिला अस्पताल का बच्चा वार्ड पूरी तरह भरा हुआ है और 40 से 50 बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं. बता दें एक तरफ जहां प्रदेश में जनविश्वास अभियान की बातें हो रही हैं, वहीं बालाघाट के इस आदिवासी अंचल में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है. अब देखना होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री की इस चिट्ठी और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायतों पर राज्य सरकार क्या कदम उठाती है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर मोहन सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती है, लेकिन हालात बद से बदतर हैं.
